Homeमनोरंजनमैं वापस आऊंगा... विभाजन में उपजी प्रेम कहानी, इम्तियाज अली ने किन...

मैं वापस आऊंगा… विभाजन में उपजी प्रेम कहानी, इम्तियाज अली ने किन बारीकियों का रखा ध्यान?

इम्तियाज अली का सिनेमा केवल एक कहानी नहीं, बल्कि एक रूहानी सफर होता है। उनकी फिल्मों में अक्सर ‘सफर’ और ‘आत्म-खोज’ की एक गहरी गूँज सुनाई देती है। अब अपनी आगामी फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ के साथ, वे फिर से एक ऐसा ही भावुक कोलाज बुन रहे हैं।

भारतीय सिनेमा में अगर कोई निर्देशक मानवीय भावनाओं की जटिलताओं और प्रेम के रूहानी सफर को पर्दे पर उतारने में माहिर है, तो वह नाम है इम्तियाज अली। ‘जब वी मेट’, ‘रॉकस्टार’ और ‘तमाशा’ जैसी फिल्मों से पहचान बनाने वाले इम्तियाज अपनी अगली फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ लेकर आ रहे हैं। 12 जून, 2026 को रिलीज होने वाली यह फिल्म विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जिसमें दिलजीत दोसांझ, शरावरी, वेदांग रैना और नसीरुद्दीन शाह प्रमुख भूमिकाओं में हैं।

इम्तियाज अली की फिल्मों की सबसे बड़ी खूबी उनका ‘नॉन-लीनियर’ नैरेटिव है। उनकी कहानियां समय की सीधी रेखा में नहीं चलतीं, बल्कि यादों, फ्लैशबैक और सपनों के जरिए किरदार के भीतर झांकती हैं। ‘मैं वापस आऊंगा’ में भी उन्होंने अतीत को जीवंत करने के लिए तकनीकी बारीकियों का सहारा लिया है।

हाल ही में आईएएनएस के साथ बातचीत में उन्होंने फिल्म से जुड़ी कई परतें खोलीं। उन्होंने बताया कि फिल्म में ‘यादों की रोशनी’ (Light of memory) को दिखाने के लिए उन्होंने खास फिल्टर और लेंस का इस्तेमाल किया है। उनका मानना है कि जब हम अतीत को याद करते हैं, तो वह वर्तमान जैसा नहीं दिखता- उसका अपना एक खास रंग और अहसास होता है।

फिल्म में दिखेगा 1940 का पंजाब

फिल्म के क्राफ्ट पर बात करते हुए इम्तियाज ने चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि 1940 के दशक के पंजाब पर रिसर्च के दौरान पता चला कि उस समय के लोग आज की तुलना में कहीं अधिक ‘पश्चिमी’ थे। पंजाब उस समय सांस्कृतिक रूप से पश्चिम से बहुत प्रभावित था, जिससे उनके पहनावे में स्विंग और डांस का असर दिखता था।

फिल्म में कपड़ों के रंग और डाई (Dye) पर भी विशेष ध्यान दिया गया है ताकि 1940 का कालखंड बिल्कुल वास्तविक लगे। इम्तियाज के अनुसार, अतीत को पर्दे पर उतारने का मतलब केवल पुराने कपड़े पहनना नहीं, बल्कि उस दौर के ‘नजरिए’ को फिर से बनाना है।

संगीत, जो इम्तियाज अली की फिल्मों की आत्मा माना जाता है, इस बार भी खास है। इम्तियाज अली और एआर रहमान की जोड़ी ने हमेशा ‘रॉकस्टार’ और ‘अमर सिंह चमकीला’ जैसे शानदार एलबम दिए हैं। इस फिल्म में भी रहमान का संगीत मुख्य भूमिका में है।

संगीत, भाषा और संवाद को लेकर रहते हैं सजग

इम्तियाज ने रहमान को इसलिए चुना क्योंकि वे उस दौर के पश्चिमी ‘स्विंग’ और भारतीय ‘लोक संगीत’ (Folk) के मेल को बखूबी पेश कर सकते थे। फिल्म का संगीत न केवल उस युग को जीवंत करता है, बल्कि आज के दर्शकों के लिए भी उतना ही प्रासंगिक और मधुर है। हाल ही में फिल्म का गाना ‘क्या कमाल है’ चर्चा में रहा है, जिसे ‘उम्मीद का गीत’ कहा जा रहा है।

भाषा और संवादों को लेकर भी इम्तियाज खास सजग रहते हैं। उनकी फिल्मों में भाषा केवल संवाद नहीं, बल्कि किरदार का व्यक्तित्व होती है। उन्होंने साझा किया कि उनकी कहानी कहने की शैली पर भारत और पंजाब के उन महान लेखकों का गहरा असर है, जिन्हें उन्होंने वर्षों से पढ़ा है। यही कारण है कि उनके संवाद दर्शकों के दिलों को गहराई से छू जाते हैं।

मेकर्स ने इस अपकमिंग फिल्म का धमाकेदार टीजर जारी भी जारी कर दिया है जिसे लोगों ने काफी पसंद किया। इस टीजर को अबतक 3 मिलियन से ज्यादा बार देखा जा चुका है। इम्तियाज अली के फैंस इस फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

author avatar
अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
Anil Sharma, Anil Anuj, Anil anuj articles, bole bharat, बोले भारत, अनिल शर्मा, अनिल अनुज,
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular