देहरादूनः उत्तराखंड हाई कोर्ट ने मोहम्मद दीपक नाम से मशहूर जिम संचालक दीपक कुमार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी। कोर्ट ने दीपक कुमार और उनके दोस्त विजय रावत को सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से परहेज करने का भी आदेश दिया है। क्योंकि कोर्ट के मुताबिक इससे मामले की चल रही जांच प्रभावित हो सकती है।
बार एंड बेंच की खबर के मुताबिक, कोर्ट ने राज्य के इस दावे पर कड़ी आपत्ति जताई कि दीपक कुमार जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं और इसके बजाय “सोशल मीडिया पर व्यस्त” हैं।
उत्तराखंड हाई कोर्ट के जस्टिस ने क्या कहा?
जस्टिस राकेश थपलियाल की सिंगल जज बेंच मामले की सुनवाई कर ही है। इस दौरान जस्टिस राकेश ने कहा कि “मामले को सनसनीखेज न बनाएं। मैं आपको सोशल मीडिया पर कोई भी बयान देने से रोकता हूं, क्योंकि आप जांच के दायरे में आरोपी हैं। सोशल मीडिया पर कोई बयान न दें। यह मेरा आपको सख्त निर्देश है।”
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, सुनवाई के दौरान दीपक के वकील ने पूछा कि ऑनलाइन वायरल उनके बयानों में क्या असंवैधानिक था। उन्होंने कहा, “यह कोई अपराध नहीं है।” लेकिन आखिर में अदालत ने अपने आदेश में कहा कि 26 और 31 जनवरी की घटनाएं दुर्भाग्यपूर्ण थीं। अदालत ने आगे कहा,
“ यह अदालत आशा और विश्वास करती है कि जांच एजेंसी निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से जांच करेगी और उसे पूरा करेगी… याचिकाकर्ताओं को जांच में सहयोग करना चाहिए और जांच पूरी होने तक उन्हें घटना से संबंधित संदेश या वीडियो नहीं भेजने चाहिए। यह निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए आवश्यक है। यदि कोई सोशल मीडिया पर संदेश या वीडियो भेजता है तो इससे जांच प्रभावित होगी। ”
पूरा मामला क्या है?
ये पूरा विवाद 26 जनवरी 2026 को शुरू हुआ। गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम के बाद दीपक रोज की तरह अपने दोस्त की दुकान पर बैठे थे। पास ही एक 70 साल के बुजुर्ग मुस्लिम की दुकान है जहां बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ता वहां पहुंचे और उनसे उनकी दुकान के नाम को लेकर सवाल-जवाब करने लगे। आरोप है कि इन लोगों ने जबरदस्ती नाम बदलने का दबाव बनाया। दरअसल दुकान के नाम से “बाबा” शब्द हटाने के लिए परेशान कर रहे थे।
इस पर दीपक कुमार ने दुकानदार के साथ मिलकर कड़ा विरोध जताया। इस दौरान जब दीपक से उनका नाम पूछा गया तो उन्होंने भीड़ को बताया कि उनका नाम ‘मोहम्मद दीपक’ है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ और दीपक कुमार को सराहा गया।
दीपक के जिम के बाहर जमा हुए थे लोग
बाद में 31 जनवरी को बजरंग दल के कई सदस्य विरोध जताने के लिए दीपक के जिम के बाहर इकट्ठा हुए लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक लिया। दीपक ने उन लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, जो उनके जिम के सामने जमा हुए थे। उन्होंने कथित तौर पर गालियां दी थीं और नफरत भरे भाषण दिए थे। इसके बाद पुलिस ने एक दूसरे पुलिस अधिकारी की शिकायत के आधार पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की। दीपक का आरोप है कि वीडियो और आरोपियों की जानकारी होने के बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
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इधर 1 फरवरी को बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ताओं की शिकायत पर पुलिस ने दीपक के खिलाफ शिकायत दर्ज की। इसके बाद दीपक ने उत्तराखंड हाई कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने एफआईआर रद्द करने की मांग की थी। साथ ही अपनी सुरक्षा और पुलिस अधिकारियों के ‘पक्षपातपूर्ण’ रवैये के खिलाफ जांच की मांग की थी। उनकी याचिका पर गुरुवार, 19 मार्च को भी सुनवाई हुई थी। तब कोर्ट ने कहा था कि दीपक याचिका दायर करके पुलिस पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि वे संदिग्ध आरोपी है और एक संदिग्ध आरोपी सुरक्षा की मांग कैसे कर सकता है।

