नई दिल्ली: ईरान-अमेरिका के हालिया समझौते में इजराइल और लेबनान के बीच संघर्ष विराम के प्रावधान के बावजूद दक्षिणी लेबनान में इजराइली हवाई हमलों के बाद तनाव एक बार फिर बढ़ने लगा है। लेबनान में रातभर चले हमलों में कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। वहीं, स्विट्जरलैंड में ईरान और अमेरिका के बीच समझौते को लागू करने को लेकर प्रस्तावित तकनीकी स्तर की वार्ता भी टाल दी गई है, जिससे पश्चिम एशिया में शांति प्रक्रिया के भविष्य पर फिर से सवाल खड़े हो गए हैं।
लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी नेशनल न्यूज एजेंसी (NNA) के मुताबिक, दक्षिणी लेबनान में इजराइली हमलों में कम से कम 18 लोगों की जान गई। दूसरी ओर, इजराइली सेना ने भी पुष्टि की है कि दक्षिणी लेबनान में हुई भीषण लड़ाई में उसके चार सैनिक मारे गए हैं।
इसी बीच, इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर ने बेहद आक्रामक बयान देते हुए कहा है कि ‘पूरा लेबनान जलना चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘एक इजराइली मां के हर आंसू के बदले हजार लेबनानी माओं को रोना चाहिए। अमेरिका का सम्मान है, लेकिन इजराइल को पूरी दुनिया को यह स्पष्ट कर देना चाहिए कि हमारे बेटों का खून और हमारे नागरिकों की सुरक्षा किसी कीमत पर नहीं छोड़ी जा सकती। हमारा सर्वोच्च कर्तव्य इजराइल के नागरिकों और आईडीएफ के सैनिकों की रक्षा करना है और यह प्रतिबद्धता हर दूसरे विचार से ऊपर है।’
उन्होंने यह भी कहा कि मध्य पूर्व में जीत हासिल करने का तरीका “संयम छोड़कर पूरी ताकत से जवाब देने’ में है।
इजराइल का दावा- हमले हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर किए गए
इजराइल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने दावा किया है कि उसने रातभर दक्षिणी और पूर्वी लेबनान में कई ठिकानों पर हमले किए। सेना के मुताबिक, यह कार्रवाई हिज्बुल्लाह की गतिविधियों और संघर्ष विराम के कथित उल्लंघनों के जवाब में की गई।
आईडीएफ ने बयान में कहा, ‘हिज्बुल्लाह लगातार संघर्ष विराम का उल्लंघन कर रहा है और इजराइली सैनिकों पर आतंकी हमलों की तैयारी और उन्हें अंजाम दे रहा है। इसी के जवाब में सेना ने बेका घाटी में हिज्बुल्लाह के बुनियादी ढांचे से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया।’
इजराइली सेना का कहना है कि सीमा के पास तैनात उसके सैनिकों के लिए हिज्बुल्लाह अब भी खतरा बना हुआ है और इसी वजह से ये सैन्य कार्रवाई जरूरी थी।
समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार, इजराइल ने बताया कि यह अभियान दक्षिणी लेबनान में हुए उस हमले के बाद शुरू किया गया, जिसमें उसके चार सैनिक मारे गए। सेना ने मृतकों में से एक की पहचान लेफ्टिनेंट कर्नल के रूप में बताई है, जबकि बाकी तीन सैनिकों की पहचान बाद में सार्वजनिक किए जाने की बात कही गई है।
ईरान-अमेरिका समझौते के बावजूद संघर्ष
ताजा हिंसा ऐसे समय में हुई है, जब हाल ही में हुए ईरान-अमेरिका समझौते में इजराइल और लेबनान के बीच भी संघर्ष विराम करने का प्रावधान शामिल था।
हालांकि, इजराइल लगातार यह तर्क देता रहा है कि जब तक हिज्बुल्लाह उत्तरी इजराइल पर हमले करने में सक्षम है, तब तक उसके खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखना जरूरी है। इजराइली अधिकारियों का कहना है कि दक्षिणी लेबनान के कुछ हिस्सों में संभावित खतरों से निपटने के लिए उन्हें सैन्य कार्रवाई की स्वतंत्रता चाहिए।
वहीं, लेबनानी प्रशासन का कहना है कि इजराइली हमलों की वजह से दक्षिणी लेबनान में लगातार जनहानि और व्यापक नुकसान हो रहा है। ताजा घटनाक्रम ने वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बहुत मुश्किल से तैयार हुए कूटनीतिक ढांचे की नाजुक स्थिति को भी उजागर कर दिया है।
स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित ईरान-अमेरिका तकनीकी वार्ता स्थगित
इन घटनाक्रमों के बीच स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित तकनीकी स्तर की वार्ता भी टाल दी गई है। यह बैठक ईरान-अमेरिका समझौते के विभिन्न पहलुओं को लागू करने और दीर्घकालिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ने के लिए अहम मानी जा रही थी।
समाचार एजेंसी एएनआई को ईमेल से भेजे गए जवाब में स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘अमेरिका, ईरान, कतर और पाकिस्तान के बीच प्रस्तावित वार्ता फिलहाल स्थगित कर दी गई है। स्विट्जरलैंड इन वार्ताओं को सुगम बनाने के लिए तैयार है। बर्गेनस्टॉक में जरूरी तैयारियां जारी हैं, लेकिन फिलहाल इससे ज्यादा जानकारी साझा नहीं की जा सकती।’
वहीं, व्हाइट हाउस ने भी पुष्टि की कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस फिलहाल स्विट्जरलैंड नहीं जाएंगे, क्योंकि वार्ता की रूपरेखा अभी अंतिम रूप नहीं ले सकी है।
दूसरी ओर ईरान ने भी समझौते के क्रियान्वयन को लेकर सतर्क रुख अपनाते हुए संकेत दिया है कि यदि किसी पक्ष ने शर्तों का उल्लंघन किया तो वह जवाबी कदम उठाएगा।



