Friday, March 20, 2026
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‘साबित करें कि आप शंकराचार्य हैं’, धरने पर बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को माघ मेला प्रशासन का नोटिस

मेला प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को आधार बनाकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी किया है। नोटिस में पूछा गया है कि वे अपने नाम के आगे शंकराचार्य क्यों लगाते हैं।

प्रयागराज: संगम जाते समय रथ रोके जाने के विरोध में धरने पर बैठे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को माघ मेला प्रशासन ने नोटिस जारी किया है। मेला प्राधिकरण ने कहा है कि वे 24 घंटे में साबित करें कि वे ही असली शंकराचार्य हैं। इससे पहले मेला प्रशासन ने दोहराया कि मौनी अमावस्या के दौरान उनका कोई अपमान नहीं हुआ था।

सामने आई जानकारी के अनुसार मेला क्षेत्र में मंगलवार सुबह स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में गेट पर नोटिस चस्पा किया गया। दरअसल, ज्योतिषपीठ में शंकराचार्य की पदवी को लेकर विवाद रहा है। मामला कोर्ट तक पहुंचा था और इसी का हवाला नोटिस में दिया गया है। नोटिस में पूछा गया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने नाम के आगे शंकराचार्य क्यों लगाया है।

सुप्रीम कोर्ट जब पहुंचा था शंकराचार्य विवाद

अक्टूबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड में ज्योतिष पीठ के नए शंकराचार्य के तौर पर अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के पट्टाभिषेक समारोह पर रोक लगा दी थी। यह आदेश तब दिया गया जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि पुरी के गोवर्धन मठ के शंकराचार्य ने एक हलफनामा दायर किया है जिसमें कहा गया है कि ज्योतिष पीठ के नए शंकराचार्य के तौर पर अविमुक्तेश्वरानंद की नियुक्ति को मंजूरी नहीं दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उस याचिका पर सुनवाई के बाद आया जिसमें आरोप लगाया गया था कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने झूठा दावा किया है कि उन्हें दिवंगत शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने ज्योतिष पीठ के उत्तराधिकारी शंकराचार्य के रूप में नियुक्त किया है। ज्योतिषपीठ में शंकराचार्य पद का मामला अभी भी सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। कोर्ट ने 14 अक्टूबर 2022 को आदेश दिया था कि जब तक इस अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक किसी को भी शंकराचार्य घोषित नहीं किया जा सकता, न ही किसी का पट्टाभिषेक किया जा सकता है।

मेला प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के इसी आदेश को आधार बनाकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी किया है। मेला प्रशासन के नोटिस पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की ओर से सोशल मीडिया पर कहा गया है कि जब पट्टाभिषेक 12 सितंबर 2022 को हो चुका है तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश का कोई मतलब नहीं है।

गौरतलब है कि 11 सितंबर 2022 को संत स्वरूपानंद सरस्वती का निधन हुआ था। इसके अगले ही दिन वसीयत को आधार बताकर उनके निजी सचिव और शिष्य सुबोद्धानंद महाराज ने अविमुक्तेश्वर को शंकराचार्य घोषित करने की बात कही थी। इसके बाद से विवाद जारी है।

माघ मेले से जुड़ा ताजा विवाद क्या है?

मेले से जुड़ा ताजा विवाद मौनी अमावस्या यानी 18 जनवरी से जुड़ा है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपनी पालकी में बैठकर शिष्यों के साथ संगम स्नान के लिए जा रहे थे। पुलिस ने इसे रोकते हुए पैदल संगम के लिए जाने को कहा। हालांकि, शिष्य नहीं माने और पालकी आगे बढ़ाने लगे। इस दौरान शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। हाथापाई की भी खबरें हैं। पुलिस ने कई शिष्यों को हिरासत में ले लिया। इस पर नाराज स्वामी अविमुक्तेश्वर धरने पर बैठ गए।

उन्होंने ने सोमवार को पत्रकारों को बताया कि मौनी अमावस्या के लिए उनके मूवमेंट प्लान को मेला प्रशासन के साथ तीन दिन पहले ही WhatsApp के जरिए शेयर कर दिया गया था, क्योंकि कथित तौर पर ऑफिस स्टाफ ने लिखित एप्लीकेशन लेने से मना कर दिया था।

उन्होंने कहा, ‘शंकराचार्य के लिए पालकी में बैठकर पवित्र स्नान के लिए जाना एक परंपरा है। अगर अधिकारियों को लगता है कि शंकराचार्य को उनसे इजाजत लेने की जरूरत है, तो वे गलत हैं। मेरे शिष्यों के साथ पुलिस ने बदसलूकी की और उन पर बेरहमी से हमला किया। मैंने रात 1 बजे तक इंतजार किया, लेकिन कोई भी सीनियर अधिकारी माफी मांगने या मुझे स्नान के लिए ले जाने नहीं आया।’

‘धरने या भूख हड़ताल पर नहीं बैठा हूं’

शंकराचार्य ने घोषणा की कि वह माघ मेले में ही रहेंगे, लेकिन जब तक प्रशासन इस घटना के लिए माफी नहीं मांगता और उन्हें पूरे सम्मान के साथ संगम नहीं ले जाता, तब तक वह अपने शिविर में वापस नहीं जाएंगे। उन्होंने ये भी कहा कि वह न तो भूख हड़ताल पर है और न ही धरना दे रहे है, बल्कि उस जगह बैठे हैं जहाँ अधिकारियों ने कथित तौर पर रविवार को विवाद के बाद उन्हें छोड़ दिया था।

पुलिस पर अपने 35 शिष्यों को हिरासत में लेने और पुलिस स्टेशन में 12 लोगों पर हमला करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि मेडिकल जांच की गई है और मामला दर्ज करने के लिए एक ईमेल शिकायत भेजी गई है। उन्होंने आगे कहा कि ज्योतिषपीठ हाई कोर्ट जाने के लिए अपने वकीलों से सलाह ले रहा है। अपने शकराचार्य के पद की वैधता के बारे में सवालों पर उन्होंने कहा, ‘मैं शंकरचार्य हूँ और रहूँगा।’

विनीत कुमार
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
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