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यूपी में 12 साल बाद नए वेज बोर्ड गठन का फैसला, बढ़ेगी श्रमिकों की बेसिक सैलरी

नियमों के अनुसार वेज बोर्ड का गठन हर 5 साल में किया जाना चाहिए। हालांकि, 2014 के बाद से यह नहीं हो सका था।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 12 साल बाद अगले माह से राज्य में नए वेज बोर्ड के गठन की घोषणा की है। यह घोषणा नोएडा में हाल ही में हुए श्रमिक विरोध और हिंसा की घटनाओं के बाद हुई है। नोएडा में वेतन और काम की परिस्थितियों को लेकर इसी हफ्ते बड़े पैमाने पर विरोध और प्रदर्शन हुए थे, जिसने हिंसक रूप भी ले लिया था।

राज्य में पिछली बार वर्ष 2014 में वेज बोर्ड का गठन हुआ था। इसके बाद से श्रमिकों के मूल वेतन में कोई बड़ा संशोधन नहीं किया गया और केवल महंगाई भत्ते (DA) में समय-समय पर बढ़ोतरी की जाती रही है। ऐसे में पिछले 12 सालों से यह प्रक्रिया लंबित थी।

नए वेज बोर्ड का उद्देश्य श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी को फिर से तय करना और वेतन संरचना में बदलाव करना है। यह फैसला नोएडा के हालिया विवाद और फिर गठित हाईपावर कमेटी की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है। वेज बोर्ड का गठन इसलिए अहम है क्योंकि यही श्रमिकों के लिए मूल वेतन तय करता है।

5 साल में गठन का है नियम

नियमों के अनुसार वेज बोर्ड का गठन हर 5 साल में किया जाना चाहिए। सरकार के अनुसार नए वेज बोर्ड के गठन के बाद न्यूनतम मजदूरी की मूल दरों को नए सिरे से तय किया जाएगा। सरकार द्वारा किए गए इस अंतरिम संशोधन में मजदूरी में लगभग 21 प्रतिशत तक की वृद्धि की जा सकती है।

श्रमिकों की ओर से लंबे समय से न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग की जा रही थी। नोएडा हिंसा के दौरान यह बात भी सामने आई है कि समान काम के लिए अलग-अलग राज्यों में वेतन में अंतर को लेकर असंतोष था। इस पर भी सरकार ध्यान दे सकती है।

सरकार के अनुसार अब तक प्रदेश में मजदूरी की मूल दर और उस पर मिलने वाले महंगाई भत्ते की दरें एक समान थी, लेकिन नई व्यवस्था में इसमें बदलाव किया जा सकता है।

वैसे बता दें कि नोएडा की घटना के बाद सरकार अंतरिम राहत के तौर पर न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी का ऐलान कर चुकी है, जिसे जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी माना जाएगा। हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अंतिम वेतन संरचना नए वेज बोर्ड की सिफारिशों के आधार पर तय की जाएगी। फिलहाल लागू की गई बढ़ोतरी को अंतरिम व्यवस्था के रूप में देखा जा रहा है।

दरअसल, 2014 में घोषित न्यूनतम मजदूरी की मूल दरों को देखें तो ये अकुशल के लिए 5750 रुपये प्रतिमाह, अर्धकुशल के लिए 6325 रुपया और कुशल के लिए 7085 रुपये प्रतिमाह था। वहीं, नोएडा-गाजियाबाद में अप्रैल माह से लागू संशोधित दरों में बदलाव है। यहां अकुशल के लिए पहले वेतन 11,313 रुपये था जो अब 13,690 रुपये होगा। ऐसे ही अर्धकुशल के पहले के 12445 रुपये की जगह नया वेतन 15,059 रुपये प्रतिमाह होगा। कुशल के लिए 16,868 रुपये किया गया है, जो पहले 13, 940 रुपये था।

यह भी पढ़ें- सम्राट चौधरी ने बिहार के मुख्यमंत्री पद की ली शपथ; जदयू के बिजेंद्र यादव, विजय चौधरी बने डिप्टी सीएम

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विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
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