वॉशिंगटन: ट्रंप प्रशासन ने मंगलवार को अमेरिका की यात्रा और इमिग्रेशन नीति में बड़ा विस्तार करते हुए 20 और देशों तथा फिलीस्तीनी प्राधिकरण के यात्रा दस्तावेजों पर नई पाबंदियों की घोषणा की। इसके साथ ही उन देशों की संख्या दोगुनी हो गई है, जिन पर इस साल की शुरुआत में घोषित व्यापक यात्रा प्रतिबंध लागू किए गए थे। ये नए नियम 1 जनवरी से प्रभावी होंगे।
प्रशासन ने बताया कि पांच नए देशों के नागरिकों पर अमेरिका आने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है, जबकि 15 अन्य देशों के नागरिकों के लिए आंशिक प्रतिबंध लागू होंगे। इसके अलावा, फिलीस्तीनी प्राधिकरण द्वारा जारी किए गए यात्रा दस्तावेज़ों पर अमेरिका में प्रवेश पूरी तरह रोक दिया गया है।
यह फैसला अमेरिका में प्रवेश मानकों को और सख्त करने की नीति का हिस्सा बताया गया है। प्रशासन ने संकेत दिया कि थैंक्सगिविंग वीकेंड पर व्हाइट हाउस के पास दो नेशनल गार्ड जवानों पर गोलीबारी के आरोपी एक अफगान नागरिक की गिरफ्तारी के बाद इन पाबंदियों को और बढ़ाया गया।
हालांकि, जिन लोगों के पास पहले से वैध वीज़ा है, जो अमेरिका के स्थायी निवासी हैं, या जिनकी श्रेणी राजनयिकों, खिलाड़ियों जैसी विशेष वीज़ा कैटेगरी में आती है, उन्हें इन प्रतिबंधों से छूट दी गई है। इसके अलावा, जिनकी अमेरिका में एंट्री को राष्ट्रीय हित में माना जाएगा, वे भी इस दायरे से बाहर होंगे।
किन देशों पर क्या पाबंदी
जून में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 12 देशों के नागरिकों पर पूर्ण प्रतिबंध और सात देशों पर कड़े प्रतिबंधों की घोषणा की थी। उस सूची में अफगानिस्तान, म्यांमार, चाड, कांगो गणराज्य, इक्वेटोरियल गिनी, इरिट्रिया, हैती, ईरान, लीबिया, सोमालिया, सूडान और यमन शामिल थे। वहीं बुरुंडी, क्यूबा, लाओस, सिएरा लियोन, टोगो, तुर्कमेनिस्तान और वेनेजुएला पर आंशिक प्रतिबंध लगाए गए थे।
मंगलवार को जिन नए देशों को पूर्ण प्रतिबंध की सूची में जोड़ा गया है, उनमें बुर्किना फासो, माली, नाइजर, दक्षिण सूडान और सीरिया शामिल हैं। दक्षिण सूडान पहले से ही कड़े प्रतिबंधों का सामना कर रहा था।
आंशिक प्रतिबंधों की नई सूची में अंगोला, एंटीगुआ और बारबुडा, बेनिन, आइवरी कोस्ट, डोमिनिका, गैबॉन, गाम्बिया, मलावी, मॉरिटानिया, नाइजीरिया, सेनेगल, तंज़ानिया, टोंगा, जाम्बिया और जिम्बाब्वे शामिल हैं।
ये पाबंदियां अमेरिका आने वाले पर्यटकों और वहां बसने के इच्छुक दोनों तरह के यात्रियों पर लागू होंगी।
सरकार का क्या कहना है और विरोध किन बातों को लेकर है?
प्रशासन का कहना है कि जिन देशों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं, वहां व्यापक भ्रष्टाचार, अविश्वसनीय या फर्जी नागरिक दस्तावेज़ और आपराधिक रिकॉर्ड की समस्याएं हैं, जिससे यात्रियों की सही जांच मुश्किल हो जाती है। इसके अलावा, वीज़ा अवधि से अधिक समय तक रुकने की दर, निर्वासित नागरिकों को वापस न लेने और राजनीतिक अस्थिरता को भी वजह बताया गया है।
वहीं आलोचकों का आरोप है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर बड़ी संख्या में देशों के लोगों को सामूहिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। इंटरनेशनल रिफ्यूजी असिस्टेंस प्रोजेक्ट की उपाध्यक्ष लॉरी बॉल कूपर ने कहा कि यह फैसला सुरक्षा से ज्यादा लोगों को उनके मूल देश के आधार पर बदनाम करने की कोशिश है।
अफगानिस्तान में अमेरिका के साथ काम कर चुके लोगों के समर्थक संगठनों ने भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि नई नीति में अब विशेष इमिग्रेंट वीजा (SIV) के तहत आने वाले अफगानों के लिए स्पष्ट छूट नहीं दिखती। ‘नो वन लेफ्ट बिहाइंड’ संगठन ने कहा कि अमेरिका की मदद करने वाले और कड़ी जांच से गुजर चुके अफगानों को प्रवेश देना भी देश की सुरक्षा के हित में है।
फिलीस्तीनियों पर सख्ती
फिलीस्तीनी प्राधिकरण के दस्तावेज़ों पर लगाए गए नए प्रतिबंधों के तहत अब ऐसे पासपोर्ट रखने वाले लोग न केवल अमेरिका की यात्रा नहीं कर सकेंगे, बल्कि वहां स्थायी रूप से बसने पर भी रोक होगी। प्रशासन ने इसके पीछे पश्चिमी तट और गाज़ा में सक्रिय आतंकवादी संगठनों और हालिया युद्ध के कारण जांच प्रक्रिया के कमजोर होने का हवाला दिया है।
इस बीच, जिन देशों को नई सूची में शामिल किया गया है, उन्होंने फैसले की समीक्षा शुरू कर दी है। कैरेबियाई देश डोमिनिका और एंटीगुआ-बारबुडा ने इसे गंभीर मामला बताते हुए अमेरिकी अधिकारियों से बातचीत करने की बात कही है।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि जून में घोषित बाकी सभी यात्रा प्रतिबंध पहले की तरह लागू रहेंगे, हालांकि तुर्कमेनिस्तान के मामले में कुछ पाबंदियां ढीली की गई हैं, क्योंकि वहां स्थिति में सुधार का दावा किया गया है।

