Friday, March 20, 2026
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सुखविंदर ने किया था ‘जय हो’ गाने को कंपोज?, रहमान विवाद के बीच पुराने दावे पर राम गोपाल वर्मा ने अब क्या कहा है?

राम गोपाल वर्मा ने एक इंटरव्यू में कहा था कि सुभाष घई के सामने सुखविंदर सिंह ने एक धुन सुनाई थी, जिसे रहमान ने पसंद किया था। राम गोपाल ने दावा किया था कि बाद में वही धुन ‘जय हो’ बनी।

मशहूर संगीतकार एआर रहमान के ‘कम्युनल’ बयान को लेकर चल रहे विवाद के बीच फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा ने अपने एक पुराने बयान पर सफाई दी है। यह वही बयान है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि ऑस्कर विजेता गीत ‘जय हो’ को एआर रहमान ने नहीं, बल्कि गायक सुखविंदर सिंह ने कंपोज किया था।

राम गोपाल वर्मा का एक पुराना इंटरव्यू हाल ही में सोशल मीडिया पर दोबारा वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि फिल्म ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ का चर्चित गीत ‘जय हो’ सुखविंदर सिंह ने कंपोज किया था। इस क्लिप के सामने आने के बाद रहमान के हालिया बयान से जुड़ा विवाद और तेज हो गया।

मामला बढ़ने पर राम गोपाल वर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सफाई जारी की। उन्होंने कहा कि उनके बयान को संदर्भ से अलग करके समझा गया है। फिल्ममेकर ने साफ किया कि उनकी नजर में एआर रहमान दुनिया के सबसे महान संगीतकारों में से एक हैं और एक बेहतरीन इंसान भी। उन्होंने यह भी कहा कि रहमान ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जो कभी किसी और का श्रेय खुद लेना चाहें। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी सफाई के बाद इस मुद्दे से जुड़ी नकारात्मकता खत्म होगी।

राम गोपाल ने अपने इंटरव्यू में एक किस्सा सुनाया था, जो सुभाष घई की फिल्म ‘युवराज’ के दौरान का बताया गया। इसमें उन्होंने कहा कि देरी को लेकर नाराज सुभाष घई के सामने सुखविंदर सिंह ने एक धुन सुनाई थी, जिसे रहमान ने पसंद किया था। राम गोपाल ने दावा किया था कि बाद में वही धुन ‘जय हो’ बनी। हालांकि, इस दावे को खुद सुखविंदर सिंह ने खारिज कर दिया था। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि उन्होंने सिर्फ गीत गाया है, कंपोज नहीं किया। राम गोपाल वर्मा को शायद पूरी जानकारी नहीं रही होगी।

एआर रहमान के किस बयान पर विवाद?

एआर रहमान ने बीबीसी को दिए इंटरव्यू में कहा था कि ”मुझे बॉलीवुड में अब कम काम मिलने लगे हैं। कभी-कभी रचनात्मक निर्णय लेने की ताकत उन लोगों के हाथ में होती है जिनमें असल में क्रिएटिविटी नहीं होती। यह कभी-कभी साम्प्रदायिक कारणों से भी हो सकता है, लेकिन यह सीधे तौर पर पता नहीं चलता। यह केवल अफवाहों के रूप में पता चलता है कि मुझे किसी प्रोजेक्ट में चुना गया था, लेकिन फिर कंपनी ने अपने पांच अन्य कंपोजर्स को हायर कर लिया।”

भजन गायक अनूप जलोटा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अगर रहमान को लगता है कि मुसलमान होने की वजह से उन्हें काम नहीं मिल रहा, तो वे फिर से हिंदू धर्म अपना कर देख सकते हैं।

अनूप जलोटा ने रहमान की पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए बताया कि एआर रहमान पहले हिंदू थे और बाद में उन्होंने इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया। इसके बाद भी उन्होंने संगीत जगत में खूब काम किया, नाम कमाया और लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाई। लेकिन अगर रहमान को अब ऐसा विश्वास है कि उनके धर्म की वजह से अवसर कम हो रहे हैं, तो उन्हें अपना पुराना धर्म अपनाने के बारे में सोचना चाहिए। जलोटा की इस टिप्पणी को लेकर भी सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई।

मशहूर गीतकार जावेद अख्तर ने रहमान के दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए एक अलग बात कही थी। मुंबई में आईएएनएस से बात करते हुए उन्होंने कहा था कि रहमान इतनी महान शख्सियत हैं कि छोटे निर्माता उनके पास जाने में झिझक महसूस करते हैं। लोगों को लगता होगा कि वे इंटरनेशनल प्रोजेक्ट्स और शो में ज्यादा व्यस्त हैं, इसलिए शायद बॉलीवुड के लिए समय न निकाल पाएं।” जावेद अख्तर ने स्पष्ट किया कि उन्हें व्यक्तिगत तौर पर कभी ऐसा भेदभाव महसूस नहीं हुआ और वे नहीं मानते कि फिल्म इंडस्ट्री में ऐसा कोई ‘सांप्रदायिक एलिमेंट’ मौजूद है।

कंगना रनौत ने कड़ी नाराजगी जाहिर की थी

अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत ने रहमान के बयान पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए लिखा, “डियर एआर रहमान, फिल्म उद्योग में मुझे दक्षिणपंथी विचारधारा का समर्थन करने के कारण पक्षपात झेलना पड़ता है, लेकिन मैंने आपसे अधिक पूर्वाग्रही और नफरती व्यक्ति नहीं देखा।” कंगना ने दावा किया कि उन्होंने अपनी फिल्म ‘इमरजेंसी’ के लिए रहमान से संपर्क किया था, लेकिन उन्होंने कहानी सुनने तक से इनकार कर दिया क्योंकि वे किसी ‘प्रोपेगेंडा फिल्म’ का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे। कंगना ने तंज कसते हुए कहा कि रहमान अपनी नफरत में अंधे हो गए हैं।

तस्लीमा नसरीन ने कहा था- मशहूर लोगों का धर्म नहीं होता

बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने भी इस विवाद में अपनी बात रखी। उन्होंने एक्स पर लिखा था कि शाहरुख, सलमान, आमिर और खुद रहमान भारत के सबसे सफल और अमीर लोगों में से हैं और मशहूर लोगों को कभी धर्म की वजह से मुश्किल नहीं होती। उन्होंने कहा, “असली दिक्कतें मेरे जैसे लोगों को होती हैं जिन्हें नास्तिक होने के बावजूद प्रताड़ित किया जाता है। रहमान को सभी धर्मों के लोग प्यार करते हैं, ऐसी बातें उन्हें शोभा नहीं देतीं।”

सिंगर शान ने कहा कि काम मिलना या न मिलना व्यक्तिगत हो सकता है। उन्हें भी कुछ समय काम नहीं मिला, लेकिन उन्होंने इसे कभी निजी तौर पर या साम्प्रदायिक चश्मे से नहीं देखा। वहीं, गायिका महालक्ष्मी अय्यर ने कहा कि वह ऐसा नहीं मानतीं। उनके अनुसार, नई प्रतिभाओं और नए म्यूजिक डायरेक्टर्स के आने की वजह से पुराने कलाकारों के पास काम की हिस्सेदारी बदली है, जो कि एक स्वाभाविक बदलाव है।

विवाद बढ़ने पर एआर रहमान ने दी थी सफाई

विवाद ज्यादा बढ़ने के बाद एआर रहमान ने खुद वीडियो जारी कर सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनके शब्दों को गलत तरीके से समझा गया और उनका किसी भी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था।

रहमान ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा कर कहा कि उनके लिए संगीत हमेशा लोगों और संस्कृतियों से जुड़ने, उन्हें सम्मान देने और उनके उत्सव का माध्यम रहा है। भारत को लेकर उन्होंने कहा कि यह सिर्फ उनका घर नहीं, बल्कि उनकी प्रेरणा और गुरु भी है, और उनका कभी भी किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं रहा।

रहमान ने वीडियो में यह भी कहा कि उन्हें अपने भारतीय होने पर गर्व है और भारत ने ही उन्हें वह मंच दिया, जहां वे पूरी रचनात्मक स्वतंत्रता के साथ काम कर सके। उनके मुताबिक, यही आज़ादी उन्हें अलग-अलग संस्कृतियों की आवाज़ों को सम्मान देने और संगीत के जरिए लोगों को जोड़ने का अवसर देती है। उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा उन्हें प्रेरित किया और उनके काम को एक गहरा अर्थ दिया।

अपने करियर की कुछ अहम परियोजनाओं का ज़िक्र करते हुए रहमान ने बताया कि उन्होंने जला प्रोजेक्ट में काम किया, नागा संगीतकारों के साथ मिलकर एक स्ट्रिंग ऑर्केस्ट्रा तैयार किया, सनशाइन ऑर्केस्ट्रा को मेंटर किया और भारत के पहले मल्टीकल्चरल वर्चुअल बैंड ‘सीक्रेट माउंटेन’ की स्थापना की। इसके अलावा उन्होंने रामायण के संगीत में हांस जिमर के साथ अपने सहयोग को भी याद किया, जिसे उन्होंने अपने रचनात्मक सफर का अहम पड़ाव बताया।

वीडियो के अंत में एआर रहमान ने भारत के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उनका संगीत हमेशा अतीत का सम्मान करेगा, वर्तमान का उत्सव मनाएगा और भविष्य को प्रेरित करने की कोशिश करेगा। उनके शब्दों में, संगीत का मकसद कभी किसी को चोट पहुंचाना नहीं, बल्कि लोगों को जोड़ना और सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देना रहा है।

रहमान के बेटे ने क्या कहा?

इसी माहौल में रहमान के बेटे अमीन ने सार्वजनिक रूप से अपने पिता का समर्थन किया है। अमीन ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें एआर रहमान और एड शीरन नजर आ रहे हैं। इसके साथ उन्होंने लिखा कि उनके पिता का संगीत और योगदान सिर्फ आज के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों तक याद रखा जाएगा। एक दूसरी स्टोरी में आयरन मैन का डायलॉग शेयर कर अमीन ने इशारों में कहा कि आलोचना या गलतफहमियां रहमान की पहचान और उनके काम को कम नहीं कर सकतीं।

अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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