धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी को सौंप दी गई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार शाम धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया और प्रल्हाद जोशी को उनके मौजूदा मंत्रालयों के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया।
प्रल्हाद जोशी वर्तमान में केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री सहित नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री हैं। इसके अलावा वे इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) के अध्यक्ष भी हैं। इससे पहले वे कोयला, खान और संसदीय कार्य मंत्री की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से सांसद जोशी अब अपने मौजूदा मंत्रालयों के साथ शिक्षा मंत्रालय का काम भी संभालेंगे।
अधिकारियों के अनुसार तत्काल यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि शिक्षा मंत्रालय के कामकाज में किसी तरह की रुकावट न आए। नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।
पेपर लीक पर प्रदर्शनों के बीच धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
इससे पहले दिन में धर्मेंद्र प्रधान ने नीट पेपर लीक को लेकर देशभर में चल रहे छात्र आंदोलनों के बीच इस्तीफा दिया। कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में एक महीने से ज्यादा समय से चल रहे इन प्रदर्शनों के बाद सरकार पर लगातार दबाव बढ़ रहा था। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग ही धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा थी। प्रधान ने इस्तीफे को लेकर सोशल मीडिया पर जारी एक पत्र में कहा कि छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए वे इस्तीफा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा अनियमितताओं को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों का इस्तेमाल ‘राष्ट्रविरोधी ताकतें’ न कर सकें, इसलिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया है।
पिछले कई सप्ताह से प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। छात्र परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और व्यापक सुधार की मांग कर रहे थे। लगातार बढ़ते राजनीतिक दबाव और चल रहे आंदोलन के बीच किसी वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री का इस तरह इस्तीफा आना मोदी सरकार के पिछले 12 साल के कार्यकाल में बेहद दुर्लभ मामला है।
सीजेपी और सरकार के बीच बातचीत से पहले आया इस्तीफा
धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी के बीच शनिवार को तीसरे दौर की वार्ता शुरू होने से कुछ घंटे पहले इस्तीफा दिया। सीजेपी पहले ही साफ कर चुकी थी कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उसकी सबसे प्रमुख मांग है और वह इस पर समझौता नहीं करेगी। दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ हुई तीसरे दौर की बातचीत के बाद CJP ने जंतर-मंतर पर चल रहा अपना 37 दिनों का आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी।
केंद्रीय मंत्रियों के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास ने कहा कि संगठन सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों और तय समयसीमा में मांगों को पूरा किए जाने की समझ के आधार पर ‘अच्छी नियत के साथ’ अपना आंदोलन वापस ले रहा है। सौरभ दास ने कहा कि यदि छात्रों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो युवा फिर से जंतर-मंतर लौटेंगे और सरकार से जवाबदेही की मांग करेंगे। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने भी छात्रों से आंदोलन समाप्त कर अपने घर लौटने की अपील की।

