कोलकाता: पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के फाल्टा विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान ने नाम वापस लेने की घोषणा कर दी है। यहां दो दिन बाद ही 21 मई को पुनर्मतदान होना है। खान ने कहा कि उन्होंने दोबारा होने वाले मतदान में हिस्सा नहीं लेने का फैसला इसलिए किया क्योंकि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने फाल्टा के विकास के लिए विशेष पैकेज का वादा किया है।
वहीं, दूसरी ओर सीएम अधिकारी ने जहांगीर के इस फैसले पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि वे ‘भाग गए हैं क्योंकि उन्हें कोई पोलिंग एजेंट नहीं मिल रहा।’ इस बीच, टीएमसी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि फाल्टा निर्वाचन क्षेत्र में उसके 100 से अधिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है, जबकि चुनाव आयोग ‘आंखें मूंदे हुए है।’
टीएमसी की पोस्ट में आगे कहा गया है, ‘जहांगीर खान द्वारा फाल्टा पुनर्निर्वाचन से नाम वापस लेने का निर्णय उनका व्यक्तिगत निर्णय है, न कि पार्टी का। 4 मई को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से अकेले फाल्टा निर्वाचन क्षेत्र में हमारे 100 से अधिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है।’ पार्टी ने कहा, ‘कई पार्टी कार्यालयों में तोड़फोड़ की गई है, उन्हें बंद कर दिया गया है और दिनदहाड़े धमकी देकर जबरन कब्जा कर लिया गया है, जबकि बार-बार शिकायतें मिलने के बावजूद चुनाव आयोग इस पर आंखें मूंद रहा है।’
पोस्ट में आगे कहा गया है, ‘इस तरह के दबाव के बावजूद, हमारे कार्यकर्ता चट्टान की तरह दृढ़ हैं और एजेंसियों और प्रशासन के माध्यम से भाजपा की धमकियों का लगातार विरोध कर रहे हैं। हालांकि, कुछ लोग आखिरकार दबाव के आगे झुक गए और मैदान से हट गए। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं। पश्चिम बंगाल और दिल्ली दोनों जगह बांग्ला विरोधी भाजपा के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी।’
फाल्टा में अब क्यों होना है मतदान?
दरअसल, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को हुए थे। चार मई को नतीजे भी आए और भाजपा की सरकार बनी है। दूसरे चरण के मतदान के दौरान फाल्टा सीट पर भी मतदान हुआ था। हालांकि, चुनाव आयोग ने इस सीट के सभी 285 मतदान केंद्रों पर अनियमितताएं पाईं और वोटिंग को रद्द कर दिया। चुनाव आयोग ने इसके बाद 21 मई को दोबारा मतदान की घोषणा की, जिसके नतीजे 24 मई को आएंगे।
चुनाव आयोग के पर्यवेक्षकों की रिपोर्टों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों से छेड़छाड़, मतदाताओं को डराना-धमकाना और मतदान नियमों का उल्लंघन जैसी गंभीर अनियमितताओं की बात कही गई थी। कई बूथों पर आरोप है कि ईवीएम के बटनों को काले टेप से ढक दिया गया था, जिससे मतदान बाधित हुआ।
यह भी बताया गया कि अनाधिकृत व्यक्ति मतदान केंद्रों में प्रवेश कर दूसरों की ओर से वोट डाल रहे थे। वीडियो फुटेज के गायब होने की भी बातें कही गई। इससे पहले पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने जहांगीर पर सीधा निशाना साधा, जिन्होंने खुद की तुलना फिल्म पुष्पा के किरदार से की थी।
डायमंड हार्बर में एक रैली को संबोधित करते हुए अधिकारी ने कहा, ‘वह पुष्पा- डकैत कहाँ है? वह अब कहीं नजर नहीं आता। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 2021 में 19 लोगों को कुख्यात अपराधी घोषित किया था। जहांगीर उनमें से एक था। उसे मेरे लिए छोड़ दो। मैं उसका हिसाब लूंगा।’
रैली से पहले पुलिस ने जहांगीर के करीबी सहयोगी और तृणमूल के फाल्टा उपाध्यक्ष सैदुल खान को जान से मारने की धमकी देने सहित कई आरोपों में गिरफ्तार भी किया है। बताते चलें कि 2026 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने 207 सीटें जीतकर राज्य में टीएमसी के 15 साल के शासन को खत्म किया है। टीएमसी के खाते में केवल 80 सीटें ही आई।

