Thursday, April 9, 2026
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ऑपरेशन एपिक फ्यूरीः ईरान के 13,000 से ज्यादा ठिकानों को बनाया गया निशाना, 13 अमेरिकी सैनिक मारे गए

हेगसेथ ने जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अमेरिका के पास ईरान की अर्थव्यवस्था को कुछ ही मिनटों में पंगु करने की क्षमता थी, लेकिन उसने जानबूझकर संयम बरता। उनके मुताबिक, ईरान के सीजफायर मान लेने के बाद वॉशिंगटन ने टकराव को और आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया।

वॉशिंगटनः अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने बुधवार को पेंटागन में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ को सफल बताया। रक्षा मंत्री हेगसेथ ने दावा किया कि 40 दिनों से भी कम समय में अमेरिका और इजराइल ने अपने हर रणनीतिक मकसद को हासिल कर लिया है और ईरान की सैन्य शक्ति को पूरी तरह पंगु बना दिया है। हेगसेथ के अनुसार ‘नई सत्ता’ के साथ उनकी बातचीत सही राह पर है।

पेंटागन ने बुधवार को बताया कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत 13,000 से अधिक लक्ष्यों पर हमले किए। हालांकि इस बड़े सैन्य अभियान में 13 अमेरिकी सैनिकों की भी जान गई। जनरल डैन केन ने कहा कि ऑपरेशन का पैमाना इसकी तीव्रता और व्यापक पहुंच को दिखाता है।

उन्होंने बताया कि हमले की शुरुआत से अब तक अमेरिकी संयुक्त बलों ने 13,000 से अधिक लक्ष्यों को निशाना बनाया। 80 फीसदी एयर डिफेंस सिस्टम और 90 फीसदी से ज्यादा नौसैनिक बेड़े और 90 फीसदी हथियार फैक्ट्रियों को नष्ट कर दिया। इनमें से 4,000 से ज्यादा लक्ष्य ऐसे थे जो युद्ध के दौरान रीयल-टाइम में सामने आए और तेज कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम के जरिए तुरंत कार्रवाई की गई।

इस अभियान के तहत 10,000 से ज्यादा मिशन संचालित किए गए, जिनमें 62 बॉम्बर उड़ानें शामिल थीं। इनमें से कुछ मिशन अमेरिका से उड़ान भरकर ईरान तक गए और 30 घंटे से ज्यादा समय तक चले। केन ने कहा, “दुनिया की कोई और सेना ऐसा नहीं कर सकती,” और इसे अमेरिकी लॉजिस्टिक क्षमता का उदाहरण बताया।

450 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइल केंद्र, 801 ड्रोन स्टोरेज साइट्स तक…सब तबाह

अभियान में ईरान के सैन्य ढांचे को बड़े पैमाने पर निशाना बनाया गया। अमेरिका ने 450 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइल भंडारण केंद्र, 801 ड्रोन स्टोरेज साइट्स और 1,500 से अधिक एयर डिफेंस ठिकानों को नष्ट करने का दावा किया है, जिससे ईरान की करीब 80 फीसदी वायु रक्षा क्षमता खत्म हो गई।

केन के मुताबिक, इस ऑपरेशन में ईरान के कमांड और कंट्रोल नेटवर्क को भी भारी नुकसान पहुंचाया गया। 2,000 से ज्यादा नोड्स पर हमले कर उसकी सैन्य समन्वय क्षमता को कमजोर कर दिया गया।

नौसैनिक मोर्चे पर भी व्यापक कार्रवाई हुई। अमेरिका का दावा है कि उसने ईरान के 90 प्रतिशत से अधिक नौसैनिक बेड़े को डुबो दिया, जिसमें बड़े युद्धपोत भी शामिल हैं, और 700 से अधिक हमलों के जरिए 95 प्रतिशत से ज्यादा नौसैनिक बारूदी सुरंगों को नष्ट कर दिया।

ईरान के 90% हथियार कारखानों को निशाना बनाने का दावा

रक्षा उद्योग पर भी इसका बड़ा असर पड़ा। ईरान के करीब 90 फीसदी हथियार कारखानों को निशाना बनाया गया, जिनमें ड्रोन और मिसाइल उपकरण बनाने वाली इकाइयां शामिल हैं। केन ने कहा कि ईरान के परमाणु औद्योगिक ढांचे का लगभग 80 फीसदी हिस्सा भी प्रभावित हुआ है।

इस मिशन में अमेरिका के 50,000 से अधिक कर्मियों ने हिस्सा लिया, जिन्होंने पांच सप्ताह तक दिन-रात काम किया। केन ने कहा कि आंकड़े युद्ध की वास्तविकता को पूरी तरह नहीं दिखा सकते। उन्होंने कहा कि यह बेहद कठिन, अव्यवस्थित और अनिश्चित माहौल होता है।

अभियान की सफलता के बीच पेंटागन ने 13 सैनिकों की मौत को भी स्वीकार किया। केन ने कहा, “हम अपने शहीदों और उनके परिवारों को कभी नहीं भूलते, खासकर ऑपरेशन एपिक फ्यूरी में जान गंवाने वाले 13 सैनिकों को। पेंटागन के अनुसार, इस अभियान ने क्षेत्र में ईरान की सैन्य क्षमता को काफी कमजोर कर दिया है और अमेरिकी हितों के लिए उसके खतरे को सीमित किया है।

केन ने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा सीजफायर स्थायी समाधान नहीं है, बल्कि एक अस्थायी ठहराव है। उन्होंने कहा, “ईरान को किसी भी बड़े स्तर की जवाबी क्षमता फिर से विकसित करने में वर्षों लग सकते हैं। और अगर अभियान दोबारा शुरू करने का आदेश मिलता है, तो अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार है।”

इसे भी पढ़ेंः सीजफायर के बीच ट्रंप का सख्त रुख- यूरेनियम संवर्धन पर पूरी रोक, टैरिफ-प्रतिबंधों में राहत पर होगी बातचीत

अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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