पटना: जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर पटना के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से उपचुनाव लड़ सकते हैं। इसे लेकर चर्चा तेज है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर कुछ भी साफ नहीं है लेकिन कुछ संकेत जरूर आए हैं। ऐसी खबरें हैं कि जन सुराज पार्टी की टीम बांकीपुर क्षेत्र में सक्रिय है और सर्वे भी कराए जा रहे हैं। इसके अलावा जन सुराज के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती के एक बयान से भी सरगर्मी तेज है।
बांकीपुर भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन की सीट रही है और वे 2006 से यहां से जीत हासिल करते आ रहे हैं। उनके राज्य सभा जाने की वजह से यह सीट खाली हुई है।
पीके लड़ेंगे चुनाव? जन सुराज के प्रदेश अध्यक्ष ने क्या कहा
जन सुराज के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने एक इंटरव्यू में कहा कि प्रशांत किशोर दो-चार बार बांकीपुर का दौरा कर चुके हैं। उन्होंने कहा, ‘मेरी निजी राय है कि उनको चुनाव लड़ना चाहिए। हालांकि, उनके चुनाव लड़ने पर अंतिम निर्णय पार्टी करेगी।’
इसके अलावा नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार जन सुराज के सीनियर नेताओं में से एक और पूर्व विधायक कमल किशोर ने कहा है कि बांकीपुर उपचुनाव में पार्टी पूरी ताकत झोंकेगी। उन्होंने ये भी कहा है कि सब ठीक रहा तो हो सकता है कि प्रशांत किशोर ही यहां से पार्टी के उम्मीदवार हो सकते हैं, लेकिन आखिरी फैसला बांकीपुर की जनता से मिलने वाले फीडबैक पर निर्भर है।
इन चर्चाओं और बयानों के अलावा 17 मई की शाम बाकरगंज में जन सुराज की बैठक की भी खबरें हैं। इसमें प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती भी मौजूद रहे और लोगों से राय जानी गई। इस दौरान लोगों से ‘प्रत्याशी के रुप में कौन बेहतर और प्रशांत किशोर पर क्या राय है’ जैसे सवाल भी पूछे गए।
प्रशांत किशोर अगर चुनाव लड़ते हैं तो इसके क्या मायने?
पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज पार्टी ने 243 में से 238 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे। हालांकि, पार्टी के खाते में एक भी सीट नहीं आई। जबकि चुनाव से पहले ऐसी संभावना जताई जा रही थी कि जन सुराज अहम फैक्टर साबित होगी। हालांकि नतीजों ने पार्टी की तैयारियों और भविष्य पर भी सवाल खड़े कर दिए।
प्रशांत किशोर तब चुनाव नहीं लड़े थे और इसे लेकर भी पार्टी की और पीके की भी किरकिरी हुई। जबकि ये माना जा रहा था कि प्रशांत किशोर खुद आगे आकर और किसी हॉट सीट पर चुनाव लड़कर पार्टी का नेतृत्व करते नजर आएंगे।
अब हालांकि, अगर पीके चुनाव लड़ते हैं तो ये महज एक संदेश देने की कोशिश हो सकती है कि उनकी पार्टी अभी बिहार में मौजूद है और भागी नहीं है। पार्टी के भविष्य की रणनीति के लिहाज से भी प्रशांत किशोर का चुनावी मैदान में उतरना अहम हो सकता है।
भाजपा के गढ़ में चुनौती देंगे प्रशांत किशोर?
बांकीपुर भाजपा का गढ़ माना जाता है। पिछले 30 सालों से पार्टी यहां से चुनाव नहीं हारी है। नितिन नवीन से पहले उनके पिता नवीन किशोर सिन्हा इस सीट पर जीत हासिल करते आए हैं। यहां से 2020 में शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे लव सिन्हा भी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं, और उन्हें नितिन नवीन से हार का सामना करना पड़ा था।
बहरहाल, प्रशांत किशोर अगर यहां से चुनाव लड़ते हैं और कड़ी टक्कर भी देते हैं तो ये एक बड़ा मैसेज होगा। 2025 में जन सुराज ने यहां से वंदना कुमारी को उम्मीदवार बनाया था और उन्हें महज 4.97 प्रतिशत वोट मिले थे।
हालांकि, खुद पीके मैदान में उतरते हैं तो इसमें कुछ वृद्धि की संभावना जरूर होगी। हालांकि इसमें बहुत बड़ा उछाल होगा या जीत जैसी कोई बात होगी, ये कहना अभी जल्दबाजी है। यह इलाका भाजपा से जुड़ा रहा है। ऐसे में यहां अगर पीके कुछ कमाल करते हैं तो ये चमत्कार ही होगा। ये भी तय है कि भाजपा से जो भी यहां उम्मीवार होगा, वो नितिन नवीन का करीबी होगा।
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