साउथ सुपरस्टार थलपति विजय की बहुचर्चित फिल्म ‘जन नायकन’ को लेकर चल रहा सेंसर विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। केवीएन प्रोडक्शंस ने मद्रास हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के उस अंतरिम आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसने फिल्म की रिलीज पर एक तरह से रोक लगा दी थी।
यह फिल्म विजय के करियर की आखिरी फिल्म मानी जा रही है। क्योंकि उन्होंने अपनी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) का गठन कर सक्रिय राजनीति में कदम रख लिया है। फिल्म को पोंगल के मौके पर 9 जनवरी को रिलीज किया जाना था, लेकिन केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) से जुड़े विवाद के चलते रिलीज पर फिलहाल रोक लगी हुई है।
यूए सर्टिफिकेट से शुरू हुआ विवाद
इस पूरे कानूनी विवाद की शुरुआत तब हुई जब केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) के अध्यक्ष ने फिल्म को ‘रिवाइजिंग कमेटी’ के पास भेजने का निर्णय लिया। दरअसल, चेन्नई क्षेत्रीय कार्यालय की ‘एग्जामिनिंग कमेटी’ ने पहले ही फिल्म को कुछ कट्स के साथ यू/ए 16+ सर्टिफिकेट देने पर सहमति जता दी थी।
निर्माताओं का तर्क है कि उन्होंने बोर्ड द्वारा सुझाए गए सभी 27 बदलावों को स्वीकार कर लिया था और संशोधित संस्करण भी जमा कर दिया था। लेकिन 5 जनवरी को अचानक उन्हें सूचित किया गया कि एक सदस्य की शिकायत के आधार पर फिल्म को दोबारा समीक्षा के लिए भेजा जा रहा है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि फिल्म के कुछ दृश्य धार्मिक भावनाओं को आहत करते हैं और सशस्त्र बलों का चित्रण गलत तरीके से किया गया है।
मद्रास हाईकोर्ट की सिंगल बेंच का आदेश
इस फैसले को चुनौती देते हुए निर्माता केवीएन प्रोडक्शंस एलएलपी ने मद्रास हाईकोर्ट का रुख किया। 9 जनवरी को जस्टिस पीटी आशा की सिंगल बेंच ने निर्माता की याचिका स्वीकार करते हुए सीबीएफसी को तुरंत यूए सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि जब एग्जामिनिंग कमेटी की सिफारिश को बोर्ड ने स्वीकार कर लिया था, उसके बाद चेयरपर्सन का अपने स्तर पर फिल्म को रिवाइजिंग कमेटी के पास भेजना कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि एग्जामिनिंग कमेटी के सदस्य द्वारा बाद में शिकायत करना एक खतरनाक परंपरा को जन्म दे सकता है।
हालांकि, उसी दिन सीबीएफसी ने सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ डिवीजन बेंच में तत्काल अपील दायर कर दी। मुख्य न्यायाधीश मणिंदर मोहन श्रीवास्तव और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की पीठ ने सिंगल बेंच के आदेश पर रोक लगा दी और मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी के लिए तय की। डिवीजन बेंच ने यह भी टिप्पणी की कि सिंगल बेंच ने सीबीएफसी को पर्याप्त सुनवाई का अवसर दिए बिना आदेश पारित किया।
सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा मामला
अब इस अंतरिम आदेश को चुनौती देते हुए फिल्म के निर्माता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं। केवीएन प्रोडक्शंस ने विशेष अनुमति याचिका दाखिल कर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के फैसले को चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट में यह दलील दी गई है कि जब सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी थीं, तब केवल एक शिकायत के आधार पर फिल्म की रिलीज रोकना मनमाना है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई की तारीख तय नहीं की है।
डिवीजन बेंच की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने निर्माताओं से यह सवाल भी किया कि सीबीएफसी से अंतिम मंजूरी मिले बिना फिल्म की रिलीज डेट घोषित क्यों की गई। अदालत ने माना कि रिलीज को लेकर जल्दबाजी दिखाकर कोर्ट पर अनावश्यक दबाव बनाया गया।
‘जन नायकन’ का निर्देशन एच. विनोथ ने किया है और इसे केवीएन प्रोडक्शंस ने प्रोड्यूस किया है। फिल्म में थलपति विजय के साथ पूजा हेगड़े और ममिता बैजू अहम भूमिकाओं में हैं। निर्माताओं की योजना इसे चार भाषाओं में 22 देशों में रिलीज करने की थी और एडवांस बुकिंग भी शुरू हो चुकी थी। अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तक फिल्म की रिलीज को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

