लखनऊः उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का काम शुक्रवार को पूरा हो गया। इस महासफाई अभियान के बाद राज्य के कुल 15.44 करोड़ मतदाताओं में से करीब 2.89 करोड़ नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए जाएंगे। यह संख्या कुल मतदाताओं का लगभग 18.7 से 19 प्रतिशत है।
गौरतलब है कि यूपी में एसआईआर की समयसीमा दो बार बढ़ाई गई थी, इसके बावजूद इन 2.89 करोड़ मतदाताओं का विवरण एकत्र नहीं किया जा सका। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा के अनुसार, हटाए जाने वाले नामों में सबसे बड़ा हिस्सा उन लोगों का है जो स्थायी रूप से अन्य स्थानों पर चले गए हैं।
किन कारणों से हटेंगे नाम
अस्थायी आंकड़ों के अनुसार, जिन 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से हटेंगे, उनमें लगभग 1.26 से 1.3 करोड़ ऐसे लोग हैं जो पलायन कर चुके हैं। इसके अलावा करीब 45 से 46 लाख मतदाता मृत पाए गए। लगभग 23 से 23.7 लाख ऐसे मतदाता हैं, जिनके नाम दो जगह दर्ज थे और उन्होंने खुद SIR के दौरान दोहरी एंट्री की जानकारी दी।
करीब 83 से 84.5 लाख मतदाता गणना के समय अनुपस्थित पाए गए, जबकि लगभग 9.4 से 9.57 लाख फॉर्म वापस नहीं आए या अन्य श्रेणियों में रखे गए हैं।
लखनऊ में स्थिति ज्यादा गंभीर
राजधानी लखनऊ की बात करें तो यहां लगभग 39 लाख पंजीकृत मतदाता हैं। इनमें से करीब 12 लाख मतदाताओं का विवरण एकत्र नहीं हो सका, जो लगभग 30 प्रतिशत बैठता है। इनमें करीब 5.4 लाख ऐसे मतदाता हैं, जिनकी दोहरी एंट्री थी और उन्होंने अपने मूल निवास स्थान को मतदाता क्षेत्र के रूप में चुना। वहीं, करीब 4.3 लाख मतदाता ऐसे रहे जो ट्रेस नहीं हो सके।
चुनाव आयोग ने 2003 की मतदाता सूची को मौजूदा सूची से जोड़ने का काम भी पूरा कर लिया है। अधिकारियों के अनुसार, 2003 की सूची से जुड़े करीब 91 प्रतिशत मतदाताओं का मिलान हो चुका है। यह मिलान मतदाताओं के नाम, माता-पिता, दादा-दादी या नाना-नानी के नाम के आधार पर किया गया है।
अब केवल 9 प्रतिशत, यानी करीब 1.11 करोड़ मतदाताओं को ही चुनाव आयोग की ओर से नोटिस भेजे जाएंगे। ये नोटिस उनके घरों पर भेजे जाएंगे और संबंधित मतदाताओं को दस्तावेजों के जरिए अपनी पात्रता साबित करनी होगी।
31 दिसंबर को फाइनल ड्राफ्ट आएगा
यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने बताया कि ड्राफ्ट मतदाता सूची 31 दिसंबर 2025 को जारी की जाएगी। इसके बाद 31 दिसंबर 2025 से 30 जनवरी 2026 तक दावे और आपत्तियां दर्ज की जा सकेंगी।
31 दिसंबर 2025 से 21 फरवरी 2026 तक नोटिस चरण के दौरान एन्यूमरेशन फॉर्म पर निर्णय और दावों-आपत्तियों का निपटारा किया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी 2026 को प्रकाशित होगी।
उन्होंने साफ किया कि एसआईआर प्रक्रिया की अंतिम तिथि अब और नहीं बढ़ाई जाएगी। बूथ लेवल अधिकारियों ने 4 नवंबर से घर-घर जाकर फॉर्म वितरण का काम शुरू किया था। पहले इसकी समयसीमा 4 दिसंबर तय थी, जिसे बाद में दो बार बढ़ाकर 26 दिसंबर 2025 किया गया।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक, यह पुनरीक्षण 1 जनवरी 2026 की अर्हता तिथि के आधार पर किया गया है, ताकि आने वाले चुनावों से पहले एक स्वच्छ और सटीक मतदाता सूची तैयार की जा सके। सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि ड्राफ्ट सूची जारी करते समय पूरी सतर्कता बरती जाए और दावे-आपत्तियों के निपटारे में पूर्ण पारदर्शिता रखी जाए।
गौरतलब है कि अन्य राज्यों में हाल ही में हुए SIR के दौरान भी बड़ी संख्या में मतदाता ‘अनट्रेसेबल’ पाए गए थे। मध्य प्रदेश में 43 लाख, छत्तीसगढ़ में 27 लाख और केरल में 24 लाख मतदाता गणना चरण के बाद सूची से बाहर माने गए थे।

