संगरूर: पंजाब रोडवेज और पीआरटीसी (पेप्सू रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन) के संविदा कर्मचारियों द्वारा ‘किलोमीटर स्कीम’ के विरोध में शुक्रवार को संगठित प्रदर्शन हिंसक हो गया। संगरूर में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव के दौरान धुरी थाना प्रभारी (एसएचओ) जसवीर सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने स्थिति पर काबू पाने के लिए 25 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
कर्मचारियों ने गुरुवार देर रात और शुक्रवार सुबह यूनियन नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में हड़ताल की घोषणा की थी। इससे पूरे राज्य में बस सेवाएं ठप रहीं और यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। संगरूर बस अड्डे पर तनाव तब बढ़ गया जब कुछ कर्मचारी खड़ी बसों की छत पर चढ़ गए और पुलिस द्वारा उन्हें नीचे उतारने की कोशिश के दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर पेट्रोल फेंक दिया।
हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, संगरूर के एसपी दविंदर अटरी ने कहा कि हंगामे के दौरान एसएचओ जसवीर सिंह की वर्दी पेट्रोल से भीग गई और उसमें आग लग गई। मौके पर मौजूद पुलिस ने तुरंत उन्हें बचाया। एचएचओ को चेहरे, हाथों और पीठ पर जलने की चोटें आई हैं। उनका इलाज सिविल अस्पताल संगरूर में चल रहा है।” सिविल अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. करमजीत सिंह ने बताया कि जसवीर सिंह की हालत फिलहाल स्थिर है।
पटियाला में पुलिस ने बस स्टैंड पर चल रहे प्रदर्शन को हटाने की कोशिश की तो वहां भी धक्का-मुक्की और झड़पें देखने को मिलीं। स्थिति नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया। इस दौरान कई कर्मचारियों के कपड़े फट गए और पगड़ियां भी उछल गईं।
रोडवेज कर्मचारियों का क्या कहना है?
दरअसल सरकार शुक्रवार किलोमीटर बस स्कीम के लिए टेंडर जारी करने वाली थी। स्कीम के तहत, निजी ऑपरेटर बस ख़रीदते हैं और उसे लीज पर देते हैं;पीआरटीसी बसें चलाता है और ऑपरेटर को तय किलोमीटर के आधार पर भुगतान करता है। इसके खिलाफ नेताओं ने आज दोपहर से हर जगह बस सर्विस बंद करने की घोषणा की थी। कर्मचारियों का आरोप है कि पंजाब रोडवेज और पीआरटीसी किलोमीटर स्कीम के तहत नए टेंडर जारी कर रही है, जिससे निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा और उनकी नौकरियां खतरे में पड़ जाएंगी।
शुक्रवार को एचवीएसी (एयर कंडीशनिंग) वाली करीब 100 बसों का टेंडर खोला जाना था, लेकिन विरोध के कारण उसकी प्रक्रिया टाल दी गई। इसी तरह 2022 में सितंबर में 219 बसों के लिए टेंडर जारी किया गया लेकिन सिर्फ 2 ऑपरेटर ने रुचि दिखाई थी जिसकी वजह से इसे रद्द कर दिया गया था। पीआरटीसी ने 119 बसों के लिए जून 2023 में टेंडर निकाला लेकिन कर्मचारियों के विरोध के बाद इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

एक वरिष्ठ पीआरटीसी अधिकारी ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि स्कीम 1998 से चल रही है और निजी कंपनियां नए बसें और चालक उपलब्ध कराती हैं, जबकि पीआरटीसी प्रति किलोमीटर भुगतान करती है। कर्मचारियों का मानना है कि इससे सरकारी परिवहन कमजोर हो रहा है और स्थायी भर्ती पर असर पड़ रहा है। अधिकारी ने जानकारी दी कि 2 दिसंबर को 200 बसों के लिए एक और टेंडर खोला जाएगा।
हड़ताल के कारण पंजाब रोडवेज, Punbus और PRTC की बसें पूरे राज्य में सड़क से गायब रहीं। यात्रियों को मजबूरी में निजी बसों और अन्य साधनों का सहारा लेना पड़ा। अमृतसर आईएसबीसी पर हजारों यात्री फंसे रहे।

