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पश्चिम बंगाल में होल्डिंग सेंटर शुरू, शुभेंदु सरकार का ‘Detention center’ कैसे करेगा काम; कौन तय करेगा नागरिकता?

पिछले ही सप्ताह मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने घोषणा की थी कि राज्य पुलिस द्वारा पकड़े गए घुसपैठियों को लंबी कानूनी प्रक्रियाओं से गुजारने के बजाय सीधे बीएसएफ को सौंप दिया जाएगा।

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बनी भाजपा सरकार ने सोमवार को अपना पहला ‘होल्डिंग सेंटर’ शुरू कर दिया। इस तरह शुभेंदु अधिकारी ने ‘डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट’ नीति को बंगाल में लागू कर दिया है। मालदा राज्य का पहला जिला बन गया है जहां अवैध विदेशी नागरिकों के लिए एक ‘होल्डिंग सेंटर’ स्थापित किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि इसमें अभी 9 संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को रखा गया है।

यह होल्डिंग सेंटर मालदा में इंग्लिश बाजार के चंदन पार्क में तैयार किया गया है। यहां रविवार को गाजोल के पांडुआ इलाके से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच तीन महिलाओं और छह नाबालिगों सहित नौ लोगों को लाया गया। मुर्शिदाबाद में भी एक होल्डिंग सेंटर स्थापित करने की रिपोर्ट सामने आई है, जिनमें तीन बांग्लादेशी रखे गए हैं। पश्चिम बंगाल अब असम के बाद दूसरा भाजपा शासित राज्य भी बन गया है, जहां इस तरह की व्यवस्था की गई है।

अधिकारियों के अनुसार सेंटर में व्यापक सुरक्षा उपाय किए गए हैं। इनमें चौबीसों घंटे सीसीटीवी निगरानी और पुलिस, नागरिक सुरक्षा कर्मियों और सिविल वॉलेंटियरों की तैनाती शामिल है। साथ ही, बंद किए गए लोगों के लिए भोजन और भरण-पोषण की व्यवस्था भी की गई है।

क्या है गाइडलाइन, कब तक रखे जाएंगे?

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह केंद्र कथित अवैध प्रवेश या वैध दस्तावेजों की कमी के आरोप में हिरासत में लिए गए विदेशी नागरिकों को अस्थायी रूप से रखने के लिए बनाया गया है।

अधिकारी ने कहा, ‘होल्डिंग सेंटर ने काम करना शुरू कर दिया है। वर्तमान में, नौ बांग्लादेशी नागरिकों को वहां रखा गया है। आवश्यक सत्यापन और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। हिरासत में लिए गए लोगों के साथ निर्धारित कानूनी मानदंडों के अनुसार व्यवहार किया जा रहा है।’

बंगाल सरकार की ओर से जारी नए आदेश में केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी दिशानिर्देशों का हवाला दिया गया है, जिनमें देश में बिना वैध अनुमति के रहने वाले बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्याओं से निपटने का जिक्र किया गया है। इन नियमों के तहत, ऐसे व्यक्तियों को अधिकतम 30 दिनों तक निर्धारित होल्डिंग में रखा जा सकता है, जब तक कि अधिकारी उनकी पहचान, राष्ट्रीयता और दस्तावेज़ों से संबंधित जांच पूरी नहीं कर लेते।

अधिकारियों ने बताया कि प्रस्तावित व्यवस्था के तहत, बीएसएफ निर्वासन संबंधी औपचारिकताओं के लिए बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश के साथ समन्वय करेगी।

इसमें पकड़े गए लोगों के बायोमेट्रिक डेटा का संग्रह, एक सेंट्र पोर्टल पर जानकारी अपलोड करना और पहचाने गए अवैध प्रवासियों को ट्रांसफर के लिए सीमा अधिकारियों को सौंपना भी शामिल है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिला प्रशासन मौजूदा प्रक्रियाओं के प्रति तैयार रहे।

पिछले ही सप्ताह मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने घोषणा की थी कि राज्य पुलिस द्वारा पकड़े गए घुसपैठियों को लंबी कानूनी प्रक्रियाओं से गुजारने के बजाय सीधे बीएसएफ को सौंप दिया जाएगा।

बांग्लादेश सीमा के कुछ हिस्सों पर बाड़ लगाने के काम के संबंध में बीएसएफ के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में अधिकारी ने कहा था, ‘जो लोग सीएए के दायरे से बाहर हैं, वे घुसपैठिए हैं और उन्हें राज्य पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर बीएसएफ को सौंप दिया जाएगा।’ अधिकारियों ने बताया कि प्रस्तावित व्यवस्था के तहत, बीएसएफ निर्वासन संबंधी औपचारिकताओं के लिए बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश के साथ समन्वय करेगी।

नागरिकता कौन तय करेगा?

अधिकारियों ने बताया कि होल्डिंग सेंटर का ढांचा पिछले साल संसद द्वारा पारित इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट-2025 से जुड़ा है। यह कानून इमिग्रेशन, रजिस्ट्रेसन और विदेशी नागरिकों से संबंधित पहले के कानूनों की जगह आया है। इसने निगरानी, ​​हिरासत और निर्वासन के लिए टेक्नोलॉजी-आधारित प्रणाली लागू की है।

यह कानून हेड कांस्टेबल और उससे ऊपर के रैंक के पुलिस कर्मियों को आव्रजन नियमों का उल्लंघन करने के संदिग्ध व्यक्तियों को बिना वारंट के गिरफ्तार करने का अधिकार देता है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार, संदिग्ध अवैध तरीके से प्रवेश करने वाले को राष्ट्रीयता और दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान 30 दिनों तक ऐसी सुविधाओं (होल्डिंग सेंटर की तरह) में रखा जा सकता है।

नागरिकता निर्धारण पर अंतिम निर्णय जिला मजिस्ट्रेट या समकक्ष अधिकारी लेंगे। इस प्रक्रिया में बायोमेट्रिक डेटा का संग्रह, केंद्रीय डेटाबेस में रिकॉर्ड अपलोड करना और पहचाने गए अवैध प्रवासियों को ट्रांसफर के लिए सीमा सुरक्षा एजेंसियों को सौंपना भी शामिल है।

हालांकि, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से 31 दिसंबर, 2024 से पहले भारत में प्रवेश करने वाले कुछ अल्पसंख्यक समुदायों जैसे हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई, को नागरिकता (संशोधन) अधिनियम से संबंधित केंद्र सरकार के छूट आदेश के तहत ऐसी कार्रवाई से छूट दी गई है।

यह भी पढ़ें- आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल अदालती कार्यवाही में लेंगे हिस्सा, जज स्वर्ण कांता शर्मा के हटने के बाद लिया फैसला

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विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
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