शिरोमणि अकाली दल (SAD) के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने शुक्रवार को संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी और अकाली दल अपनी राजनीतिक दूरी खत्म कर फिर से साथ आने की तैयारी कर रहे हैं।
दरअसल, अगले साल की शुरुआत में पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे समय में इस मुलाकात ने चर्चा बटोर ली है। दोनों दलों अगर साथ आते हैं तो पंजाब की राजनीति में इसे एक बार फिर अहम मोड़ के तौर पर देखा जा सकता है। कभी पंजाब की राजनीति में सबसे मजबूत गठबंधन रहे भाजपा और अकाली दल का जनाधार पिछले कुछ वर्षों में लगातार कमजोर हुआ है। इस बीच अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी धीरे-धीरे राज्य की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक ताकत बनकर उभरी।
2020 में टूटा था भाजपा और अकाली दल का गठबंधन
भाजपा और शिरोमणि अकाली दल दो दशक से अधिक समय तक सहयोगी रहे, लेकिन सितंबर 2020 में दोनों का गठबंधन टूट गया। केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों को लेकर पैदा हुए विवाद के बीच अकाली दल ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से तब अलग होने का फैसला किया था। इन कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब समेत पूरे देश में बड़े पैमाने पर किसान आंदोलन हुआ था, जिसने इसे एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी बना दिया था।
हालांकि, विरोध और लंबे समय तक चले आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने 2021 में तीनों कृषि कानून वापस ले लिए थे। इसके बावजूद भाजपा और अकाली दल के रिश्तों में आई खटास दूर नहीं हो सकी थी।
2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में दोनों दलों को इसका राजनीतिक नुकसान भी उठाना पड़ा। उस चुनाव में कांग्रेस भी अंदरूनी गुटबाजी का शिकार रही। खासकर तत्कालीन मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच सत्ता संघर्ष ने कांग्रेस को बड़ा नुकसान पहुंचाया था। आलम ये रहा कि मतदाताओं ने कांग्रेस सहित भाजपा और अकाली दल को भी नकार दिया।
2022 के चुनाव ‘आप’ ने मारी थी बाजी
पंजाब में 2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी बड़ी ताकत बन कर उभरी। 2022 के चुनाव में 117 सदस्यीय पंजाब विधानसभा में अलग-अलग चुनाव लड़ने वाली भाजपा केवल दो सीटें जीत सकी, जबकि शिरोमणि अकाली दल के खाते में महज तीन सीटें आईं।
वहीं, पंजाब की जनता ने आम आदमी पार्टी को ऐतिहासिक जनादेश दिया। अपने दूसरे ही विधानसभा चुनाव में पार्टी ने पहली बार राज्य की सत्ता हासिल की और भगवंत मान मुख्यमंत्री बने।
ऐसे राजनीतिक परिदृश्य में संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, अभी तक दोनों दलों की ओर से संभावित गठबंधन को लेकर कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है, लेकिन इस मुलाकात के बाद यह चर्चा जरूर तेज हो गई है।
मोदी-सुखबीर मुलाकात पर केजरीवाल का तंज
पीएम मोदी और सुखबीर बादल की मुलाकात पर अरविंद केजरीवाल ने तंज कसा है। केजरीवाल ने कहा, ‘ना ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे…तो क्या चन्दा चोर पार्टी और बेअदबी पार्टी का गठबंधन हो रहा है?’
बताते चलें कि पंजाब में अकाली दल और भाजपा का गठबंधन 1996 में हुआ और तकरीबन 25 साल चला। दोनों पार्टियों के गठबंधन के महज एक साल बाद ये 1997 में सरकार बनाने में सफल रहे थे। इसके अलावा दोनों पार्टियों के गठबंधन को 2007 और 2012 के विधानसभा चुनाव में भी पूर्ण बहुमत मिला।
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