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इस्तीफा देने वाले बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री निलंबित, विभागीय जांच के आदेश

बरेली के नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सरकारी नीतियों, खासकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े घटनाक्रम पर असहमति जताते हुए सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

बरेलीः उत्तर प्रदेश सरकार ने इस्तीफा देने वाले सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। राज्य सरकार ने उनके इस्तीफे को स्वीकार करने के बजाय उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है और विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।

सरकार के आदेश के मुताबिक, प्रथम दृष्टया उन्हें कदाचार का दोषी पाया गया है। जांच पूरी होने तक उन्हें केवल नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा और उन्हें शामली जिलाधिकारी कार्यालय से संबद्ध किया गया है। बरेली मंडल के आयुक्त को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है।

बरेली के नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सरकारी नीतियों, खासकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े घटनाक्रम पर असहमति जताते हुए सोमवार (26 जनवरी) को अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

अलंकार अग्निहोत्री ने 13 जनवरी को अधिसूचित ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026’ को ‘काला कानून’ करार देते हुए कहा था कि ये नियम कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक माहौल को दूषित कर रहे हैं और इन्हें तत्काल वापस लिया जाना चाहिए।

इन नए नियमों के तहत उच्च शिक्षा संस्थानों में विशेष समितियों, हेल्पलाइन और निगरानी तंत्र की व्यवस्था अनिवार्य की गई है, ताकि अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों की जातिगत भेदभाव से जुड़ी शिकायतों का समाधान किया जा सके। हालांकि, सामान्य वर्ग के कुछ संगठनों और छात्रों का कहना है कि यह ढांचा उनके खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा दे सकता है और इससे सामाजिक तनाव पैदा होगा।

2019 बैच के पीसीएस अधिकारी अग्निहोत्री ने अपना इस्तीफा ई-मेल के जरिए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह को भेजा था। अपने पत्र में उन्होंने लिखा कि जब सरकारें ऐसी नीतियां अपनाती हैं, जो समाज और राष्ट्र को बांटती हैं, तब उन्हें जगाना जरूरी हो जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक और गणतांत्रिक मूल्यों का क्षरण हो रहा है और ऐसे माहौल में वे व्यवस्था का हिस्सा नहीं बने रह सकते। गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने के बाद मीडिया से बातचीत में अग्निहोत्री ने आरोप लगाया था कि नए यूजीसी नियमों से ब्राह्मणों के खिलाफ अत्याचार बढ़ सकते हैं और इससे सामाजिक अशांति व आंतरिक असंतोष पैदा होगा।

अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे में प्रयागराज माघ मेले की उस घटना का जिक्र किया, जिसमें ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्यों के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई थी। उन्होंने इसे ‘संतों और ब्राह्मणों का घोर अपमान’ बताते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

डीएम आवास में 45 मिनट तक बंधक बनाया गयाः अलंकार

इसी दिन देर शाम अग्निहोत्री ने जिलाधिकारी आवास पर बंधक बनाए जाने का गंभीर आरोप भी लगाया। उन्होंने डीएम आवास से निकलने के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि उन्हें वहां 45 मिनट तक बंधक बनाकर रखा गया, उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ और लखनऊ से आए एक फोन कॉल के बाद उन्हें रातभर रोकने की बात कही गई। उन्होंने कहा कि मीडिया को सूचना देने और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के हस्तक्षेप के बाद उन्हें छोड़ा गया। साथ ही यह भी आरोप लगाया कि उन्हें दो घंटे के भीतर सरकारी आवास खाली करने का निर्देश दिया गया।

उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने उन्हें बातचीत के लिए बुलाया, जहां छुट्टी पर जाने का सुझाव और प्रलोभन दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया का मकसद उनके इस्तीफे को एसआईआर के दबाव से जोड़कर दिखाना था। अधिकारी ने यह भी कहा कि उनकी जान को खतरा है, इसलिए वे अपना आवास खाली करने को मजबूर हैं। उन्होंने राष्ट्रपति और राज्यपाल से अपील करते हुए कहा कि उनके त्यागपत्र को तोड़-मरोड़ कर पेश करने और उन्हें मानसिक रूप से अस्थिर साबित करने की कोशिश की जा रही है।

हालांकि, जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि जब अग्निहोत्री उनसे मिलने आए थे, उस समय सभी अपर जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी, पुलिस और खुफिया विभाग के अधिकारी मौजूद थे। उन्होंने किसी भी तरह की बदसलूकी या बंधक बनाए जाने की बात को निराधार बताया और इस्तीफे के सवाल पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

राजनेताओं ने क्या कहा?

अलंकार अग्निहोत्री की इस्तीफे ने प्रशासनिक के साथ-साथ राजनीतिक हलकों में भी हलचल मचा दी है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने सोशल मीडिया पर लिखा कि शंकराचार्य और उनके शिष्यों पर लाठीचार्ज तथा प्रशासनिक दबाव यह दर्शाता है कि मौजूदा शासन में संविधान, आस्था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता खतरे में है।

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद प्रवीण सिंह एरन ने कहा कि एक वरिष्ठ अधिकारी का इस्तीफा यह दिखाता है कि यह मामला जाति या धर्म का नहीं, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों की गरिमा और संविधान की रक्षा का है।

बरेली के मेयर डॉ. उमेश गौतम ने भी अग्निहोत्री के आवास जाकर मुलाकात की और यूजीसी नियमों में कुछ खामियों को स्वीकार करते हुए उन्हें दूर करने के प्रयास की बात कही।

गौरतलब है कि कानपुर नगर के निवासी अलंकार अग्निहोत्री इससे पहले उन्नाव, बलरामपुर और लखनऊ जैसे अहम जिलों में उपजिलाधिकारी के तौर पर सेवाएं दे चुके हैं। वे बीएचयू से बीटेक और एलएलबी स्नातक हैं और अमेरिका में भी काम कर चुके हैं। प्रशासनिक गलियारों में उनकी पहचान एक सख्त और स्पष्टवादी अधिकारी के रूप में रही है।

‘तीनों शंकराचार्य अविमेक्तेश्वरानंद के साथ’

इस पूरे घटनाक्रम के बीच शंकराचार्य मामले को लेकर संत समाज से भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा कि तीनों शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रशासन किसी संत से प्रमाणपत्र मांगने वाला कौन होता है और प्रयागराज में निर्दोष ब्राह्मणों के साथ की गई मारपीट को बेहद निंदनीय बताया। यह बयान उन्होंने जबलपुर में नर्मदा जन्मोत्सव कार्यक्रम के दौरान दिया।

इधर, माघ मेले में अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गणतंत्र दिवस पर तिरंगा फहराया और प्रशासन पर दबाव बनाने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उन्हें जानबूझकर संगम में स्नान से रोका जा रहा है और यह लड़ाई नकली हिंदू और असली हिंदू के बीच की है। उनका कहना था कि चाहे कितना भी दबाव डाला जाए, वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। माघ मेला प्रशासन और शंकराचार्य के बीच यह विवाद पिछले नौ दिनों से चल रहा है और लगातार गहराता जा रहा है।

इस बीच, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इस पूरे मामले को लेकर राजनीति करने वालों पर तीखा हमला बोला। प्रयागराज में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि जो लोग शंकराचार्य के नाम पर राजनीतिक फायदा उठाना चाहते हैं, उन्हें कभी सफलता नहीं मिलेगी। उन्होंने ऐसे लोगों को संतों, हिंदुओं और भारतीय संस्कृति का द्रोही बताया। मौर्य ने यह भी कहा कि वे स्वयं शंकराचार्य के चरणों में प्रणाम करते हैं और उनसे संगम में स्नान कर विवाद समाप्त करने की प्रार्थना करते रहे हैं।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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