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सिद्धारमैया जाते-जाते कर गए ‘खेल’, डीके शिवकुमार और राहुल गांधी पर डाल दिया ये बड़ा बोझ

कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से ठीक पहले सिद्धारमैया ने नवंबर 2025 से लंबित जाति जनगणना रिपोर्ट को आधिकारिक तौर पर स्वीकार कर लिया।

बेंगलुरु: सिद्धारमैया ने गुरुवार को बेंगलुरु में कैबिनेट मंत्रियों के साथ नाश्ते पर हुई बैठक के बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा दे दिया। हालांकि, पद छोड़ने के बावजूद सिद्धारमैया यह सुनिश्चित जरूर कर गए कि उनका जाना राजनीतिक रूप से शांति वाला नहीं होगा। दरअसल, वे जाते-जाते एक ऐसा काम कर गए जो उनके उत्तराधिकारी डीके शिवकुमार और राहुल गांधी को भी संभवत: चैन नहीं लेने देगा।

सिद्धारमैया ने दरअसल अपने इस्तीफे से एक दिन पर बुधवार को पिछड़ा वर्ग आयोग की ‘सामाजिक-आर्थिक और शैक्षिक सर्वेक्षण रिपोर्ट (जाति जनगणना)’ को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया। यह देखने में महज एक प्रशासनिक प्रक्रिया जरूर लग रही है लेकिन जानकार मानते हैं कि ये एक अहम राजनीतिक मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है।

कर्नाटक में पहले जाति सर्वेक्षण (जिसे आमतौर पर जाति जनगणना कहा जाता है) की रिपोर्ट 2017 से तैयार थी। यह सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री के रूप में पिछले कार्यकाल के दौरान का था। हालांकि 2023 में सत्ता में लौटने के बाद सिद्धारमैया ने एक नए जाति जनगणना का आदेश दिया, जिसकी रिपोर्ट 2025 में तैयार हुई।

पद छोड़ने से ठीक पहले सिद्धारमैया ने इस रिपोर्ट को स्वीकार किया। इसे सिद्धारमैया के रणनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा सकता है। कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष के. मधुसूदन नायक ने यह रिपोर्ट उन्हें प्रस्तुत की।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना ​​है कि सिद्धारमैया ने ऐसा करके कर्नाटक के पिछड़े वर्ग के मजबूत नेता के रूप में अपनी छवि को और दुरुस्त करने का प्रयास किया। सीएम पद छोड़ते हुए इस समय रिपोर्ट को स्वीकार करके सिद्धारमैया ने यह भी सुनिश्चित कर दिया है कि इसके परिणामों से निपटने का पूरा भार अब डीके शिवकुमार और कांग्रेस नेतृत्व पर रहेगा।

शिवकुमार और राहुल गांधी के लिए ‘टाइम बम!’

सिद्धारमैया के बतौर सीएम रहते जाति जनगणना रिपोर्ट को स्वीकार करने का मतलब है कि नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे डीके शिवकुमार पर इसे लेकर आगे बढ़ने का दबाव बना रहेगा। इस रिपोर्ट को कैबिनेट मीटिंग में रखा जाएगा। मंत्रिपरिषद की मंजूरी होती है तो आरक्षण या नीतिगत बदलाव के लिए भी सरकार को आगे बढ़ना होगा।

हालांकि, अभी ये दूर की कौड़ी है लेकिन डीके शिवकुमार अगर आगे नहीं भी बढ़ते हैं तो भी सवाल पूछे जाते रहेंगे। राहुल गांधी और कांग्रेस पूरे देश में जाति जनगणना और इस आधार पर आरक्षण की बात करती रही है। कर्नाटक में चूकी रिपोर्ट सीएम को सौंपी जा चुकी है तो कांग्रेस के सामने लगातार दबाव बना रहेगा कि वो कोई फैसला ले।

अगर रिपोर्ट लागू होती है तो प्रभावशाली और अगड़े समुदाय का विरोध बढ़ सकता है। अगर रिपोर्ट को टाला जाता है तो पिछड़े वर्ग की नाराजगी भी डीके शिवकुमार और कांग्रेस पार्टी को झेलनी होगी। यह भाजपा के लिए कांग्रेस की सामाजिक न्याय वाली राजनीति पर सवाल उठाने का मौका देगा। कर्नाटक में कुछ भी होता है तो इसका असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है।

कर्नाटक के जाति जनगणना रिपोर्ट में क्या है?

कर्नाटक में हुए इस ताजा सर्वे लगभग 5.9 करोड़ लोगों को शामिल किया गया था और यह अब तक किसी भी भारतीय राज्य द्वारा आयोजित सबसे बड़े जातिगत गणना में से एक है। सर्वे रिपोर्ट के आंकड़े हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन लीक हुई कुछ जानकारियों और पहले के सर्वे के निष्कर्षों के आधार पर यह अनुमान सामने आया है कि कर्नाटक की कुल जनसंख्या में पिछड़े वर्ग और ओबीसी समुदाय लगभग 69.6% हैं।

कई मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मुस्लिम समुदाय लगभग 14% के साथ सबसे बड़ा सामाजिक समूह है, जबकि लिंगायत और वोक्कालिगा जैसे प्रभावशाली समुदायों की जनसंख्या हिस्सेदारी क्रमशः लगभग 11% और 10-12% होने का अनुमान है और यह उनकी पारंपरिक रूप से मानी जाने वाली संख्या से कम है। वैसे दशकों से कर्नाटक की राजनीति लिंगायत और वोक्कालिगा समुदायों के इर्द-गिर्द घूमती रही है।

यहां ये भी गौर करना चाहिए कि सिद्धारमैया की राजनीति जहां AHINDA (अल्पसंख्यकों, पिछड़े वर्गों और दलित) आधारित रही है। वहीं, दूसरी ओर शिवकुमार न केवल कर्नाटक में कांग्रेस के सबसे प्रमुख वोक्कालिगा नेता हैं, बल्कि उन्हें राज्य में पार्टी के संगठनात्मक पुनरुद्धार का चेहरा भी माना जाता है। शिवकुमार यदि रिपोर्ट को पेश करने या लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाते हैं, तो उन्हें प्रभावशाली वोक्कालिगा और लिंगायत समूहों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है।

यह भी पढ़ें- कर्नाटक: सिद्धारमैया ने दिया मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा, डीके शिवकुमार के लिए रास्ता साफ

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विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
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