परीक्षाओं के पेपर लीक और नकल जैसे अपराधों पर सख्ती बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक का प्रस्ताव रखा है। इसे सोमवार को संसद में पेश किए जाने की संभाना है। प्रस्तावित संशोधन में जांच और मुकदमे की प्रक्रिया को तय समय में खत्म करने के साथ-साथ दोषियों के लिए सजा और जुर्माने को भी बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है।
प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार इस कानून के तहत दर्ज मामलों की जांच के लिए एसटीएफ का गठन कर सकेगी। इसके अलावा, पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी से जुड़े मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करना अनिवार्य होगा। सरकार की ओर से यह संशोधन बिल ऐसे समय में आ रहा है जब नीट पेपर लीक का मुद्दा छाया हुआ है। इसे लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक महीने से ज्यादा समय से प्रदर्शन हो रहे हैं। यह प्रदर्शन देश के कई और शहरों में भी देखने को मिला है और बढ़ते दबाव के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से शनिवार को इस्तीफा भी दे दिया। इस्तीफा प्रदर्शनकारियों की सबसे मुख्य मांग थी।
तीन महीने में मुकदमे का निपटारा
बहरहाल, संशोधन विधेयक में मामलों के त्वरित निपटारे पर जोर दिया गया है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों को रोजाना सुनवाई करते हुए तीन महीने के भीतर मुकदमे का निपटारा करना होगा।
यदि किसी फैसले के खिलाफ अपील दायर की जाती है, तो उसका निपटारा भी संबंधित हाई कोर्ट की दो जजों की पीठ तीन महीने के भीतर करेगी। इसके लिए राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को किसी भी सेशन कोर्ट को विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के रूप में नामित करने का अधिकार दिया जाएगा।
दोषियों के लिए सजा होगी दोगुनी
प्रस्तावित संशोधन के तहत परीक्षा में गड़बड़ी करने के दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के लिए सजा को और कड़ा किया गया है। इसमें न्यूनतम सजा को 3 साल से बढ़ाकर 5 साल करने का प्रस्ताव है। वहीं, अधिकतम सजा को 5 साल से बढ़ाकर 10 साल किया जा सकता है। साथ ही अधिकतम जुर्माना 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख करने का प्रस्ताव है।
इसके अलावा कोई सर्विस प्रोवाइडर परीक्षा में धोखाधड़ी या पेपर लीक में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। उसके लिए अधिकतम जुर्माना 1 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ किया जाएगा। साथ ही परीक्षाएं आयोजित करने पर प्रतिबंध की अवधि 4 साल से बढ़ाकर 8 साल करने का प्रस्ताव है।
इसके अलावा, यदि किसी सेवा प्रदाता के निदेशक, वरिष्ठ प्रबंधक या अन्य जिम्मेदार अधिकारी की मिलीभगत सामने आती है, तो उन्हें कम से कम 5 साल की जेल हो सकती है। वर्तमान में यह न्यूनतम सजा 3 साल है। ऐसे अधिकारियों पर 5 करोड़ रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकेगा।
विधेयक में संगठित अपराध के तहत किए जाने वाले पेपर लीक मामलों के लिए भी सजा बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। इसमें न्यूनतम सजा 5 साल से बढ़ाकर 7 साल की जाएगी। वहीं, अधिकतम जुर्माना 1 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ तक किया जाएगा।



