भारतीय मूल की 60 वर्षीय बबलीजीत कौर (बबली कौर) को अमेरिका में इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (आईसीई) ने इस महीने की शुरुआत हिरासत में ले लिया। लॉन्ग बीच वॉचडॉग की एक रिपोर्ट के अनुसार, बबली को तब हिरासत में लिया गया जब ग्रीन कार्ड से जुड़े एक इंटरव्यू के लिए आईसीई दफ्तर पहुंची थीं। गौरतलब है कि यह कार्रवाई डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के इमिग्रेशन नियमों को सख्त करने के बीच आई है।
परिवार के मुताबिक, बबली कौर पिछले 30 से अधिक वर्षों से अमेरिका में रह रही हैं। अपने पति के साथ कैलिफोर्निया में वह एक रेस्टोरेंट भी चलाती थीं, जिसे कोविड-19 महामारी के चलते 2020 में बंद करना पड़ा।
लॉन्ग बीच वॉचडॉग की रिपोर्ट के मुताबिक बबली कौर की बेटी जोती कौर ने बताया कि उनकी माँ के लिए ग्रीन कार्ड की याचिका उनकी दूसरी बेटी और दामाद ने दायर की थी, जो दोनों अमेरिकी नागरिक हैं। यह याचिका पहले ही मंजूर हो चुकी थी।
जोती के मुताबिक, 1 दिसंबर को उनकी माँ स्थायी निवास (परमानेंट रेजिडेंसी) के अंतिम इंटरव्यू के लिए आईसीई ऑफिस के फ्रंट डेस्क पर मौजूद थीं। इसी दौरान कई आईसीई एजेंट दफ्तर में दाखिल हुए और उन्हें हिरासत में ले लिया।
परिवार का आरोप है कि हिरासत में लिए जाने के बाद उन्हें बबली कौर से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। जोती कौर के अनुसार, हिरासत के वक्त उनकी मां बेहद डरी हुई थीं।
जोती ने बताया कि उनकी माँ को अन्य हिरासत में लिए गए लोगों के साथ एक वैन में बैठाया गया, जहां उनके हाथ और पैर हथकड़ी और बेड़ियों से जकड़े हुए थे।
कौन हैं बबली कौर
भारत में जन्मी बबलीजीत कौर और उनके पति 1990 के दशक के मध्य में अमेरिका गए थे। शुरुआत में वे कैलिफोर्निया के लगुना बीच में अपना ठिकाना बनाया लेकिन बाद में वे लॉन्ग बीच में रहने लगे।
दो दशकों से ज्यादा समय तक दंपती ने बेलमॉन्ट शोर की सेकंड स्ट्रीट पर नटराज क्यूजीन ऑफ इंडिया एंड नेपाल नाम से रेस्टोरेंट चलाया, जो स्थानीय समुदाय में अच्छी पहचान बना चुका था।
इसके अलावा, बबली कौर ने करीब 25 साल तक बेलमॉन्ट शोर स्थित राइट एड स्टोर में भी काम किया। इस साल की शुरुआत में जब फार्मेसी चेन ने अपने बचे हुए स्टोर बंद किए, तब उनकी नौकरी भी चली गई। हाल ही में वह रॉयल इंडियन करी हाउस में दोबारा रेस्टोरेंट के काम में लौटने की तैयारी कर रही थीं।
माना जा रहा है कि बबली कौर को रातों-रात कैलिफोर्निया के हाई डेजर्ट इलाके में स्थित एडेलांटो डिटेंशन सेंटर भेज दिया गया। यह पहले एक संघीय जेल थी, जिसे अब आईसीई के हिरासत केंद्र के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।फिलहाल परिवार उनकी रिहाई और कानूनी विकल्पों को लेकर वकीलों से संपर्क में है।

