Homeभारतएसआईआर के खिलाफ अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके पहुंची सुप्रीम कोर्ट, किन...

एसआईआर के खिलाफ अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके पहुंची सुप्रीम कोर्ट, किन बातों को लेकर है आपत्ति?

टीवीके की दलील है कि यह संशोधन कार्य बिना किसी उचित कारण बताए मतदाता सूची को नए सिरे से तैयार करने जैसा है, जो कानूनी रूप से गलत है।

तमिलनाडु में मतदाता सूची के विशेष संशोधन को लेकर अभिनेता विजय की पार्टी  ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (टीवीके) ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी ने चुनाव आयोग द्वारा 27 अक्टूबर को जारी उस अधिसूचना को रद्द करने की मांग की है, जिसके तहत तमिलनाडु सहित दस राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) की प्रक्रिया शुरू की गई है।

पार्टी की ओर से अधिवक्ता दिक्षिता गोहिल, प्रांजल अग्रवाल, शिखर अग्रवाल और यश एस. विजय ने याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21, 325 और 326 के प्रावधानों का उल्लंघन करती है, साथ ही यह 1950 के प्रतिनिधित्व अधिनियम (आरओपीए) की धारा 21 और 23 के भी विपरीत है।

टीवीके ने क्या कहा है?

एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, टीवीके की दलील है कि यह संशोधन कार्य बिना किसी उचित कारण बताए मतदाता सूची को नए सिरे से तैयार करने जैसा है, जो कानूनी रूप से गलत है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि एसआईआर के तहत मतदाताओं के नाम बिना नोटिस दिए हटाए जा सकते हैं, जिससे मतदाता सूची की निरंतरता भंग होती है। यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों और 1960 के मतदाताओं के पंजीकरण नियम 21ए के भी खिलाफ जाती है।

याचिका में आगे यह भी कहा गया है कि नए नियमों के तहत मतदाताओं से भारी भरकम दस्तावेजों की मांग की जा रही है, जिससे सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। नागरिकता साबित करने का जिम्मा राज्य के बजाय मतदाता पर डाल दिया गया है, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। साथ ही, संशोधन की समयसीमा बहुत कम है और आपत्ति या अपील का पर्याप्त अवसर भी नहीं दिया जा रहा।

एसआईआर के टाइमिंग पर सवाल

टीवीके ने एसआईआर के टाइमिंग पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी ने चिंता जताई है कि यह प्रक्रिया संभावित बाढ़ के समय की जा रही है, जिसमें सरकारी कर्मचारी और बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) राहत कार्यों में व्यस्त हो सकते हैं। उनके पास पिछली संशोधन सूची, आवश्यक फॉर्म और अन्य दस्तावेजों की भी कमी है, जिससे पूरा अभियान जल्दबाज़ी और अव्यवस्थित तरीके से चल रहा है।

याचिका में बताया गया कि जन-जागरूकता बेहद कम है, दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया साफ नहीं है और कई बीएलओ तय दौरे भी पूरा नहीं कर रहे, जिसकी कोई जवाबदेही तय नहीं है।

सबसे ज्यादा दिक्कत प्रवासी मजदूरों, अनाथों और दस्तावेजहीन विवाहित महिलाओं को होगी, जिन्हें अलग-अलग जगह अलग दस्तावेज़ मांगे जा रहे हैं। इसके अलावा ऑनलाइन सिस्टम भी तकनीकी खामियों से जूझ रहा है और उसके लिए शिकायत निवारण तंत्र भी मौजूद नहीं है। टीवीके ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि इस पूरी प्रक्रिया को रद्द किया जाए और मतदाता सूची में संशोधन केवल तय कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही किया जाए।

author avatar
अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
Anil Sharma, Anil Anuj, Anil anuj articles, bole bharat, बोले भारत, अनिल शर्मा, अनिल अनुज,
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular