Homeवीडियोविभाजन के बाद की सांप्रदायिकता को दर्शाती 'ओस की बूंद'

विभाजन के बाद की सांप्रदायिकता को दर्शाती ‘ओस की बूंद’

राही मासूम रजा का उपन्यास ‘ओस की बूंद’ पाकिस्तान बनने के बाद लोगों को परेशानियों को बेहद करीब से दिखाता है।

राही मासूम रजा का नाम साहित्य की दुनिया में विशेष स्थान है। उनका दायरा सिर्फ किताब लेखन तक सीमित नहीं रहा बल्कि बॉलीवुड की दुनिया में भी खूब नाम कमाया। उन्होंने बी आर चोपड़ा द्वारा निर्देशित महाभारत जो भारत के घर-घर तक पहुंचा के डॉयलाग्स लिखे। उनकी किताब ‘ओस की बूंद’ विभाजन के बाद की सांप्रदायिक स्थिति को दर्शाती है।

इस किताब पर बोले भारत के किताबों पर आधारित कार्यक्रम ‘ये किताब क्या कहती है?’ के एपिसोड में बात की है।

author avatar
अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
amrendra
अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular