मुंबई: उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) की लोकसभा इकाई में संभावित फूट को लेकर अटकलें तेज हो रही हैं। इस बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने बुधवार (17 जून) को आरोप लगाया कि कुछ सांसदों को पाला बदलने के लिए भारी-भरकम वित्तीय प्रलोभन दिए जा रहे हैं।
शिवसेना यूबीटी के सांसद संजय राउत ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस कॉन्फ्रेंस में उनके साथ पार्टी के अन्य नेता अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे भी मौजूद रहे।
संजय राउत ने क्या दावा किया?
उन्होंने कहा ” मुझे एक अहम व्यक्ति का फोन आया। उन्होंने मुझे बताया कि सांसदों को ₹50 करोड़ देने का वादा किया गया है जिसमें से ₹15 करोड़ एडवांस के तौर पर दिए जाएंगे। महाराष्ट्र में सांसदों को खरीदा जा रहा है। “
खबरों के मुताबिक शिवसेना-UBT के नौ सांसदों में से केवल तीन सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे ही उद्धव ठाकरे का समर्थन कर रहे हैं।
शिवसेना (UBT) संसदीय दल के नेता अरविंद सावंत ने पार्टी के सभी नौ सांसदों को गुरुवार (18 जून) को होने वाली बैठक में शामिल होने का निर्देश देते हुए व्हिप जारी किया है।
यह भी पढ़ें – अमेरिका-ईरान शांति समझौता: आखिर क्या है 300 अरब डॉलर की डील और क्यों उठ रहे हैं सवाल?
संजय राउत ने कहा कि “सेना (UBT) संसदीय दल के प्रमुख अरविंद सावंत ने व्हिप जारी कर पार्टी के सभी नौ सांसदों से कल सुबह 11 बजे पार्टी की बैठक में शामिल होने को कहा है। जो लोग पार्टी के चुनाव चिह्न पर चुने गए हैं, उन्हें पार्टी के साथ धोखा करने का कोई अधिकार नहीं है।”
संजय राउत ने कहा कि “सांसदों को पार्टी से गद्दारी करने का कोई हक नहीं है। इस बार जनता इसे बर्दाश्त नहीं करेगी। इसका रिएक्शन होगा।”
ऑपरेशन टाइगर के तहत यूबीटी के सांसदों को शिवसेना में शामिल कराने की कोशिश
गौरतलब है कि ‘ऑपरेशन टाइगर’ के तहत शिवसेना (UBT) के चुने हुए प्रतिनिधियों को अपनी पार्टी में शामिल करने की शिवसेना की कोशिशें मंगलवार (16 जून) शाम को तेज हो गईं। यह घटनाक्रम ठाकरे द्वारा मुंबई में अपने घर पर बुलाई गई बैठक में शिवसेना (UBT) के नौ में से सिर्फ चार सांसदों के शामिल होने के दो दिन बाद हुआ।
शिंदे गुट के नेताओं का दावा है कि शिवसेना (UBT) के छह सांसद एक अलग गुट बना सकते हैं और शिवसेना की संसदीय इकाई में विलय से पहले लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र सौंप सकते हैं।
बताते चलें कि अलग गुट बनाने की संभावना वाले छह सांसद ये हैं – संजय जाधव (परभणी), भाऊसाहेब वाकचौरे (शिर्डी), संजय देशमुख (यवतमाल), नागेश पाटिल अष्टिकर (हिंगोली), ओमराजे निंबालकर (धाराशिव), संजय पाटिल (मुंबई उत्तर-पूर्व)। इस बात की हालांकि स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
हिंदुस्तान टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से लिखा कि निंबालकर और पाटिल सेना नेताओं के संपर्क में थे जबकि संजय जाधव, संजय देशमुख और भाऊसाहेब वाकचौरे मंगलवार को नई दिल्ली पहुंच गए थे और पार्टी नेताओं के फोन का जवाब नहीं दे रहे थे।
अगर सेना (UBT) के नौ में से छह सांसद अलग होने का फैसला करते हैं तो वे संसदीय दल का दो-तिहाई हिस्सा बन जाएंगे जिससे वे दलबदल विरोधी कानून (एंटी डिफेक्शन लॉ) के तहत अयोग्य घोषित होने से बच सकते हैं।
इस स्थिति के चलते शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेताओं जिनमें राज्यसभा सांसद संजय राउत और लोकसभा ग्रुप लीडर अरविंद सावंत शामिल हैं को तुरंत नई दिल्ली जाना पड़ा। राउत ने आरोपों की श्रृंख्ला को आगे बढ़ाते हुए लिखा कि ” चौंकाने वाली जानकारी मिली है कि महाराष्ट्र में सांसदों को आज रात एडवांस के तौर पर ₹15 करोड़ दिए जा रहे हैं। अपना सपना मनी-मनी। “
शिवसेना-यूबीटी में हो सकती है और भी बड़ी टूट
ऐसे में शिवसेना यूबीटी में इस घटनाक्रम के बाद एक बड़े राजनीतिक बदलाव की संभावना भी सामने आई है। शिवसेना के एक मंत्री ने दावा किया कि शिवसेना (UBT) के कुछ विधायकों के साथ भी बातचीत चल रही है।
मंत्री ने कहा, “यह बंटवारा सिर्फ लोकसभा सांसदों तक ही सीमित नहीं रह सकता। शिवसेना (UBT) के 20 में से कुछ विधायक भी हमारे संपर्क में हैं। हमारा लक्ष्य 16-17 विधायक हैं। यह एक बड़ा बंटवारा हो सकता है।”
अगर यह कोशिश कामयाब होती है तो यह उद्धव ठाकरे के लिए एक और बड़ा झटका होगा। इससे पहले 2022 में एकनाथ शिंदे की अगुवाई में हुई फूट के कारण महाराष्ट्र में महा विकास अघाड़ी सरकार गिर गई थी।

