कोलकाताः पश्चिम बंगाल में सोमवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी सरकार का पहला मंत्रिमंडल विस्तार हुआ। कोलकाता स्थित लोकभवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल आरएन रवि ने 35 विधायकों को मंत्री पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस विस्तार के साथ राज्य मंत्रिपरिषद की कुल संख्या बढ़कर 41 हो गई है, जो 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए निर्धारित अधिकतम सीमा 44 से केवल तीन कम है।
शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, भाजपा के वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे। भाजपा नेतृत्व ने इसे राज्य में “नई शुरुआत” और चुनावी वादों को जमीन पर उतारने की दिशा में बड़ा कदम बताया।
13 कैबिनेट मंत्री, 3 स्वतंत्र प्रभार और 19 राज्य मंत्री
मंत्रिमंडल विस्तार में 13 विधायकों को कैबिनेट मंत्री बनाया गया, जबकि तीन नेताओं को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 19 नेताओं को राज्य मंत्री के रूप में शामिल किया गया।
कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ लेने वालों में स्वपन दासगुप्ता, तपस रॉय, अर्जुन सिंह, दीपक बर्मन, गौरी शंकर घोष, डॉ. शंकर घोष, मनोज ओरांव, जगन्नाथ चट्टोपाध्याय, शरद्वत मुखर्जी, दूध कुमार मंडल, कल्याण चक्रवर्ती, अरूप कुमार दास और अजय पोद्दार प्रमुख हैं।
राजेश महतो, इंद्रनील खान और मालती रावा राय को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया है। वहीं जोएल मुर्मू, आनंदमोय बर्मन, अशोक डिंडा, शंतनु प्रमाणिक, पूर्णिमा चक्रवर्ती, उमेश राय, कौशिक चौधरी, गर्गी दास घोष, भास्कर भट्टाचार्य, दिवाकर घरामी, सुमना सरकार समेत 19 विधायकों ने राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली।
पहली बार बंगाल में भाजपा सरकार
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए राज्य की सत्ता पर पहली बार काबिज हुई है। 4 मई को घोषित 293 सीटों के नतीजों में भाजपा को 207 सीटें मिली थीं, जबकि तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों पर सिमट गई थी। बाद में फालता विधानसभा सीट पर हुए पुनर्मतदान में भी भाजपा उम्मीदवार की जीत हुई, जिससे पार्टी की संख्या बढ़कर 208 हो गई।
शुभेंदु अधिकारी ने 9 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उनके साथ दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, निशीथ प्रमाणिक, अशोक कीर्तनिया और क्षुदीराम टुडू ने मंत्री पद की शपथ लेकर सरकार की शुरुआत की थी।
संविधान के 91वें संशोधन के अनुसार किसी राज्य में मंत्रिपरिषद का आकार विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता। पश्चिम बंगाल विधानसभा में 294 सदस्य हैं, इसलिए राज्य में अधिकतम 44 मंत्री बनाए जा सकते हैं।
सोमवार के विस्तार के बाद मंत्रियों की संख्या 41 हो गई है। यानी सरकार के पास अभी भी तीन मंत्री पद खाली हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि भविष्य में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए इन पदों को भरा जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने अपने पास रखे अहम विभाग
सरकार गठन के बाद 11 मई को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विभागों का बंटवारा किया था। सरकारी सूची के अनुसार उन्होंने गृह, वित्त, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, कानून, श्रम, पर्यटन, परिवहन समेत कई अहम विभाग अपने पास रखे हैं।
निशीथ प्रमाणिक को उत्तर बंगाल विकास, खेल एवं युवा कल्याण मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई। दिलीप घोष को ग्रामीण विकास, पशु संसाधन विकास और कृषि विपणन विभाग सौंपे गए। अग्निमित्रा पॉल को महिला एवं बाल विकास, समाज कल्याण और नगर निकाय विभाग मिले, जबकि अशोक कीर्तनिया को खाद्य एवं आपूर्ति तथा सहकारिता विभाग की जिम्मेदारी दी गई। क्षुदीराम टुडू को जनजातीय विकास, पिछड़ा वर्ग कल्याण, अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग सौंपा गया।
‘वादों के लिए प्रतिबद्ध शुभेंदु सरकार‘
मंत्रिमंडल विस्तार से पहले भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने मीडिया से कहा कि नई सरकार अपने चुनावी वादों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने दावा किया कि राज्य की सरकारी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा सेवा शुरू कर दी गई है और अन्नपूर्णा योजना का पूर्ण क्रियान्वयन भी शुरू हो चुका है।
भट्टाचार्य ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” के मंत्र को आधार बनाकर डबल इंजन सरकार राज्य के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने के लिए काम करेगी। उनके अनुसार गरीबों, महिलाओं और जरूरतमंद वर्गों को केंद्र में रखकर सरकार अपनी नीतियों को आगे बढ़ाएगी। कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ लेने के बाद भाजपा विधायक जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने कहा कि पार्टी ने मुझे जो अवसर दिया है, उसके लिए मैं अपना आभार व्यक्त करता हूँ।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए भाजपा ने उत्तर बंगाल, जंगलमहल, सीमावर्ती क्षेत्रों और विभिन्न सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है। इसमें अनुभवी नेताओं के साथ-साथ पहली बार चुने गए विधायकों को भी मौका दिया गया है।
शुभेंदु अधिकारी सरकार का यह पहला बड़ा विस्तार माना जा रहा है, जिसे आगामी प्रशासनिक प्राथमिकताओं और चुनावी वादों को लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में भी देखा जा रहा है।
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