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‘पेंगुइन या पूर्व सेना प्रमुख में से एक झूठ बोल रहा है’, नरवणे की किताब को लेकर प्रकाशक के बयान पर राहुल गांधी

किताब के कथित लीक को लेकर दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। पुलिस के अनुसार, मामले की जांच स्पेशल सेल को सौंपी गई है, जो यह पता लगा रही है कि अप्रकाशित पांडुलिपि या उसके अंश किस तरह सार्वजनिक हुए। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि जांच जारी है।

नई दिल्लीः पूर्व सेना प्रमुख जनरल जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (MM Naravane) के अप्रकाशित संस्मरण ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ (Four Stars of Destiny) को लेकर संसद से सड़क तक राजनीतिक संग्राम छिड़ा हुआ है। दिल्ली पुलिस के मामले में दर्ज एफआईआर और पेंगुइन के बयान के बाद विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

राहुल गांधी ने मीडिया से बात करते हुए सरकार और प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया पर गंभीर आरोप लगाए। राहुल गांधी ने दावा किया कि किताब से जुड़ी जानकारियां पहले ही सार्वजनिक डोमेन में हैं और भाजपा ‘असुविधाजनक सच्चाई’ को सामने आने से रोकने के लिए इसे दबाने की कोशिश कर रही है।

लोकसभा की कार्यवाही स्थगित होने के बाद मीडिया से बातचीत में राहुल गांधी ने दावा किया कि यह पुस्तक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अमेजन पर उपलब्ध है, जबकि पेंगुइन इस बात से इनकार कर रहा है। उन्होंने पत्रकारों को जनरल नरवणे की 2023 की एक एक्स पोस्ट भी दिखाई, जिसमें पूर्व सेना प्रमुख ने लोगों से 2020 की गलवान झड़प से जुड़े घटनाक्रम पर आधारित अपने संस्मरण पढ़ने की अपील की थी।

राहुल ने पूर्व सेना प्रमुख का 2023 का एक पुराना सोशल मीडिया पोस्ट भी दिखाया, जिसमें उन्होंने लोगों से अपने संस्मरण पढ़ने का आग्रह किया था।

राहुल ने तंज कसते हुए कहा, “या तो पेंगुइन झूठ बोल रहा है या फिर पूर्व सेना प्रमुख; दोनों एक साथ सही नहीं हो सकते। मैं जनरल नरवणे पर विश्वास करता हूँ, पेंगुइन पर नहीं।” उन्होंने इस बात पर भी कड़ा विरोध जताया कि विपक्ष के नेता होने के नाते उन्हें सदन में राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर बोलने से रोका गया, जिसे उन्होंने लोकतंत्र पर ‘कलंक’ बताया।

मुद्दो को लेकर लोकसभा में लगातार हंगामा

पिछले एक हफ्ते से अधिक समय से इस किताब को लेकर लोकसभा में बार-बार व्यवधान हो रहा है। विपक्ष नरवणे के कथित ‘खुलासों’ पर चर्चा की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि अप्रकाशित पुस्तक का हवाला देना नियमों के खिलाफ है। सोमवार को राहुल गांधी द्वारा संसद परिसर में किताब की एक प्रति लहराने के बाद विवाद और गहरा गया, जिससे सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।

विपक्ष का आरोप है कि किताब में गलवान घाटी में 2020 के भारत-चीन सैन्य गतिरोध से जुड़े ऐसे तथ्य हैं, जो सरकार को असहज कर सकते हैं। इसी वजह से, विपक्ष के नेताओं का कहना है कि उन्हें सदन में इस मुद्दे को उठाने से रोका जा रहा है।

एफआईआर और पेंगुइन का बयान

किताब के कथित लीक को लेकर दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। पुलिस के अनुसार, मामले की जांच स्पेशल सेल को सौंपी गई है, जो यह पता लगा रही है कि अप्रकाशित पांडुलिपि या उसके अंश किस तरह सार्वजनिक हुए। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि जांच जारी है।

इस बीच प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने भी विवाद पर एक लंबा आधिकारिक बयान एक्स पर जारी किया। प्रकाशन संस्थान ने स्पष्ट किया है कि ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ के प्रकाशन के विशेष अधिकार उसके पास हैं और पुस्तक अब तक किसी भी रूप में प्रकाशित नहीं हुई है।

पेंगुइन ने कहा, “हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि यह पुस्तक न तो मुद्रित रूप में और न ही डिजिटल रूप में प्रकाशित, वितरित, बेची या किसी भी तरह से जनता के लिए उपलब्ध कराई गई है।” प्रकाशक ने यह भी चेतावनी दी कि यदि पुस्तक की कोई भी प्रति, आंशिक या पूर्ण, किसी भी प्रारूप में प्रसारित हो रही है, तो वह कॉपीराइट उल्लंघन की श्रेणी में आएगी और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

लोकसभा में कार्रवाई और विरोध

यह मामला संसद में इस कदर भड़क उठा कि मंगलवार को राहुल गांधी को लगातार दूसरे दिन अप्रकाशित संस्मरण का हवाला देने से रोके जाने के बाद विरोध हुआ। इसके बाद ‘अनुशासनहीन व्यवहार’ के आरोप में आठ सांसदों को बजट सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया। इनमें सात कांग्रेस और एक सीपीआई(एम) के सांसद शामिल हैं।

राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर कड़ा विरोध दर्ज कराया और इसे “लोकतंत्र पर धब्बा” करार दिया। उन्होंने यह भी कहा कि यह पहली बार है जब किसी नेता प्रतिपक्ष को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलने से रोका गया।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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