वाशिंगटन: इजराइल-हमास युद्ध को समाप्त करने और मध्य पूर्व में स्थायी शांति स्थापित करने के अपने महत्वाकांक्षी प्रयास के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) में शामिल होने का आधिकारिक निमंत्रण भेजा है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस पत्र को साझा करते हुए इसकी पुष्टि की। यह खबर तब आई जब कुछ ही घंटों पहले पाकिस्तान ने भी उसे ऐसा ही न्योता मिलने की बात कही थी।
राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में भारत की वैश्विक भूमिका की सराहना करते हुए इसे एक ऐतिहासिक और भव्य प्रयास बताया है। उन्होंने पत्र में लिखा कि मध्य पूर्व में शांति को मजबूत करने और वैश्विक संघर्षों को सुलझाने के एक साहसिक दृष्टिकोण पर आगे बढ़ने के लिए वह भारत के प्रधानमंत्री को अपने साथ शामिल होने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं।
यह ‘बोर्ड ऑफ पीस’ ट्रंप के उस 20-सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव के दूसरे चरण का हिस्सा है, जिसे 10 अक्टूबर को लागू किया गया था। ट्रंप ने अपने प्रशासन की पहले से घोषित 20-सूत्रीय गाजा शांति योजना का हवाला देते हुए कहा कि यह बोर्ड उसी रोडमैप का विस्तार है।
इस बोर्ड का सबसे जरूरी काम गाजा में शांति बनाए रखने के अगले कदमों पर नजर रखना है। यह बोर्ड वहां एक नई फिलिस्तीनी कमेटी बनवाएगा और सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय सेना की तैनाती सुनिश्चित करेगा। साथ ही, इसका मकसद हमास से हथियार डलवाना और युद्ध में बर्बाद हुए इलाकों को फिर से बसाना है। बोर्ड के कार्यकारी पैनल में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, जेरेड कुशनर, पूर्व ब्रिटिश पीएम टोनी ब्लेयर, विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा और तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान जैसे प्रभावशाली नाम शामिल हैं।
बोर्ड को लेकर चिंताएं भी
इस पहल की तुलना कुछ विश्लेषक संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं से कर रहे हैं। रॉयटर्स के अनुसार, कई यूरोपीय देशों ने प्रस्तावित चार्टर को लेकर चिंता जताई है और आशंका व्यक्त की है कि इससे संयुक्त राष्ट्र की भूमिका कमजोर हो सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मसौदा चार्टर के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप इस बोर्ड के आजीवन अध्यक्ष होंगे और भविष्य में इसका दायरा गाजा से आगे वैश्विक स्तर तक बढ़ाया जा सकता है।
बोर्ड की सदस्यता की शर्तों को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, अगर भारत इस प्रस्ताव को स्वीकार करता है तो उसे तीन साल की अवधि के लिए बोर्ड की सदस्यता मिलेगी। समाचार एजेंसी एसोसिएट प्रेस (एपी) और एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, जो देश इस मिशन में 1 अरब डॉलर का योगदान देंगे, उन्हें बोर्ड में स्थायी सीट दी जाएगी। हालांकि व्हाइट हाउस ने इन दावों को भ्रामक बताते हुए खारिज कर दिया है। एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि बोर्ड के लिए जुटाई जाने वाली राशि गाजा के पुनर्निर्माण में इस्तेमाल की जाएगी और स्थायी सदस्यता से जुड़ा प्रावधान मसौदा चार्टर में शामिल है।
किन देशों को मिला न्योता?
भारत के साथ-साथ वियतनाम, हंगरी, ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान, जॉर्डन, ग्रीस, तुर्की, मिस्र, कनाडा, पराग्वे और अर्जेंटीना सहित लगभग 60 देशों को इस बोर्ड का हिस्सा बनने के लिए संपर्क किया गया है। एसोसिएट प्रेस के मुताबिक, हंगरी और वियतनाम ने इस आमंत्रण को स्वीकार कर लिया है, जबकि भारत की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
गौरतलब है कि यह निमंत्रण ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ताएं चल रही हैं। रूस से तेल आयात को लेकर ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है जिसके बाद से द्विपक्षीय संबंधों में तनाव भी देखा जा रहा है। ऐसे में ‘गाजा बोर्ड ऑफ पीस’ में भारत की संभावित भागीदारी को कूटनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
इजराइल ने जताई आपत्ति
उधर इस पहल पर इजराइल ने सार्वजनिक रूप से आपत्ति जताई है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने एक तीखी प्रतिक्रिया में कहा कि यह समिति इजराइल के साथ समन्वित नहीं थी और उनकी नीति के विपरीत है। वहीं, राजनयिक हलकों में इस बोर्ड को संयुक्त राष्ट्र के एक संभावित प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखा जा रहा है। सदस्यों की अंतिम सूची की घोषणा आने वाले दिनों में स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान होने की उम्मीद है।

