नई दिल्ली: जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के सामने अपने कथित भड़काऊ भाषण और इंटरव्यू के वीडियो व ट्रांसक्रिप्ट पेश किए, जिन्हें राष्ट्र-विरोधी करार देकर उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत का आधार बनाया गया था। वांगचुक ने अदालत से कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया और एडिट किए गए वीडियो ‘कुछ आईटी सेल’ द्वारा फैलाए गए। उन्होंने कहा कि हिरासत के आदेश देने वाली अथॉरिटी ने इन वीडियो पर गलत तरीके से भरोसा किया।
हिरासत को चुनौती देते हुए वांगचुक की पत्नी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने जस्टिस अरविंद कुमार और पी. बी. वराले की पीठ को बताया कि सोनम वांगचुक ने कभी सरकार को उखाड़ फेंकने की बात नहीं की। सिब्बल की ओर से बताया गया कि वांगुचक ने न कभी किसी हिंदू देवी का अपमान किया और न ही यह कहा कि लद्दाख के लोग युद्ध के समय भारतीय सेना का समर्थन नहीं करेंगे।
सिब्बल ने कहा कि जिन बयानों को आधार बनाकर कार्रवाई की गई, वे दुर्भावनापूर्ण और भ्रामक थे। वांगचुक ने जो बातें कभी कही ही नहीं, और जिन्हें बाद में फैक्ट-चेकर्स ने भी गलत साबित किया, उसे आधार बनाकर कार्रवाई की गई है।
सोनम वांगचुक को सितंबर में हिरासत में लिया गया था। वे अभी जोधपुर जेल में बंद हैं।
‘सरकार की आलोचना ही लोकतंत्र की असल भावना’
सिब्बल ने कहा कि वांगचुक लद्दाख की पारिस्थितिकी और पर्यावरण की रक्षा के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, और सरकार के खिलाफ बोलना देश विरोधी या राष्ट्रविरोधी कृत्य नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा, ‘उन्होंने (वांगचुक) कहा था कि वे हिंसा नहीं होने देंगे। छठी अनुसूची एक राजनीतिक दल का वादा था। यह 2020 में दिया गया था। अगर 2025 में वे कहते हैं कि चुनाव से पहले इसे पूरा करें तो इसमें क्या गलत है? सरकार विरोधी भावना देश की सुरक्षा के लिए खतरा नहीं है।’
सिब्बल ने कहा, ‘मैं सरकार की आलोचना कर सकता हूँ। यही लोकतंत्र की असली भावना है। और इसका हिस्सा शांतिपूर्ण प्रदर्शन, मार्च और सरकार की आलोचना करना भी है।’
वांगचुक के भाषणों और इंटरव्यू के ट्रांस्क्रिप्ट से पढ़ते हुए कपिल सिब्बल ने बताया कि ‘कुछ आईटी सेल’ ने एक छोटे से क्लिप को अलग संदर्भ में पेश किया, जिससे पूरा विवाद खड़ा किया गया।
उन्होंने कहा, ‘अगर हिरासत लेने वाली अथॉरिटी किसी बयान पर भरोसा करती है, तो उसे पूरा बयान देखना चाहिए, न कि एक-दो पंक्तियों पर। हिरासत आदेश वीडियो के काटे गए अंशों, भ्रामक और झूठे बयानों पर आधारित है, जो एक दुर्भावनापूर्ण रवैये को दर्शाता है, ताकि उन्हें हिरासत में रखा जा सके।’
सरकार को उखाड़ फेंकने से जुड़े कथित बयान का जिक्र करते हुए सिब्बल ने पीठ के सामने पूरा ट्रांस्क्रिप्ट रखा। उन्होंने कहा,
‘इसका सही अनुवाद यह है- मैं कहता हूं कि अगर सरकार को नागरिकों से लगाव नहीं है, पर्यावरण की परवाह नहीं है, तो ऐसी सरकार देश की प्रगति में बाधा है। वह कहते हैं कि मैं भी बदलाव ला सकता हूँ। हमें सबको मिलकर ‘मदर लद्दाख’ और ‘मदर इंडिया’ को बचाने के लिए तैयार रहना चाहिए। इसमें गलत क्या है?’
‘हिंदू देवी के अपमान की बात गलत’
हिंदू देवी का अपमान करने के मामले पर सिब्बल ने कहा, ‘बिना एडिट वाले हिस्से से पूरी तस्वीर सामने आ जाती है। इसका मतलब यह था कि कश्मीर से लद्दाख को मुक्त कराने के बाद केंद्र सरकार छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करने के अपने वादे को पूरा करने में विफल रही। उनका कहना है कि जिस तरह राम ने सीता को रावण के चंगुल से छुड़ाकर बाजार में छोड़ दिया था, केंद्र सरकार ने लद्दाख के साथ भी वैसा ही किया।’
उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कई बार सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की थी और उन्होंने कभी देश के खिलाफ कुछ नहीं कहा। उन्होंने कहा कि उन बयानों को नजरअंदाज किया गया और संदर्भ से हटकर चुनिंदा बातों को उनकी गिरफ्तारी का कारण माना गया।

