ढाका: बांग्लादेश में चुनाव के बाद अब सत्ता परिवर्तन की तैयारी के बीच निवर्तमान अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस का विदाई भाषणा चर्चा में आ गया है। टीवी पर अपने फेयरवेल स्पीच में उन्होंने कुछ ऐसी बातें कहीं जो भारत को चुभ सकती हैं। यूनुस ने दरअसल अपने भाषण में पूर्वोत्तर राज्यों जिन्हें सेवन सिस्टर्स भी कहा जाता है, उसका जिक्र किया लेकिन भारत का नाम नहीं लिया।
यूनुस का यह बयान उस समय आया है जब भारत ने बांग्लादेश में हुए आम चुनाव का स्वागत किया है। साथ ही भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री बनने जा रहे तारिक रहमान की जीत पर गर्मजोशी दिखाते हुए बधाई भी दी थी। शेख हसीना की सत्ता से बेदखली के बाद बागडोर संभाल रहे मोहम्मद यूनुस ने सोमवार को कार्यवाहक प्रमुख के पद से इस्तीफा दिया।
मोहम्मद यूनुस ने सेवन सिस्टर्स को लेकर क्या कहा?
टीवी पर सोमवार को अपने भाषण में यूनुस ने बांग्लादेश की समुद्री पहुंच और संपर्क का जिक्र किया और कहा कि नेपाल, भूटान सहित भारत के पूर्वोत्तर राज्यों- सेवन सिस्टर्स के पास बड़ा आर्थिक सामर्थ्य है। अपने संबोधन में यूनुस ने बांग्लादेश की समुद्री पहुंच को लेकर कहा कि ये महज एक बॉर्डर से कहीं अधिक है।
उन्होंने कहा, ‘हमारा खुला समुद्र महज एक भौगोलिक सीमा नहीं है, यह वैश्विक अर्थव्यवस्था का प्रवेश द्वार है। नेपाल, भूटान और सेवन सिस्टर्स के साथ, इस क्षेत्र में अपार आर्थिक क्षमता है। आर्थिक क्षेत्र, व्यापार समझौते और ड्यूटी-फ्री बाजार पहुंच हमें एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित कर सकते हैं।’
माना जा रहा है कि भारत के अभिन्न अंग माने जाने वाले पूर्वोत्तर राज्यों को दूसरे देशों के साथ एक ही आर्थिक दृष्टिकोण में शामिल करते हुए ऐसी बातें कहना नई दिल्ली को उकसाने जैसी कोशिश है।
बता दें कि भारत के पूर्वोत्तर राज्यों- अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और नगालैंड को सेवन सिस्टर्स कहा जाता है। इस तरह यूनुस का बयान एक तरह से भारत के इन राज्यों की राष्ट्रीयता को अलग करके देखने जैसा है।
इस तरह के दृष्टिकोण से नई दिल्ली में जाहिर तौर पर चिंताएं बढ़ने की संभावना है। दरअसल, वर्षों से भारत ने अपने उत्तर-पूर्वी क्षेत्र को देश के शेष भाग से जोड़ने के लिए बांग्लादेश के माध्यम से कनेक्टिविटी परियोजनाओं में भारी निवेश किया है। लेकिन यूनुस के भाषण ने इस धारणा को पलटने का प्रयास किया है। शेख हसीना की सत्ता जाने के बाद से वैसे भी भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्तों में कई मौकों पर खटास दिखी है।
पहले भी सेवन सिस्टर्स का यूनुस कर चुके हैं जिक्र
यह पहली बार नहीं है जब यूनुस ने भारत के इन राज्यों यानी सेवन सिस्टर्स का उल्लेख इस तरह से किया है। पिछले साल मोहम्मद यूनुस जब चीन के दौरे पर थे, तब भी उन्होंने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को लेकर कुछ ऐसी बातें कही थी, जो विवादों में आ गया था।
मोहम्मद यूनुस ने कहा था कि सेवन सिस्टर्स का समंदर से कोई कनेक्शन नहीं है और बांग्लादेश ही इस इलाके का गार्जियन है। चीन में यूनुस ने कहा था कि भारत के सेवन सिस्टर्स राज्य लैंडलॉक्ड हैं। इस इलाके के अभिभावक हम हैं और चीन की अर्थव्यवस्था के लिए यहाँ पर्याप्त संभावनाएं हैं।
चीन का जिक्र…दिल्ली पर भी तंज?
यूनुस ने अपने फेयरवेल भाषण में बार-बार इस बात पर जोर दिया कि बांग्लादेश ने विदेश नीति में अपनी ‘संप्रभुता, गरिमा और स्वतंत्रता’ को फिर से प्राप्त कर लिया है और अब वह ‘दूसरों के निर्देशों से निर्देशित नहीं होता।’ हालाँकि यह सुनने में सामान्य लग सकता है, लेकिन कई विश्लेषक इस भाषा को व्यापक रूप से नई दिल्ली पर टार्गेट किया हुआ भी मान रहे हैं।
युनूस ने अपने भाषण में ‘रणनीतिक संतुलन’ पर भी जोर दिया और चीन, जापान, अमेरिका और यूरोप के साथ बढ़ते संबंधों का मुख्य तौर पर उल्लेख किया। उन्होंने चीन समर्थित परियोजनाओं में हुई प्रगति का भी हवाला दिया, जिनमें तीस्ता नदी परियोजना भी शामिल है, जो भारत के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी कॉरिडोर के करीब स्थित है। भारत ऐसी परियोजनाओं को संदेह की नजर से देखता रहा है।
यूनुस ने कहा, ‘हमने चीन के साथ सहयोग को और मजबूत किया है। तीस्ता नदी परियोजना और नीलफामारी में 1,000 बिस्तरों वाले अंतरराष्ट्रीय अस्पताल के निर्माण में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।’
इसके अलावा सैन्य आधुनिकीकरण का भी यूनुस ने जिक्र किया। यूनुस ने कहा कि बांग्लादेश ने ‘किसी भी आक्रमण का मुकाबला करने’ के लिए अपने सशस्त्र बलों को मजबूत करना शुरू कर दिया है।

