Homeभारतझारखंड में परीक्षा धांधली के खिलाफ 'सत्याग्रह', भूख हड़ताल पर बैठे देवेंद्र...

झारखंड में परीक्षा धांधली के खिलाफ ‘सत्याग्रह’, भूख हड़ताल पर बैठे देवेंद्र नाथ महतो कौन हैं?

झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर भर्ती परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा कि जेपीएससी और जेएसएससी के जरिए खुलेआम नौकरियां बेची गईं। उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने, जेपीएससी और जेएसएसी के अध्यक्ष, सचिव तथा परीक्षा नियंत्रक को तत्काल बर्खास्त करने और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी की मांग की है।

रांची: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। इस आंदोलन का नया चेहरा छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो बनकर उभरे हैं। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में हजारों छात्रों के साथ चल रहे आंदोलन के बीच उन्होंने 2 अगस्त की रात से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। इसके बाद सोशल मीडिया और छात्र संगठनों के बीच उन्हें ‘झारखंड का सोनम वांगचुक’ कहा जाने लगा है।

महतो का कहना है कि कई सप्ताह के धरने-प्रदर्शन और सत्याग्रह के बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, इसलिए आमरण अनशन ही आखिरी विकल्प बचा। महतो ने कहा है कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों युवाओं के भविष्य की है।

कौन हैं देवेंद्र नाथ महतो?

देवेंद्र नाथ महतो रांची जिले के एक छोटे से गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने शुरुआती शिक्षा बुंडू में पूरी की और इसके बाद डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची से उच्च शिक्षा हासिल की। वह संस्कृत तथा कुड़माली, जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं में स्नातकोत्तर हैं। इसके अलावा उन्होंने हजारीबाग से बीएड भी किया है।

महतो 2015 से छात्र आंदोलनों से जुड़े हैं और छात्रवृत्ति, पेपर लीक, भर्ती नियमों, आरक्षण नीति और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के मुद्दे लगातार उठाते रहे हैं। वर्ष 2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव में उन्होंने तमार सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में भी चुनाव लड़ा था।

देवेंद्र नाथ महतो की तुलना पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से इसलिए की जा रही है क्योंकि हाल ही में वांगचुक ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक मामले में छात्रों के समर्थन में 26 दिन का आमरण अनशन किया था। उनके आंदोलन को देशभर में व्यापक समर्थन मिला और बाद में केंद्र सरकार ने परीक्षा सुधारों को लेकर लिखित आश्वासन दिया। इसके बाद वांगचुक ने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में अपना अनशन समाप्त किया। झारखंड में भी छात्रों का मानना है कि महतो का आमरण अनशन उनके आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिला सकता है।

क्या है पूरा मामला?

यह आंदोलन झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा है। छात्रों की प्रमुख मांग है कि 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा, जेएसएससी सीजीएल परीक्षा और अन्य भर्ती परीक्षाओं में हुई कथित गड़बड़ियों की सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जांच कराई जाए।

छात्रों का आरोप है कि 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा में ओएमआर शीट से छेड़छाड़, पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुईं। उनका यह भी दावा है कि परीक्षा कराने के लिए टीडीपीएल नामक एजेंसी को जिम्मेदारी दी गई, जिसे पहले अन्य सरकारी संस्थाएं, जैसे एसएसी, ब्लैकलिस्ट कर चुकी थीं। छात्र 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा रद्द कर पारदर्शी तरीके से दोबारा परीक्षा कराने की भी मांग कर रहे हैं।

14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम 5 जुलाई को घोषित होने के बाद कथित गड़बड़ियों के आरोप सामने आए। इसके बाद छात्र सड़कों पर उतर आए। 25 जुलाई से रांची में दिन-रात सत्याग्रह शुरू हुआ और 29 जुलाई से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन धरना जारी है। अब महतो के आमरण अनशन ने आंदोलन को नया मोड़ दे दिया है।

सोमवार को सोशल मीडिया पर महतो ने लिखा, “5 जुलाई से शुरू हुआ संघर्ष और 25 जुलाई से चल रहा दिन-रात का सत्याग्रह अब कठिन दौर में पहुंच गया है। शरीर कमजोर पड़ रहा है, लेकिन छात्रों को न्याय दिलाने का संकल्प पहले से ज्यादा मजबूत है।” उन्होंने समर्थकों से आंदोलन को पूरी तरह शांतिपूर्ण और संवैधानिक बनाए रखने की अपील भी की।

इस आंदोलन को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का भी समर्थन मिला है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बताया कि उन्होंने देवेंद्र नाथ महतो और अन्य छात्र नेताओं से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बातचीत की और उनकी मांगों का समर्थन किया। महतो ने भी बातचीत की पुष्टि करते हुए इसे सकारात्मक बताया।

सिर्फ जेपीएससी नहीं, कई परीक्षाओं पर सवाल

झारखंड के छात्र केवल 14वीं जेपीएससी परीक्षा ही नहीं, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में हुई कई भर्ती और बोर्ड परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों का भी मुद्दा उठा रहे हैं। उनकी प्रमुख शिकायतों में 2024 जेएसएससी सीजीएल पेपर लीक, हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद परीक्षा का दोबारा आयोजन, और मामले की सीआईडी जांच पर अविश्वास शामिल है।

इसके अलावा, इस वर्ष झारखंड उत्पाद सिपाही प्रतियोगिता परीक्षा (जेईसीसीई) में पेपर लीक गिरोह का खुलासा हुआ था। जांच में 159 अभ्यर्थियों और पांच सरगनाओं को गिरफ्तार किया गया था। आरोप था कि अभ्यर्थियों से लीक प्रश्नपत्र रटवाने के लिए 15-15 लाख रुपये तक वसूले गए थे।

वहीं, जेएसी 10वीं बोर्ड परीक्षा 2025 के विज्ञान और हिंदी विषयों के प्रश्नपत्र भी कोडरमा और गिरिडीह समेत कई जिलों में परीक्षा से पहले सोशल मीडिया पर वायरल हो गए थे, जिसके बाद परीक्षाएं रद्द कर दोबारा करानी पड़ी थीं।

ये भी पढ़ेः तमिलनाडु और कर्नाटक में कावेरी नदी को लेकर विवाद क्या है? 1924 में हुए समझौते के 1974 में समाप्त होने के बाद अब तक…

सीआईडी कर रही जांच, कई ठिकानों पर छापेमारी

इसी बीच, झारखंड सीआईडी ने सोमवार मामले में बड़े पैमाने पर कार्रवाई करते हुए रांची, धनबाद, बोकारो, देवघर, गोड्डा, रामगढ़, हजारीबाग और पलामू समेत कई जिलों में 20 से अधिक ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान कोचिंग संस्थानों और उनसे जुड़े लोगों के ठिकानों की भी तलाशी ली गई। जांच एजेंसी ने कई स्थानों से दस्तावेज, कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं, जिनका फोरेंसिक परीक्षण कराया जाएगा।

इससे पहले सीआईडी जेपीएससी कार्यालय और परीक्षा कराने वाली एजेंसी टीडीपीएल के दफ्तर से भी महत्वपूर्ण रिकॉर्ड जब्त कर चुकी है। अब तक इस मामले में आयोग और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच के दायरे को आगे बढ़ाते हुए जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष और राज्य के पूर्व मुख्य सचिव एल. ख्यांगते को भी एक बार फिर पूछताछ के लिए बुलाया गया है। सीआईडी परीक्षा संचालन, प्रश्नपत्र प्रबंधन और मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।

बाबूलाल मरांडी ने क्या आरोप लगाए?

झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर भर्ती परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा कि जेपीएससी और जेएसएससी के जरिए खुलेआम नौकरियां बेची गईं। उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने, जेपीएससी और जेएसएसी के अध्यक्ष, सचिव तथा परीक्षा नियंत्रक को तत्काल बर्खास्त करने और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी की मांग की।

‘एक्स’ पर लिखे पोस्ट में मरांडी ने आरोप लगाया कि दलाल अभ्यर्थियों को नेपाल, बिहार और पश्चिम बंगाल ले जाकर 135 से 150 प्रश्न रटवाते थे, जिनमें से करीब 120 प्रश्न परीक्षा में हूबहू पूछे गए। उन्होंने दावा किया कि परीक्षा केंद्रों पर इंटरनेट सेवा बंद कर कथित धांधली को अंजाम दिया गया, जबकि पैसों के लेन-देन के कारण ही जेएसएससी ने 26 हजार आचार्य नियुक्ति परीक्षा का परिणाम एक साथ जारी करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से घोषित किया।

ये भी पढ़ेंः CJP प्रदर्शन मामलाः SC ने कहा- गंभीर आपराधिक तत्वों को बख्शा नहीं जाएगा, पैलेट गन के इस्तेमाल पर तय होगा प्रोटोकॉल

मरांडी ने यह भी आरोप लगाया कि सीआईडी की शुरुआती जांच सही दिशा में आगे बढ़ रही थी, लेकिन सच्चाई सामने आने से रोकने के लिए जांच टीम बदल दी गई। उन्होंने दावा किया कि मनोज कौशिक को सीआईडी का एडीजी बनाकर जांच को प्रभावित करने की कोशिश की गई, जबकि हजारीबाग के एसपी रहने के दौरान उन पर कोयले के अवैध कारोबार से जुड़े आरोप लगे थे और इस संबंध में लंबित एसीबी जांच को दबा दिया गया। मरांडी ने आरोप लगाया कि सरकार दोषियों को संरक्षण दे रही है और राज्य के लोगों से छात्रों के आंदोलन का तन, मन और धन से समर्थन करने की अपील करते हुए इसे झारखंड के युवाओं और राज्य के भविष्य की लड़ाई बताया।

author avatar
अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
Anil Sharma, Anil Anuj, Anil anuj articles, bole bharat, बोले भारत, अनिल शर्मा, अनिल अनुज,
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular