मुंबई: निफ्टी50 और बीएसई सेंसेक्स में कारोबारी हफ्ते के आखिरी दिन शुक्रवार को जबरदस्त तेजी देखी गई। सेंसेक्स करीब 2.30 प्रतिशत यानी 1695.40 अंक उछला और 75,527 पर बंद हुआ। जबकि निफ्टी50 ने 23,500 का स्तर फिर से हासिल कर लिया। निफ्टी 461.30 अंक यानी 1.99 प्रतिशत की मजबूती के साथ 23,622.90 पर बंद हुआ। शेयर बाजार में इस तेजी से बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइज़ेशन 7 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा बढ़ गया, जिससे कुल वैल्यूएशन लगभग 460 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया।
बाजार में हर तरफ खरीदारी दिखी और सेंसेक्स के सभी 30 शेयरों में बढ़त के साथ कारोबार हुआ। टाटा स्टील, इंडिगो, एलएंडटी, एटरनल, एसबीआई और टेक महिंद्रा सबसे ज़्यादा बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहे, जिनमें 3% तक की तेजी आई। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में से प्रत्येक में लगभग 2% की बढ़त हुई। केवल निफ्टी आईटी ही 0.09 प्रतिशत की मामूली गिरावट पर बंद हुआ। आखिर भारती शेयर बाजार में अचानक ये तेजी क्यों दिखी, इसके पीछे की वजहों को समझते हैं।
शेयर बाजार में क्यों दिखी जबर्दस्त तेजी?
अमेरिका-इरान समझौते की संभावना: गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस संकेत के बाद निवेशकों का भरोसा बढ़ा कि वॉशिंगटन और तेहरान इसी हफ्ते के अंत तक शांति समझौते को अंतिम रूप दे सकते हैं। इस घटनाक्रम से वैश्विक शिपिंग के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के फिर से खुलने का रास्ता साफ हो सकता है। एक और घटनाक्रम में, ट्रंप ने ईरान के खिलाफ और ज्यादा सैन्य कार्रवाई की योजना को वापस ले लिया। ट्रंप की ओर से ऐसा संघर्ष खत्म करने की दिशा में हो रही कूटनीतिक कोशिशों में हुई प्रगति का हवाला देते हुए किया गया।
कच्चे तेल के दाम गिरे: ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत और समझौते की उम्मीद बढ़ने से तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है। ये 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गईं। होर्मुज के फिर से खुलने की संभावना बढ़ी है। इससे ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर चिंताएं कम हुई हैं। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स में लगभग 4% की गिरावट आई है और यह 87 डॉलर प्रति बैरल से नीचे ट्रेड करने लगा, जबकि WTI क्रूड फ्यूचर्स 4% से ज्यादा गिरकर लगभग 83 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। गौरतलब है कि हाल कि दिनों में तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के पार भी चली गई थी, जिससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्था में हलचल मची हुई थी।
रुपये में भी मजबूती: शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 60 पैसे मजबूत होकर 95.25 पर पहुंच गया। इसकी वजह कच्चे तेल की कीमतों में कमी और ग्लोबल मार्केट में रिस्क लेने की बढ़ती इच्छा हो सकती है। घरेलू करेंसी पर अक्सर तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर नजर आता है।
एशियाई बाजारों में भी उछाल: भारतीय बाजार पर ग्लोबल इक्विटी के सकारात्मक रुख का भी असर दिखा। निवेशकों ने कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और इस बढ़ते भरोसे पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी कि पश्चिम एशिया में तनाव कम हो सकता है। जापान का Nikkei इंडेक्स लगभग 3% चढ़ा, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) 8% से ज़्यादा उछला। हांगकांग का हैंग सेंग और चीन का शंघाई कंपोजिट, दोनों में लगभग 2% की बढ़त हुई।
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