Stock Market Update: अमेरिका-ईरान युद्ध और तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारतीय शेयर बाजार (Share Market) कारोबारी हफ्ते के पहले ही दिन बड़ी गिरावट के साथ खुला है। सोमवार को निफ्टी50 और बीएसई सेंसेक्स में भारी गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी50 गिरावट के साथ 23,000 अंक के नीचे चला गया, जबकि बीएसई सेंसेक्स 1,800 अंक से अधिक गिरा। समाचार लिखे जाने तक सुबह 10:27 बजे निफ्टी50 असल में 22,556.85 पर कारोबार कर रहा था, जिससे इसमें 558 अंक यानी 2.41% की गिरावट आई। वहीं, बीएसई सेंसेक्स 72,767.73 पर था। इसमें 1,765 अंक या 2.37% की गिरावट आई थी।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव, गिरते रुपये और अन्य वैश्विक चिंताओं के कारण निवेशकों का भरोसा लगातार कम हो रहा है। इकोनॉमिक्स टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार बड़ी बिकवाली के चलते आज बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में लगभग 11 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आई, जिससे कुल मूल्यांकन घटकर 418 लाख करोड़ रुपये रह गया।
Share Market Update: गिरावट के साथ खुला बाजार
बाजार खुलने के साथ ही सुबह से व्यापक बिकवाली का दबाव था। सुबह 10.30 बजे तक सेंसेक्स के सभी 30 सूचकांक नकारात्मक दायरे में कारोबार कर रहे थे। टाटा स्टील, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई), एचडीएफसी बैंक, बजाज फाइनेंस, टाइटन और महिंद्रा एंड महिंद्रा (एमएंडएम) जैसे शेयरों में 2 से 3 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे सेंसेक्स में अधिक नुकसान हुआ।
वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में भी गिरावट देखी गई। निफ्टी मेटल और निफ्टी पीएसयू बैंक सूचकांक सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले सूचकांक रहे, जिनमें से प्रत्येक में शुरुआती कारोबार में 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई।
शेयर बाजार में गिरावट- 5 बड़े कारण
पश्चिम एशिया के हालात: ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच जारी संघर्ष पिछले हफ्ते के अंत में और तेज हो गया। इससे तनाव बढ़ने की आशंका बढ़ गई है। पिछले हफ्ते कूटनीतिक सफलता की शुरुआती उम्मीदों के बावजूद, संघर्ष के चौथे सप्ताह में प्रवेश करने के साथ ही तनाव लगातार बढ़ता ही जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरान को सोमवार तक की समय सीमा दी है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर तेहरान 48 घंटों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से नहीं खोलता है तो अमेरिका अब ईरान के बिजली संयंत्रों पर हमला कर सकता है। जवाब में, ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका अपनी धमकी पर अमल करता है तो वह खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा।
कच्चे तेल के बढ़ते दाम: बिगड़ती भू-राजनीतिक स्थिति के कारण कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं हैं। सोमवार सुबह ब्रेंट क्रूड की कीमत 113 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य का प्रभावी रूप से अवरुद्ध होना इस संकट को और बढ़ा रहा है। यह वैश्विक तेल आपूर्ति के 20 प्रतिशत से अधिक का संचालन करने वाला एक अहम मार्ग है और फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। जहाजों को कुछ समय के लिए गुजरने की अनुमति देने के बाद, ईरान ने एक बार फिर धमकी दी है कि यदि अमेरिका उसके ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर संभावित हमले करता है तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य को अनिश्चित काल के लिए बंद कर देगा, जिससे तेल की कीमतों में और तेजी आई है।
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गिरता रुपया: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, विदेशी निवेश की निरंतर निकासी और अन्य दबावों के कारण भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार गिर रहा है। सोमवार को यह सर्वकालिक निचले स्तर पर खुला। रुपया कमजोर होकर 93.84 प्रति डॉलर पर आ गया है, जो शुक्रवार को दर्ज किए गए अपने पिछले रिकॉर्ड निचले स्तर 93.7350 से भी ज्यादा है। पश्चिम एशिया में संघर्ष की शुरुआत के बाद से रुपया लगभग 3 प्रतिशत तक गिर चुका है।
बढ़ता आउटफ्लो: पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद से विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय शेयरों की लगातार बिक्री कर रहे हैं। शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) ने 5,518.39 करोड़ रुपए की इक्विटी में निकासी की थी। यह लगातार 16वां सत्र था, जब बिक्री जारी रही। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) ने शुक्रवार 5,706.23 करोड़ रुपए का निवेश किया था।
एशियाई बाजारों में भी गिरावट: एशियाई बाजारों में भी बड़ी बिकवाली देखी जा रही है। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक के शेयर बाजार सोमवार को लाल निशान में है। अमेरिकी बाजार भी शुक्रवार के सत्र में लाल निशान में बंद हुए थे। वैश्विक शेयर बाजार का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिख रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता और तेल की ऊंची कीमतों के बीच बाजार जोखिम से बचने के दौर में प्रवेश कर चुके हैं।

