भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में पाकिस्तान पर तीखा हमला करते हुए उसे एक ‘फ्रेंकनस्टाइन राज्य’ करार दिया, यानी एक ऐसा देश जो खुद तब हैरान-परेशान हो जाता है जब उसका ‘अपना ही राक्षस उसे काटने लगता है।’ भारत ने इस्लामाबाद पर आतंकवादियों को ‘पनाह देने, प्रशिक्षण देने और तैनात करने’ का आरोप लगाया। आतंकवादियों को पनाह देने के सबूत सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं, क्योंकि जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के संस्थापक मौलाना मसूद अजहर और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के सरगना हाफिज सईद पाकिस्तान में मौजूद हैं।
इन सभी आतंकवादियों का मुख्य निशाना केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हैं। लद्दाख पहले जम्मू-कश्मीर राज्य का हिस्सा था। इसका मूल कारण वे नदियां हैं जो इन क्षेत्रों से होकर बहती हैं। सिंधु नदी लद्दाख से, झेलम कश्मीर से और चिनाब जम्मू क्षेत्र से होकर बहती है।
भारतीय राजनयिक अनुपमा सिंह ने संयुक्त राष्ट्र में कहा कि पाकिस्तान ऐसा देश है जिसके रक्षा मंत्री (ख्वाजा आसिफ) ने स्वयं यह स्वीकार किया है कि देश की नीति के तौर पर ‘आतंकवादियों को पनाह दिया जाता है, उन्हें प्रशिक्षण दिया जाता है और तैनात किया जाता है।’ आसिफ ने पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में यह टिप्पणी करते हुए कहा था कि पश्चिमी शक्तियों, विशेष रूप से अमेरिका के कहने पर देश ने आतंकवाद को बढ़ावा दिया और जिहाद के सैनिक (यानी आतंकवादी) उपलब्ध कराए।
हाफिज सईद और मसूद अजहर संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादी हैं और वे पाकिस्तान की सैन्य खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के संरक्षण में रह रहे हैं। इसके अलावा, भारत की कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा वांछित हिजबुल मुजाहिदीन प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन दशकों पहले पाकिस्तान भाग गया था। अब वह तथाकथित यूनाइटेड जिहाद काउंसिल (UJC) का नेतृत्व करता है, जिसका उद्देश्य भारत में आतंकवादी हमले करना है।
पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को बढ़ावा देने संबंधी ये टिप्पणियां संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में प्रथम सचिव अनुपमा सिंह ने कीं। उन्होंने ये टिप्पणियां तब कीं, जब पाकिस्तान और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त की वार्षिक रिपोर्ट पर इंटरैक्टिव डायलॉग के दौरान जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया।
सिंह ने कहा, ‘भारत, पाकिस्तान और ओआईसी द्वारा उसके संबंध में किए गए उल्लेखों के जवाब में उत्तर देने के अपने अधिकार का प्रयोग करने के लिए बाध्य है। हम पाकिस्तान द्वारा लगाए गए निराधार और दुर्भावनापूर्ण आरोपों को स्पष्ट रूप से खारिज करते हैं।’
UN में बोला भारत- जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा
राजनयिक ने आगे कहा, ‘हम ओआईसी द्वारा जम्मू-कश्मीर को लेकर संदर्भों को भी स्पष्ट रूप से खारिज करते हैं…रिकॉर्ड के लिए, जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा। एकमात्र अनसुलझा मुद्दा भारतीय क्षेत्रों पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा और उनकी वापसी है।’ यह बयान 1947 में पाकिस्तान द्वारा बलपूर्वक जम्मू-कश्मीर के एक हिस्से पर कब्जा किए जाने के बाद से जम्मू-कश्मीर पर भारत की आधिकारिक स्थिति को दर्शाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान ऐसा देश है, जिसके मौजूदा रक्षा मंत्री (ख्वाजा आसिफ) ‘देश की नीति के रूप में आतंकवादियों को पनाह देने, उन्हें प्रशिक्षण देने और तैनात करने का गर्व से दावा करते हैं।’ उल्लेखनीय है कि ख्वाजा आसिफ ने नेशनल असेंबली में यह टिप्पणी करते हुए कहा था कि पाकिस्तान ने बहुत लंबे समय तक पश्चिमी शक्तियों, विशेष रूप से अमेरिका के कहने पर आतंकवाद को बढ़ावा दिया।
रोटी मांगने वालों को गोलियां
सिंह ने कहा, ‘इस बात पर किसी को भी हैरान नहीं करनी चाहिए। एक अवैध और गैर-कानूनी कब्जे को केवल बल के माध्यम से ही बनाए रखा जा सकता है।’ उन्होंने कहा, ‘यह वही देश है, जिसका मौजूदा रक्षा मंत्री (अर्थात ख्वाजा आसिफ) देश की नीति के रूप में आतंकवादियों को पनाह देने, उन्हें प्रशिक्षण देने और तैनात करने का गर्व से दावा करता है, और फिर भी पाकिस्तान स्वयं को आतंकवाद का पीड़ित बताता है।’
राजनयिक ने आगे कहा, ‘वास्तव में, यह एक ऐसा विरोधाभास है जिसे केवल पाकिस्तान ही कायम रख सकता है। यह एक फ्रेंकनस्टाइन राज्य का जीवंत उदाहरण है, जो तब हैरान हो जाता है जब उसका अपना ही राक्षस उसे काटने लगता है।’
उन्होंने यह भी कहा कि ‘बुनियादी स्वतंत्रताओं से इनकार ने हालात को इस मुकाम पर पहुंचा दिया है, जहां रोटी, बिजली, अधिकारों और सम्मान की मांग तक का जवाब गोलियों और बर्बरता से दिया जाता है।’ वे साफ तौर पर पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में हाल ही में हुए प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई का उल्लेख कर रही थीं, जहां इन क्रूर कार्रवाइयों में सैकड़ों लोगों की मौत हो गई थी।
5 जून को पीओजेके में बड़े पैमाने पर अशांति फैल गई थी, जब जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली संघीय सरकार से आर्थिक रियायतों की मांग की थी। जब उसने 9 जून से शुरू होने वाली हड़ताल के अपने आह्वान को वापस लेने से इनकार कर दिया, तो पाकिस्तानी अधिकारियों ने दमनकारी कदम उठाए। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी को प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन घोषित करने से शुरुआत करते हुए, पाकिस्तान ने समिति के चार नेताओं पर एक-एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर दिया।
सिंधु जल संधि पुरानी बात…
सिंह ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि का भी उल्लेख किया और इसे ‘पुरानी पड़ चुकी बात’ बताया। सिंह ने कहा, ‘सिंधु जल संधि पर हमारा रुख सभी को पता है। यह तर्क से परे है कि एक ऐसा राज्य, जो नीति के साधन के रूप में आतंक का निर्यात करता है, वह सद्भावना और मित्रता पर आधारित सहयोग के विशेषाधिकारों की मांग करता रहे।’
अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने दशकों पुरानी इस संधि को स्थगित कर दिया था। पहलगाम हमले में 26 नागरिकों की मौत हो गई थी, जिनमें 24 पुरुष हिंदू पर्यटक शामिल थे। सिंह ने कहा, ‘यह भी उतना ही निर्विवाद है कि यह संधि अब पुरानी पड़ चुकी है। कोई भी तकनीकी व्यवस्था उस समय में जमी हुई नहीं रह सकती, जबकि उसके आसपास की दुनिया पूरी तरह बदल चुकी हो।’
सिंह ने यह भी कहा कि 1960 में हुई बातचीत के जरिए बनी किसी संधि को ‘एक स्थायी अधिकार’ के रूप में नहीं देखा जा सकता, जो जवाबदेही से मुक्त हो, वर्तमान परिस्थितियों से अलग-थलग हो और पिछले छह दशकों में हुए गहरे बदलाव से अछूती हो।
विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई सिंधु जल संधि 1960 से भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के पानी के वितरण और उपयोग को नियंत्रित करती रही है। सिंह ने आगे कहा, ‘भारतीय क्षेत्रों पर नजर रखने की बजाय, पाकिस्तान अपने और अपने लोगों के हित में अपने घर को व्यवस्थित करने का काम कहीं बेहतर तरीके से कर सकता है।’
भारत का सख्त संदेश
संयुक्त राष्ट्र में सिंधु जल संधि को एक पुराना समझौता करार देना इस संधि को लेकर भारत के रुख में एक नए घटनाक्रम और सख्ती का संकेत देता है। यह पाकिस्तान के विदेश मंत्री अशफाक डार द्वारा संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिखकर भारत द्वारा इस संधि को स्थगित किए जाने पर उसकी निंदा करने की मांग किए जाने के बाद सामने आया है। कुछ दिन पहले पाकिस्तान के एक वरिष्ठ राजनयिक ने डार का पत्र यूएन को सौंपा था।
इसी से जुड़े एक घटनाक्रम में डार ने सिंधु नदी पर भारत की परियोजनाओं को लेकर चिंता जताई थी और चेतावनी दी थी कि ऐसे कदम क्षेत्रीय स्थिरता और जल सुरक्षा के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं। डार ने ये टिप्पणियां ब्रुसेल्स में पाकिस्तान दूतावास और सेंटर फॉर यूरोपियन पॉलिसी स्टडीज (CEPS) द्वारा आयोजित एक सेमिनार को वीडियो लिंक के माध्यम से संबोधित करते हुए की थीं।
पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के अनुसार, डार ने ‘सिंधु नदी प्रणाली पर हाल में भारत द्वारा किए गए जलाशयों के विस्तार और पानी के बहाव को मोड़ने से जुड़ी परियोजनाओं पर चिंता व्यक्त की और चेतावनी दी कि ऐसे कदम प्राकृतिक नदी प्रवाह को बदल सकते हैं, जल प्रभुत्व (हाइड्रो-हेजेमनी) को बढ़ावा दे सकते हैं और क्षेत्रीय स्थिरता तथा जल सुरक्षा के लिए गंभीर खतरे पैदा कर सकते हैं।’
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