नई दिल्ली: केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने अपने ही मंत्रालय की योजना के तहत करीब 99 लाख रुपये की सब्सिडी लेने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उन्होंने कुछ भी नहीं छिपाया है। उन्होंने कहा कि इस सब्सिडी के लिए आवेदन मंत्री बनने से कई साल पहले साल 2018 में किया गया था।
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार अजमेर से सांसद चौधरी ने कहा कि वह बचपन से खेती करते आ रहे हैं और उनका पूरा प्रोजेक्ट पारदर्शी है। उन्होंने कहा, ‘मैं किसान हूं और बचपन से खेती कर रहा हूं। मैंने कुछ भी नहीं छिपाया है। हजारों किसान पॉलीहाउस लगाते हैं और सरकार की सब्सिडी लेते हैं, मैंने भी वही किया। मैंने इसके लिए 2018 में आवेदन किया था।’
चौधरी ने आगे कहा कि उन्होंने अपने फार्म पर एक बोर्ड भी लगाया है, जिसमें लिए गए सभी ऋण और सब्सिडी का पूरा विवरण दर्ज है। उन्होंने कहा, ‘मैं वहां किसानों को नई कृषि तकनीकों और प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण भी देता हूं। स्थानीय अधिकारी कई बार वहां का निरीक्षण कर चुके हैं। ऐसे में मैंने आखिर क्या छिपाया है?’
क्या है केंद्रीय मंत्री के सब्सिडी लेने का पूरा मामला?
दरअसल, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने अपने ही मंत्रालय की एक योजना के तहत खीरे की खेती के लिए 99.03 लाख रुपये की सब्सिडी प्राप्त की। रिपोर्ट के अनुसार जिस राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (एनएचबी) से योजना और सब्सिडी को मंजूरी मिलती है, उसमें केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री पदेन उपाध्यक्ष होते हैं, जबकि कृषि मंत्री पदेन इसके अध्यक्ष होते हैं।
अखबार के अनुसार बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर इसके पदेन उपाध्यक्ष के तौर पर ‘कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री’ लिखा हुआ है, लेकिन जो ईमेल दिए गए हैं, उसमें एक में भागीरथ चौधरी का नाम है। इसी आधार पर हितों के टकराव के आरोप अब लग रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार भागीरथ चौधरी को सब्सिडी तीन महीने पहले ही मिली। रिपोर्ट के अनुसार देश में किसानों के ऐसे 467 प्रोजेक्ट मंजूर हुए, इनमें चौधरी का भी एक प्रोजेक्ट था। इस खुलासे के बाद विपक्ष हमलावर है।
अशोक गहलोत ने साधा निशाना
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मामले को लेकर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर शनिवार को तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में ‘भ्रष्टाचार और हितों के टकराव का नया मॉडल’ सामने आया है।
गहलोत ने सवाल उठाया कि जब एक केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री अपने ही मंत्रालय की योजना के तहत अपने ही खेत के लिए करीब एक करोड़ रुपये की सब्सिडी मंजूर करा लेते हैं, तो इसे क्या कहा जाएगा?
उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर आम किसान सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटते रहते हैं, जबकि दूसरी ओर मंत्री और प्रभावशाली अधिकारी करोड़ों रुपये के सरकारी लाभ आसानी से हासिल कर ले रहे हैं।
गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ‘ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा’ का नारा देने वाले प्रधानमंत्री इस मामले पर मौन क्यों हैं। उन्होंने कहा कि देश की जनता इस दोहरे मापदंड को देख रही है।
पवन खेड़ा ने भी उठाए सवाल
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी इस मुद्दे पर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘कहते हैं कि दान की शुरुआत घर से होती है, लेकिन भाजपा के लिए सब्सिडी की शुरुआत घर से होती है।’
खेड़ा ने आरोप लगाया कि जहां आम नागरिकों से सरकारी योजनाओं के सहारे गुजारा करने की उम्मीद की जाती है, वहीं मंत्री और उनके करीबी सार्वजनिक धन का निजी लाभ के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंत्रियों और उनके परिवारों के लिए मानो सरकारी खजाना खुला हुआ है, जहां से वे सब्सिडी और अन्य सरकारी लाभ लेकर जनता के धन का मनमाने ढंग से उपयोग कर रहे हैं।
यह भी पढ़ें- महाराष्ट्र TET परीक्षा स्थगित, एग्जाम से पहले पेपर हुआ लीक; अब तक क्या बातें आई सामने

