नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच तेल कंपनियों ने प्रीमियम पोट्रोल की कीमतों में वृद्धि की घोषणा की है। प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में शुक्रवार को 2.09 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी गई है। नई बढ़ी हुई कीमतों को तत्काल प्रभाव से ही लागू कर दिया गया है। इस बीच सरकार की ओर से भी प्रतिक्रिया आई है। सरकार ने कहा है कि सामान्य पेट्रोल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है।
प्रीमियम पेट्रोल वेरिएंट की कीमतों में बढ़ोतरी
हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड सहित सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने अपने प्रीमियम पेट्रोल वेरिएंट की कीमतों में लगभग 2.09 रुपए से 2.35 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि की है।
इस बदलाव के साथ, पावर पेट्रोल और एक्सपी95 जैसे ब्रांडेड फ्यूल की कीमत लगभग 111.68 रुपए प्रति लीटर से बढ़कर लगभग 113.77 रुपए प्रति लीटर हो गई है। हालांकि, सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जिससे आम वाहन चालकों को कुछ राहत मिली है। इस फैसले का असर खासतौर पर उन उपभोक्ताओं पर पड़ेगा जो हाई-ऑक्टेन या प्रीमियम पेट्रोल का इस्तेमाल करते हैं।
प्रीमियम पेट्रोल आमतौर पर बेहतर इंजन परफॉर्मेंस, स्मूद ड्राइविंग और बेहतर माइलेज के लिए जाना जाता है। ऐसे में इसकी कीमत बढ़ने से कार और बाइक मालिकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय माना जा रहा है। खासकर मेट्रो शहरों और हाई-परफॉर्मेंस वाहनों का इस्तेमाल करने वाले लोगों को इसका ज्यादा असर झेलना पड़ सकता है।
बढ़ रहा है तेल बाजार पर दबाव
फिलहाल कंपनियों ने आम पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर रखा है, लेकिन प्रीमियम पेट्रोल में बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार का दबाव बढ़ रहा है।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव जारी रहता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में घरेलू ईंधन कीमतों में और बदलाव देखने को मिल सकता है।
बढ़ी कीमतों पर सरकार ने क्या कहा?
सरकार ने शुक्रवार को कहा कि आम उपभोक्ताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले सामान्य पेट्रोल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। केवल प्रीमियम पेट्रोल के दाम बढ़ाए गए हैं, जो कुल बिक्री का सिर्फ 3-4 प्रतिशत हिस्सा होता है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने दैनिक ब्रीफिंग में बताया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें नियंत्रण मुक्त (डीरेगुलेटेड) हैं और इन्हें तेल विपणन कंपनियों (ऑयल मार्केटिंग कंपनियां – ओएमसी) द्वारा तय किया जाता है।
उन्होंने यह भी बताया कि देश में एलपीजी की सप्लाई सामान्य बनी हुई है और कहीं भी गैस खत्म होने की स्थिति नहीं है। उत्पादन भी बढ़ाया गया है ताकि सप्लाई बनी रहे। ईरान से तेल खरीदने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस पर अभी कुछ भी कहना मुश्किल है।
सरकार को आम लोगों की परवाह है: शाहनवाज हुसैन
दूसरी ओर प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन ने कहा, ‘सरकार आम जनता की परवाह करती है। ईरान-इजराइल-अमेरिका युद्ध में लगभग 14 देश शामिल हैं, जिनमें से सभी पेट्रोल और गैस के प्रमुख उत्पादक हैं। नतीजतन, पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें विश्व स्तर पर बढ़ गई हैं। हालांकि, भारत में प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में केवल 2.70 रुपये की वृद्धि हुई है, औद्योगिक ईंधन की कीमतों में वृद्धि हुई है, लेकिन आम जनता द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि नहीं की गई है। यह दर्शाता है कि हमारे प्रधानमंत्री और सरकार आम जनता की परवाह करते हैं और इस संकट के दौरान भी उनकी चिंताओं पर विचार किया जा रहा है।’
दूसरी ओर पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि भारत ऊर्जा के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं है और आयात पर निर्भर है। उन्होंने एलपीजी की कमी के मसले पर कहा कि स्थिति को संभालने के लिए 13,700 से ज्यादा पीएनजी कनेक्शन दिए गए हैं ताकि एलपीजी पर दबाव कम हो सके। पिछले एक हफ्ते में 11,300 टन कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई की गई है।
इसके अलावा करीब 7,500 उपभोक्ता एलपीजी से पीएनजी की ओर शिफ्ट हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि घबराहट में गैस बुकिंग कम हुई है और एक दिन में करीब 55 लाख रीफिल बुकिंग आई हैं। सरकार एलपीजी की सप्लाई सुरक्षित रखने के लिए लगातार प्रयास कर रही है और सप्लाई के नए स्रोत भी तलाश रही है, जिससे स्थिति स्थिर बनी रहे। साथ ही राज्य सरकारों से निगरानी और सख्ती बढ़ाने को कहा गया है ताकि वितरण में कोई बाधा न आए।
(समाचार एजेंसी IANS के इनपुट के साथ)

