मुंबई: महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के ऑपरेशन सिंदूर पर दिए गए बयान के बाद उठे बड़े विवाद के एक दिन बाद बुधवार को कांग्रेस नेता ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुई घटना की निष्पक्ष जांच और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के विवरण देने की मांग की। चव्हाण ने ऑपरेशन सिंदूर पर अपनी टिप्पणियों के लिए माफी मांगने से भी इनकार किया और कहा, ‘मुझे सवाल पूछने का अधिकार है, मैं माफी क्यों मांगू?’
उन्होंने आगे कहा कि संसद में पेश किए गए न्यूक्लियर प्राइवेटाइजेशन बिल- SHANTI Bill से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए उनके बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। इस बिल को सोमवार को लोकसभा में पेश किया गया था।
दूसरी ओर कांग्रेस नेता के बयानों पर हमला बोलते हुए बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पर लिखा, ‘कांग्रेस नेता, बिना किसी अपवाद के, आखिर पाकिस्तान की भाषा क्यों बोलने लगते हैं?’
वहीं, भाजपा सांसद राजकुमार चाहर ने भी चव्हाण के बयान कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान भारतीय सशस्त्र बलों का अपमान हैं और सेना का मनोबल गिराने का काम करते हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं की हताशा, निराशा और हार की भावना अब साफ झलकने लगी है। स्थिति यह हो गई है कि वे अनजाने में पाकिस्तान के पक्ष में बोलने लगते हैं। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि कांग्रेस नेताओं को सद्बुद्धि दे।
क्या है पृथ्वीराज चव्हाण के बयान से जुड़ा विवाद?
दरअसल, एक बड़े विवाद को जन्म देते हुए महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने मंगलवार को दावा किया कि ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन ही भारत हार गया था और चार दिन तक चले संघर्ष के दौरान भारतीय विमानों को मार गिराया गया था।
पुणे में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए चव्हाण ने कहा, ‘ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन हम पूरी तरह हार गए थे। 7 तारीख को आधे घंटे तक चली हवाई लड़ाई में, हम पूरी तरह हार गए थे, चाहे लोग इसे मानें या न मानें।’
उन्होंने आगे कहा, ‘भारतीय विमानों को मार गिराया गया था। वायु सेना पूरी तरह से जमीन पर थी, और एक भी विमान नहीं उड़ा। अगर ग्वालियर, बठिंडा या सिरसा से कोई विमान उड़ान भरता, तो पाकिस्तान द्वारा उसे मार गिराए जाने की बहुत ज्यादा संभावना थी, इसीलिए वायुसेना पूरी तरह से जमीन पर थी।’
इसके अलावा, चव्हाण ने देश में बड़ी सैन्य ताकतों को बनाए रखने की जरूरत पर सवाल उठाते हुए कहा कि भविष्य में युद्ध हवा में लड़े जाएंगे। उन्होंने कहा, ‘हाल ही में हमने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देखा कि सेना की एक किलोमीटर भी मूवमेंट नहीं हुई। दो या तीन दिनों में जो कुछ भी हुआ, वह सिर्फ हवाई युद्ध और मिसाइल युद्ध था। भविष्य में भी युद्ध इसी तरह लड़े जाएंगे। ऐसी स्थिति में, क्या हमें सच में 12 लाख सैनिकों की सेना बनाए रखने की जरूरत है?’

