अगर आप सड़क पर वाहन चलाते समय ट्रैफिक नियमों को हल्के में लेते हैं, तो अब सावधान हो जाइए। सरकार ने ई-चालान के नियमों में बड़ा बदलाव किया है, जिसके बाद चालान में राहत पाना पहले जितना आसान नहीं रहेगा।
नए नियम के तहत वाहन मालिक चालान को अदालत में चुनौती तभी दे सकेगा, जब वह पहले चालान राशि का 50 प्रतिशत जमा कर दे। यानी यदि किसी वाहन पर 10,000 रुपये का चालान हुआ है, तो अदालत का दरवाजा खटखटाने से पहले उसे 5,000 रुपये जमा करने होंगे।
क्या है नया नियम?
केंद्रीय मोटर वाहन नियमावली, 1989 के नियम 167 में संशोधन किया गया है। सरकार ने इसका मसौदा सितंबर 2025 में तैयार किया था। इसके तहत चालान जारी करने, भुगतान करने और उसे चुनौती देने की पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध बनाया गया है।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार की ओर से जारी अधिसूचना की जानकारी नोएडा ट्रैफिक पुलिस को हाल ही में मिली है। अधिकारियों के अनुसार, नए नियम लागू होने के बाद वाहन मालिकों को तय समय-सीमा के भीतर कार्रवाई करनी होगी।
नए प्रावधान के अनुसार, चालान जारी होने के 45 दिनों के भीतर वाहन मालिक को या तो जुर्माना जमा करना होगा या फिर यह बताना होगा कि चालान गलत तरीके से जारी किया गया है।
अगर वाहन मालिक को लगता है कि चालान गलत है, तो उसे संबंधित दस्तावेजों के साथ पोर्टल पर शिकायत दर्ज करनी होगी। अगर वह 45 दिनों के भीतर कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराता, तो माना जाएगा कि उसने चालान स्वीकार कर लिया है।
शिकायत पर 30 दिन में होगा फैसला
यदि वाहन मालिक चालान को चुनौती देता है, तो ट्रैफिक पुलिस को 30 दिनों के भीतर शिकायत का निस्तारण करना होगा। अगर जांच में चालान गलत पाया जाता है और उसे रद्द किया जाता है, तो इसका विवरण पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। वहीं, अगर पुलिस शिकायत खारिज कर देती है, तो वाहन मालिक को 30 दिनों के भीतर चालान की राशि जमा करनी होगी।
यदि वाहन मालिक पुलिस के फैसले से संतुष्ट नहीं है, तो वह अदालत में अपील कर सकता है। हालांकि इसके लिए पहले चालान राशि का 50 प्रतिशत भुगतान करना अनिवार्य होगा।
रिपोर्ट में नोएडा के डीसीपी ट्रैफिक अभय मिश्रा के हवाले से बताया गया है कि चालान भुगतान और उसे चुनौती देने की प्रक्रिया को अब समयबद्ध और अधिक पारदर्शी बनाया गया है। अदालत में अपील करने से पहले आधी राशि जमा करना जरूरी होगा।
अब लोक अदालत में राहत भी आसान नहीं
अब तक बड़ी संख्या में लंबित चालान मामलों को लोक अदालतों में भेजा जाता था, जहां कई मामलों में जुर्माने की राशि कम कर दी जाती थी या मामूली भुगतान पर निपटारा हो जाता था।
लेकिन नए नियम लागू होने के बाद वाहन मालिक को पहले निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा और अदालत में जाने से पहले चालान राशि का 50 प्रतिशत जमा करना होगा।
चालान से जुड़ी जानकारी देखने, भुगतान करने और शिकायत दर्ज कराने की सुविधा NextGen mParivahan पोर्टल पर उपलब्ध होगी।
पहले क्या होता था?
अब तक ई-चालान कटने के बाद वाहन मालिक के पास जुर्माना भरने या मामले को लंबित छोड़ने का विकल्प होता था। कई मामलों में भुगतान नहीं होने पर चालान न्यायालय भेज दिया जाता था। बाद में लोक अदालतों में बड़ी संख्या में ऐसे मामलों का निपटारा किया जाता था, जहां कई बार मूल चालान राशि से कम रकम जमा कर मामला रफादफा कर दिया जाता था। पहले अदालत जाने से पहले 50 प्रतिशत राशि देने जैसी बाध्यता भी नहीं होती थी।

