तेहरान: पश्चिम एशिया में हालात एक बार फिर तेजी से बिगड़ने लगे हैं। ईरान पर अमेरिका के ताजा हमलों के बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सभी जहाजों के लिए बंद कर दिया गया। आईआजीसी की ओर से चेतावनी दी गई है कि इस जलमार्ग से गुजरने की कोशिश करने वाले किसी भी जहाज को निशाना बनाया जा सकता है। साथ ही ईरान की ओर से कुवैत और बहरीन में कम से कम 18 अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बम बरसाए जाने की भी खबरें हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सभी के लिए बंद: ईरान
अमेरिकी न्यूज चैनल CNN की रिपोर्ट के मुताबिक IRGC ने अपने आधिकारिक टेलीग्राम पोस्ट में कहा, ‘इलाके में असुरक्षा के कारण, होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत प्रभाव से सभी जहाजों – जिनमें तेल टैंकर और कमर्शियल जहाज भी शामिल हैं – के लिए बंद घोषित किया जाता है।’
बयान में आगे कहा गया, ‘जो भी जहाज इस जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश करेगा, उसे निशाना बनाया जाएगा।’ दूसरी ओर अल जजीरा ने ईरानी मीडिया का हवाला देते हुए बताया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी सेना और ईरान की IRGC की नौसेना इकाइयों के बीच भारी झड़प और गोलीबारी की खबरें हैं।
बताया जा रहा है कि अमेरिकी सेना ने अब तक सात तटीय ठिकानों पर हमला किया है, जिनमें बंदर अब्बास, सिरिक, केशम द्वीप और हेंगाम द्वीप और उनके आसपास के इलाके शामिल हैं। IRGC नौसेना ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से ‘गैर-कानूनी’ तरीके से गुजरने की कोशिश कर रहे दो जहाजों पर हमला किया गया है।
अमेरिका-ईरान जंग तेज…ट्रंप की धमकी
बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका की ओर बुधवार देर रात ईरान के कई ठिकानों पर ताजा हवाई हमले की खबरें हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि तेहरान शांति समझौते पर सहमत नहीं होता है तो आगे भी हमले जारी रहेंगे।
फॉक्स न्यूज के पत्रकार ट्रे यिंग्स्ट से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान तत्काल समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करता है तो उसे और भी गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। ट्रंप ने कहा कि हमले जल्द समाप्त हो सकते हैं, लेकिन अगर ईरानी नेतृत्व समझौता नहीं करता तो अमेरिका और कड़ी सैन्य कार्रवाई करेगा।
इस बीच अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड के अनुसार इस ताजा अभियान में ईरान की सैन्य निगरानी क्षमताओं, संचार प्रणालियों और वायु रक्षा ठिकानों को निशाना बनाया गया। हमले तेहरान के समय के अनुसार आधी रात के बाद शुरू हुए और करीब चार घंटे तक चले।
सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि ये कार्रवाई ‘ईरान की लगातार और अनुचित आक्रामक गतिविधियों’ के जवाब में की गई है। बता दें कि अप्रैल की शुरुआत में हुए एक युद्धविराम के बाद संघर्ष कुछ समय के लिए थम गया था, लेकिन ताजा हमलों ने क्षेत्रीय संकट को फिर बढ़ा दिया है।
ईरान की जवाबी कार्रवाई
अमेरिका के हमलों के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने इसकी पुष्टि की है। वहीं, बहरीन के गृह मंत्रालय के अनुसार हमलों के बाद चेतावनी वाले सायरन बजाए गए।
ईरानी सेना की संयुक्त कमान ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को भी चेतावनी दी है। ईरानी मीडिया ने दावा किया कि दो जहाजों पर हमला हुआ है। हालांकि अमेरिका ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि ईरानी धमकियों के बावजूद कमर्शियल जहाजों की आवाजाही जारी है।
वहीं, ईरानी मीडिया ने सिरिक, कारगान, बंदर अब्बास, मिनाब, वरामिन और कराज सहित कई शहरों में विस्फोटों की खबर दी है। इन घटनाक्रमों के बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ का भी बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि इस सैन्य अभियान का उद्देश्य अमेरिका की बातचीत की स्थिति को मजबूत करना है। उन्होंने कहा, ‘हम आज रात उन्हें कड़ा जवाब देंगे और उम्मीद है कि ईरान सही फैसला करेगा। अगर बमों के जरिए बातचीत करनी पड़े तो हम वैसा भी करेंगे।’
गौरतलब है कि युद्धविराम लागू होने के बाद से अमेरिका और ईरान के बीच कई बार हमले और जवाबी हमले हो चुके हैं। हालांकि कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।
इस सप्ताह की शुरुआत में अमेरिकी सेना ने होर्मुज के पास ईरानी वायु रक्षा और रडार ठिकानों को निशाना बनाया था। इसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन, कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इन हमलों से कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।
इस बीच तेहरान ने अमेरिका पर 10 गांवों को पीने का पानी उपलब्ध कराने वाले जलाशयों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने इसे ‘युद्ध अपराध और मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन’ बताया। हालांकि पेंटागन ने इन आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
तनाव के बावजूद बातचीत की कोशिशें जारी हैं। ईरानी मीडिया के मुताबिक, तनाव कम करने और संभावित वार्ता का रास्ता तलाशने के लिए कतर का एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को तेहरान पहुंचा।
एक युद्ध और दुनिया भर में सकट
पिछले कई महीनों से जारी इस संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ रहा है। दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से के तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति इस क्षेत्र से जुड़ी हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के कारण तेल की कीमतों में भी उछाल आया है। ट्रंप की ताजा चेतावनी के बाद कच्चे तेल की कीमतें करीब 3 डॉलर तक बढ़ गईं और एशियाई बाजारों में भी तेजी बनी रही।
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी संरक्षण में 10 करोड़ बैरल तेल लेकर जाने वाले जहाज ईरानी प्रतिबंधों के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। रक्षा मंत्री हेगसेथ ने भी कहा कि अमेरिकी सुरक्षा के कारण जहाज रात के समय इस मार्ग से गुजर रहे हैं और ईरान उन्हें रोक नहीं पा रहा है।
एक अलग कार्रवाई में अमेरिकी सेना ने लगातार दूसरे दिन ओमान की खाड़ी में ईरानी कच्चा तेल ले जा रहे एक टैंकर को निष्क्रिय करने का दावा किया।
उधर, लेबनान में इजराइल और ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह के बीच संघर्ष भी जारी है। लेबनानी सुरक्षा सूत्रों के अनुसार दक्षिणी लेबनान में इजराइली हवाई हमलों में कम से कम 13 लोगों की मौत हुई है, जबकि हिज्बुल्लाह ने इजराइली बलों पर नए हमलों का दावा किया है।
बताते चलें कि ईरान ने किसी भी संभावित समझौते के लिए लेबनान में इजराइली सैन्य कार्रवाई रोकने, प्रतिबंध हटाने, उसकी जब्त हुई संपत्तियों तक पहुंच देने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपने अधिकार को मान्यता देने जैसी शर्तें रखी हैं।
वहीं ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ईरान को होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पर लगाए गए प्रतिबंध हटाने होंगे और परमाणु हथियार विकसित करने की संभावनाओं पर भी रोक स्वीकार करनी होगी। हालांकि ईरान लगातार परमाणु हथियार बनाने के आरोपों से इनकार करता रहा है।
इस बीच संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था के 35 सदस्यीय बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने अमेरिका समर्थित एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें ईरान से अपने समृद्ध यूरेनियम भंडार की पूरी जानकारी देने और निरीक्षकों को उसकी जांच की अनुमति देने की मांग की गई है। ईरान ने इस प्रस्ताव को ‘राजनीतिक’ करार देते हुए खारिज कर दिया है।
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