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पश्चिम बंगालः महान चित्रकार नंदलाल बोस के पोते और पत्नी का नाम SIR से गायब

पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। प्रसिद्ध चित्रकार नंदलाल बोस के पोते और उनकी पत्नी का नाम हट गया है।

कोलकाताः भारतीय संविधान के चित्रकार नंदलाल बोस के पोते और उनकी पत्नी का नाम राज्य में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया से गायब है। राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया शुरू की थी। इसमें कई महत्वपूर्ण लोगों के नाम काटे गए।

स्क्रॉल की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से नंदलाल बोस के पोते सुप्रबुद्ध सेन और उनकी पत्नी का नाम एसआईआर सूची से गायब है।

सुप्रबुद्ध सेन ने क्या बताया?

दैनिक भास्कर इंग्लिश की रिपोर्ट के मुताबिक, सेन और उनकी पत्नी ने दावा किया कि शुरुआत में उनके नाम ‘लंबित’ बताए गए थे। जबकि बाद में उनके नाम सूची से गायब हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, उनके नाम बोलपुर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड नंबर 2 में थे।

ऐसे में राज्य में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सत्तारूढ़ टीएमसी और अन्य राज्यों में पार्टियां इसको लेकर सवाल भी उठा रही हैं।

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अब जब राज्य में 294 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव प्रस्तावित हैं तो यह एक चुनावी मुद्दा भी बना हुआ है। भारतीय संविधान के मूल दस्तावेज में ऐसे चित्र हैं जो भारत की संस्कृति और इतिहास को दर्शाते हैं। इसकी झलक भारतीय लोगों की विविधता में दिखाई देती है।

इसमें मोहनजोदड़ो की मुहरों, वैदिक आश्रम, रामायण, महाभारत, बुद्ध और महावीर के जीवन के दृश्यों, सम्राट अशोक द्वारा बौद्ध धर्म के प्रसार को दर्शाने वाले दृश्यों, गुप्त कला और मुगल वास्तुकला के चित्र शामिल हैं। इसके साथ ही इसमें अकबर, शिवाजी, गुरु गोविंद सिंह, टीपू सुल्तान, रानी लक्ष्मीबाई, महात्मा गांधी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के चित्र भी हैं। ये सभी चित्र सुप्रसिद्ध चित्रकार नंदलाल बोस ने बनाए थे। भारतीय कला क्षेत्र में उनका विशेष योगदान है और उन्हें इसका अग्रदूत माना जाता है।

सवालों के घेरे में SIR प्रक्रिया

राज्य में जारी एसआईआर प्रक्रिया में वोटर लिस्ट की जांच करने के साथ-साथ इसका प्रकाशन और दावों तथा आपत्तियां शामिल हैं। हालांकि, ऐसे ही कई मामले सामने आए हैं जिसको लेकर यह प्रक्रिया सवालों के घेरे में है। गौरतलब है कि राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती दी थी।

इस मामले में सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य में अतिरिक्त न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति की बात की थी। अदालत ने कहा था कि अन्य राज्यों से भी न्यायिक अधिकारियों को लाया जा सकता है।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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