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कौन हैं भारत के नए IB चीफ महेश दीक्षित? तपन डेका की लेंगे जगह

आईपीएस महेश दीक्षित के पास जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में काम करने का गहरा अनुभव है। वे देश के सबसे अनुभवी इंटेलिजेंस अधिकारियों में गिने जाते हैं।

वरिष्ठ आइपीएस अधिकारी महेश दीक्षित इंटेलिजेंस ब्यूरो के नए प्रमुख होंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। आंध्र प्रदेश कैडर के 1993 बैच के आइपीएस अधिकारी दीक्षित वर्तमान आइबी निदेशक तपन कुमार डेका की जगह लेंगे।

वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी डॉ. महेश दीक्षित को देश की सबसे अहम आंतरिक खुफिया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) का नया डायरेक्टर बनाया गया है. महेश दीक्षित 1993 बैच के आंध्र प्रदेश कैडर के IPS अधिकारी हैं. वे अब तक आईबी में स्पेशल डायरेक्टर के तौर पर अहम जिम्मेदारी संभाल रहे थे. दीक्षित मौजूदा आईबी प्रमुख तपन कुमार डेका की जगह लेंगे. डेका 2022 से आईबी की कमान संभाल रहे थे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दे दी है. कैबिनेट की नियुक्ति समिति द्वारा जारी आदेश में लिखा है कि कैबिनेट की अपॉइंटमेंट कमिटी ने इंटेलिजेंस ब्यूरो के स्पेशल डायरेक्टर, IPS महेश दीक्षित को इंटेलिजेंस ब्यूरो का डायरेक्टर बनाने को मंजूरी दे दी है. यह नियुक्ति आईपीएस तपन कुमार डेका की जगह पर होगी. उनका कार्यकाल पद संभालने की तारीख से दो साल या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, तक रहेगा.

कौन हैं महेश दीक्षित!

डॉ महेश दीक्षित देश के सबसे अनुभवी इंटेलिजेंस अधिकारियों में गिने जाते हैं. उनके करियर के सबसे अहम अध्यायों में से एक अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाने से पहले की तैयारी में उनकी भूमिका थी.

तत्कालीन राज्य के जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठन के बाद, दीक्षित को इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण इंटेलिजेंस जिम्मेदारियां सौंपी गईं. अधिकारियों का मानना ​​है कि उन्होंने राजनीतिक रूप से संवेदनशील दौर में जनता का भरोसा बहाल करने में मदद की और साथ ही आतंकवाद और अलगाववादी तत्वों से पैदा होने वाली सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया.

जम्मू-कश्मीर में अहम इंटेलिजेंस जिम्मेदारियां संभालने के दौरान, श्रीनगर ने 2023 में G20 टूरिज्म वर्किंग ग्रुप की बैठक की सफलतापूर्वक मेजबानी की. इस कार्यक्रम ने काफी अंतरराष्ट्रीय ध्यान और भागीदारी आकर्षित की. शिखर सम्मेलन का सुचारू संचालन क्षेत्र के बेहतर होते सुरक्षा माहौल को दिखाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना गया. इसी दौरान, कई विदेशी राजनयिक प्रतिनिधिमंडलों ने कश्मीर का दौरा किया, जो इस क्षेत्र के साथ बढ़ते अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव को दर्शाता है.

इस मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया कि दीक्षित ने जमीनी हकीकत और बदलती परिस्थितियों का सही आकलन करने में अहम भूमिका निभाई. इससे कूटनीतिक स्तर पर बेहतर तालमेल बनाने और जमीनी हालात में भरोसे को मजबूत करने में मदद मिली.

यह नियुक्ति एक अहम मोड़ पर हुई है, क्योंकि भारत आतंकवाद और कट्टरपंथ से लेकर साइबर खतरों और सीमा पार से गलत सूचना फैलाने वाले अभियानों जैसी सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है. नए IB प्रमुख के तौर पर, दीक्षित से उम्मीद है कि वे आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने और विभिन्न सुरक्षा व इंटेलिजेंस एजेंसियों के बीच तालमेल बेहतर बनाने के मकसद से इंटेलिजेंस ऑपरेशन्स की देखरेख करेंगे.

आईपीएस महेश दीक्षित के पास जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में काम करने का गहरा अनुभव है। उन्होंने श्रीनगर में सब्सिडियरी इंटेलिजेंस ब्यूरो (SIB) के प्रमुख के रूप में आतंकवाद विरोधी अभियानों का नेतृत्व किया था, जिसका अधिकार क्षेत्र पूरे जम्मू, कश्मीर और लेह लद्दाख तक फैला हुआ था। उनके इसी जमीनी और खुफिया ऑपरेशन्स के अनुभव को देखते हुए सरकार ने उन्हें देश की आंतरिक सुरक्षा की सबसे बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।

33 साल के करियर में मिले कई पुरस्कार

1993 के बैच के आईपीएस अधिकारी महेश दीक्षित को अपने 33 साल के पूरे कार्यकाल में कई पदकों से सम्मानित हो चुके हैं। उन्हें 2004 में पुलिस आंतरिक सुरक्षा सेवा पदक और सराहनीय सेवा के लिए 2009 में पुलिस पदक मिला था। इसके अलावा 2016 में विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से नवाजा गया था।

यह भी पढ़ें- अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पहली FIR, 8 लोगों के नाम; ट्रस्टी की शिकायत पर मुकदमा दर्ज

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गिरीन्द्र नाथ झा
गिरीन्द्र नाथ झा ने पत्रकारिता की पढ़ाई वाईएमसीए, दिल्ली से की. उसके पहले वे दिल्ली यूनिवर्सिटी से स्नातक कर चुके थे. आप CSDS के फेलोशिप प्रोग्राम के हिस्सा रह चुके हैं. पत्रकारिता के बाद करीब एक दशक तक विभिन्न टेलीविजन चैनलों और अखबारों में काम किया. पूर्णकालिक लेखन और जड़ों की ओर लौटने की जिद उनको वापस उनके गांव चनका ले आयी. वहां रह कर खेतीबाड़ी के साथ लेखन भी करते हैं. राजकमल प्रकाशन से उनकी लघु प्रेम कथाओं की किताब भी आ चुकी है.
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गिरीन्द्र नाथ झा
गिरीन्द्र नाथ झा ने पत्रकारिता की पढ़ाई वाईएमसीए, दिल्ली से की. उसके पहले वे दिल्ली यूनिवर्सिटी से स्नातक कर चुके थे. आप CSDS के फेलोशिप प्रोग्राम के हिस्सा रह चुके हैं. पत्रकारिता के बाद करीब एक दशक तक विभिन्न टेलीविजन चैनलों और अखबारों में काम किया. पूर्णकालिक लेखन और जड़ों की ओर लौटने की जिद उनको वापस उनके गांव चनका ले आयी. वहां रह कर खेतीबाड़ी के साथ लेखन भी करते हैं. राजकमल प्रकाशन से उनकी लघु प्रेम कथाओं की किताब भी आ चुकी है.
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