वॉशिंगटन:अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने अमेरिकी चुनाव प्रणाली में कथित विदेशी हस्तक्षेप और चीन की साइबर गतिविधियों से जुड़े खुफिया एवं कानून प्रवर्तन दस्तावेज सार्वजनिक करने का आदेश दिया है। ट्रंप का दावा है कि इन दस्तावेजों से पता चलता है कि चीन ने करोड़ों अमेरिकी मतदाताओं का डेटा हासिल किया और अमेरिकी चुनावी ढांचे की कमजोरियों का फायदा उठाने की कोशिश की।
इसी बीच अमेरिकी सांसदों और सुरक्षा अधिकारियों ने भी चेतावनी दी है कि चीन अब केवल संघीय संस्थानों ही नहीं, बल्कि राज्यों, विश्वविद्यालयों, निजी कंपनियों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी साइबर हमलों, जासूसी और प्रभाव अभियानों के जरिए निशाना बना रहा है।
देश के नाम प्रसारित एक संबोधन में ट्रंप ने कहा कि वह अमेरिकी चुनावी ढांचे की चौंकाने वाली कमजोरियों को उजागर करने वाले अहम खुफिया रिकॉर्ड तुरंत सार्वजनिक कर रहे हैं। उनके मुताबिक, इन दस्तावेजों की समीक्षा व्हाइट हाउस की गवर्नमेंट ट्रांसपेरेंसी टास्क फोर्स, राष्ट्रपति के इंटेलिजेंस एडवाइजरी बोर्ड और वरिष्ठ खुफिया अधिकारियों ने की है।
चीन ने 22 करोड़ वोटरों का डेटा चुराया!
ट्रंप ने दावा किया कि सार्वजनिक किए गए रिकॉर्ड के पहले समूह से पता चलता है कि चीन ने करीब 22 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं की फाइलें हासिल कर ली थीं। इन रिकॉर्ड में मतदाताओं के नाम, पते, फोन नंबर, राजनीतिक संबद्धता और अन्य व्यक्तिगत जानकारी शामिल थी, जिसका इस्तेमाल चुनाव से जुड़े अभियानों में किया जा सकता था।
व्हाइट हाउस की एक अलग टास्क फोर्स के अनुसार, 20 करोड़ से अधिक वोटर रिकॉर्ड की सुरक्षा में सेंध लगी थी, जबकि कम से कम 18 राज्यों के रिकॉर्ड प्रभावित हुए। सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों में अलास्का, अर्कांसस, कोलोराडो, कनेक्टिकट, फ्लोरिडा, जॉर्जिया, मैरीलैंड, मिशिगन, न्यूयॉर्क, नॉर्थ कैरोलिना और ओहियो सहित 16 क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है।
जारी दस्तावेजों में आरोप लगाया गया है कि चीन ने ट्रंप को राजनीतिक रूप से कमजोर करने, अमेरिकी कारोबारी नेताओं और पत्रकारों को प्रभावित करने तथा नस्लीय, आर्थिक, आव्रजन और राजनीतिक मतभेदों का फायदा उठाने की कोशिश की।
एक खुफिया आकलन के मुताबिक, जनवरी 2022 में एक संदिग्ध चीनी साइबर समूह ने कोलोराडो, कनेक्टिकट, फ्लोरिडा, मिशिगन, ओक्लाहोमा और रोड आइलैंड सहित कई राज्यों के सार्वजनिक वोटर डेटा को व्यावसायिक वेबसाइटों से डाउनलोड किया था। दस्तावेजों में यह भी कहा गया है कि उस समूह ने ओहियो के वोटर रजिस्ट्रेशन सिस्टम तक पहुंचने की कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो सका।
ट्रंप ने खुफिया एजेंसियों पर भी उठाए सवाल
ट्रंप ने आरोप लगाया कि उनके पहले कार्यकाल के दौरान अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने चीन की गतिविधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी उनसे छिपाई। उन्होंने ऑफिस ऑफ द डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस, एफबीआई, सीआईए और जस्टिस डिपार्टमेंट को यह जांचने का निर्देश दिया कि यह जानकारी क्यों रोकी गई। साथ ही उन्होंने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और जरूरत पड़ने पर मुकदमा चलाने की भी मांग की।
उन्होंने मिशिगन में कथित फर्जी वोटर रजिस्ट्रेशन आवेदनों की एफबीआई जांच का भी उल्लेख किया। हालांकि, दस्तावेजों के अनुसार लंबी जांच के बाद अभियोजकों ने किसी पर आरोप तय नहीं किए और एफबीआई ने पर्याप्त संघीय अपराध के सबूत नहीं मिलने पर मामला बंद कर दिया था।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि उनका प्रशासन राज्यों के गवर्नरों और अधिकारियों को उनके चुनावी सिस्टम की कमजोरियों से अवगत कराएगा। उन्होंने कांग्रेस से ऐसा कानून बनाने की अपील की, जिसमें मतदान के लिए फोटो पहचान-पत्र और नागरिकता का प्रमाण अनिवार्य किया जाए तथा मेल-इन बैलेट के इस्तेमाल को सीमित किया जाए।
उधर, होमलैंड सिक्योरिटी विभाग और साइबर सिक्योरिटी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सिक्योरिटी एजेंसी की रिपोर्ट में भी चेतावनी दी गई है कि चोरी हुए वोटर डेटा का इस्तेमाल एब्सेंटी बैलेट मंगाने, मतदाता का पता या मतदान केंद्र बदलने और वोटर रजिस्ट्रेशन में हेरफेर के लिए किया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, सभी 50 राज्यों के वोटर रजिस्ट्रेशन सिस्टम को निशाना बनाया गया था और कम से कम 20 राज्यों में सिस्टम से छेड़छाड़ की पुष्टि हुई है।
संसदीय समिति ने भी चीन के बढ़ते खतरे पर जताई चिंता
इसी बीच अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की हाउस परमानेंट सेलेक्ट कमेटी ऑन इंटेलिजेंस की सुनवाई में सांसदों और राज्य स्तरीय सुरक्षा अधिकारियों ने कहा कि चीन अब केवल संघीय एजेंसियों ही नहीं, बल्कि राज्यों, शहरों, विश्वविद्यालयों, निजी उद्योगों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी जासूसी, साइबर घुसपैठ, प्रभाव अभियानों और आर्थिक दबाव के जरिए निशाना बना रहा है।
समिति के अध्यक्ष रिक क्रॉफर्ड ने कहा कि चीन ने “पूरे समाज को शामिल करने वाली रणनीति” अपनाई है, जिसके तहत कानूनी निवेश, सप्लाई चेन, शोध साझेदारियां, साइबर ऑपरेशन और आर्थिक दबाव के जरिए सैन्य संघर्ष से पहले ही रणनीतिक बढ़त हासिल करने की कोशिश की जाती है। उन्होंने संघीय, राज्य और स्थानीय एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत पर जोर दिया।
समिति के वरिष्ठ डेमोक्रेट सदस्य जिम हाइम्स ने कहा कि काउंटर-इंटेलिजेंस अब केवल संघीय एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं रह गई है। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
नेशनल फ्यूजन सेंटर एसोसिएशन के अध्यक्ष माइक सेना ने बताया कि चीन के अलावा रूस और ईरान जैसी विदेशी खुफिया एजेंसियां भी राज्य सरकारों, विश्वविद्यालयों, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और निजी कंपनियों को लगातार निशाना बना रही हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका के 80 फ्यूजन सेंटरों में 3,200 से अधिक कर्मचारी खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान का काम करते हैं, लेकिन गोपनीय जानकारी के वर्गीकरण, अलग-अलग डेटाबेस और संसाधनों की कमी जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।
अलबामा फ्यूजन सेंटर के निदेशक जे मोस्ले ने कहा कि काउंटर-इंटेलिजेंस अब केवल वॉशिंगटन तक सीमित नहीं है और संदिग्ध गतिविधियों की समय रहते पहचान के लिए स्थानीय, राज्य और संघीय एजेंसियों के बीच भरोसेमंद सहयोग बेहद जरूरी है।
वहीं, फ्लोरिडा के राज्य प्रतिनिधि डैनियल अल्वारेज ने कहा कि होमलैंड सुरक्षा में राज्यों की भूमिका और मजबूत की जानी चाहिए, जबकि नेब्रास्का के राज्य सीनेटर एलियट बोस्टार ने विदेशी विरोधी देशों से जुड़े दूरसंचार उपकरणों पर नियंत्रण और कांग्रेस व राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।

