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तमिलनाडु में ऑनर किलिंग पर बनेगा विशेष कानून, स्टालिन ने सेवानिवृत्त जज केएन बाशा की अध्यक्षता में की आयोग गठित

सीएम एमके स्टालिन ने कहा कि आयोग की सिफारिशों के आधार पर राज्य सरकार एक उपयुक्त कानून बनाने की दिशा में कदम उठाएगी ताकि तमिलनाडु में ऑनर किलिंग जैसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

चेन्नई: तमिलनाडु सरकार ऑनर किलिंग रोकने के लिए कानून बनाने जा रही है। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने गुरुवार को विधानसभा में इसकी घोषणा की। इसके लिए उन्होंने मद्रास हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश केएन बाशा की अध्यक्षता में एक आयोग गठित करने का ऐलान किया। आयोग में कानूनी विशेषज्ञ, प्रगतिशील चिंतक और मानवविज्ञानी शामिल होंगे। यह आयोग राजनीतिक दलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, कानूनविदों और पीड़ित परिवारों से सुझाव लेकर अपनी सिफारिशें सरकार को देगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आयोग की सिफारिशों के आधार पर राज्य सरकार एक उपयुक्त कानून बनाने की दिशा में कदम उठाएगी ताकि तमिलनाडु में ऑनर किलिंग जैसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके। उन्होंने कहा, “तमिल समाज की आत्मा सदियों से इस विचार पर आधारित रही है कि ‘सभी मनुष्य जन्म से समान हैं।’ लेकिन हाल के वर्षों में देशभर में जो घटनाएं हो रही हैं, वे हमें झकझोर देती हैं। क्या यही वह समाज है जिसके लिए हमारे नेताओं ने संघर्ष किया था?”

‘हत्या, घृणा, हिंसा और अपमान सभ्य समाज में अस्वीकार्य’

सीएम स्टालिन ने कहा कि तमिल समाज अपनी बौद्धिक परंपरा के लिए पूरी दुनिया में सम्मानित है और उसे अंदरूनी विभाजन और हिंसा से नहीं टूटने देना चाहिए। उन्होंने कहा, “कोई भी सभ्य समाज किसी व्यक्ति द्वारा दूसरे की हत्या को स्वीकार नहीं कर सकता। केवल हत्या ही नहीं, घृणा, हिंसा और अपमान भी एक सभ्य समाज में अस्वीकार्य हैं।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि अक्सर किसी दुखद घटना से समाज का विवेक झकझोर दिया जाता है। उन्होंने कहा, “इन अपराधों के पीछे वह पितृसत्तात्मक मानसिकता छिपी होती है जो महिलाओं को अपने भविष्य के फैसले लेने का अधिकार नहीं देती। अब समय आ गया है कि इस मानसिकता को समाप्त किया जाए।”

स्टालिन ने बताया कि पुलिस को यह स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी अपराधी को किसी भी परिस्थिति में बख्शा न जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि इस जहरीली सोच के खिलाफ जन-जागरूकता अभियान केवल सामाजिक सुधार आंदोलनों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि राजनीतिक दलों और जनसेवी संगठनों को भी इसमें भाग लेना चाहिए।

उन्होंने कहा, “सभी प्रकार के वर्चस्व को खत्म किया जाना चाहिए। एक ऐसे समाज के निर्माण के लिए जो आत्मसम्मान, समानता और प्रेम पर आधारित हो, सुधारवादी चेतना और अपराध के लिए सख्त सजा, दोनों को साथ-साथ चलना होगा। ये तलवार और ढाल की तरह एक-दूसरे के पूरक हैं।”

मुख्यमंत्री ने यह भी याद दिलाया कि 25 जून 2024 को विधानसभा में तिरुनेलवेली के सीपीआई (एम) कार्यालय पर हमले के बाद भी विधायकों ने ऐसी घटनाओं पर काबू पाने के लिए एक नया कानून बनाने की मांग की थी। उस समय स्टालिन ने कहा था कि मौजूदा कानूनों, जैसे एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम, दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय दंड संहिता के तहत सख्त कार्रवाई ही सबसे प्रभावी उपाय है।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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