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Microsoft 4,800 कर्मचारियों की करेगा छंटनी; ग्लोबल वर्कफोर्स का 2.1 फीसदी होगा कम

माइक्रोसॉफ्ट इकलौती ऐसी कंपनी नहीं है जो इसमें कटौती कर रही है। Amazon और Meta Platforms ने भी इस साल हजारों नौकरियां कम करने का ऐलान किया है क्योंकि बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर किए जा रहे भारी खर्च को सही ठहराने का दबाव बढ़ रहा है।

दिग्गज टेक कंपनी Microsoft बड़ी छंटनी की तैयारी में है। कंपनी अपने वैश्विक वर्कफोर्स में करीब 2.1 फीसदी की कटौती करेगी। कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में ज्यादा निवेश कर रही है। इसके चलते करीब 4,800 कर्मचारियों की छंटनी करेगी। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की खबर के मुताबिक, माइक्रोसॉफ्ट अपने बिजनेस की गुणवत्ता में सुधार के लिए उपाय खोज रही है जिसके चलते यह कदम उठाया गया है।

कंपनी की तरफ से यह छंटनी ऐसे समय में हुई है जब दिग्गज टेक कंपनियां AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च कर रही हैं और उन निवेशों से रिटर्न दिखाने का दबाव झेल रही हैं।

Microsoft समेत अन्य कंपनियां भी कर रहीं कटौती

माइक्रोसॉफ्ट इकलौती ऐसी कंपनी नहीं है जो इसमें कटौती कर रही है। Amazon और Meta Platforms ने भी इस साल हजारों नौकरियां कम करने का ऐलान किया है क्योंकि बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर किए जा रहे भारी खर्च को सही ठहराने का दबाव बढ़ रहा है।

इंडस्ट्री के अनुमानों के मुताबिक इस साल बड़ी टेक कंपनियों का AI में निवेश $700 बिलियन से ज्यादा होने की उम्मीद है। इससे कंपनियों के लिए बढ़ती लागत को मैनेज करते हुए रिटर्न हासिल करने की जरूरत बढ़ गई है।

माइक्रोसॉफ्ट ने 2026 की पहली छमाही में मुश्किलों का सामना करने के बाद सोमवार को छंटनी की घोषणा की। साल के पहले छह महीनों में कंपनी के शेयरों में लगभग 23% की गिरावट आई है जो 2022 के बाद से इसकी सबसे खराब छमाही परफॉर्मेंस है।

बता दें कि इस साल की शुरुआत में कंपनी ने अमेरिका में लगभग 9,000 कर्मचारियों को वॉलंटरी बायआउट (स्वेच्छा से नौकरी छोड़ने का विकल्प) की पेशकश की थी जो उसके अमेरिकी वर्कफोर्स का लगभग 7% है।

माइक्रोसॉफ्ट नए फाइनेंशियल ईयर के लिए खर्च की योजना बनाते समय, जून में अपने फाइनेंशियल ईयर के आखिर में नियमित रूप से अपने वर्कफोर्स की समीक्षा भी करती है।

AI की मांग बढ़ रही है लेकिन खर्च भी

इंडस्ट्री में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की जबरदस्त मांग की वजह से Microsoft के Azure क्लाउड कंप्यूटिंग बिजनेस में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। अप्रैल तक Azure, OpenAI के मॉडल्स का एकमात्र सेलर था जिससे कंपनी को AI सर्विसेज के बढ़ते इस्तेमाल का फायदा मिला।

AI इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने के लिए हालांकि डेटा सेंटर्स में भारी निवेश की जरूरत होती है और बढ़ती लागत Microsoft के कैश फ्लो पर दबाव डाल रही है।

कंपनी जो इस महीने के आखिर में अपने फाइनेंशियल रिजल्ट्स की घोषणा करने वाली है। माइक्रोसॉफ्ट ने अप्रैल में Azure की बिक्री के लिए वॉल स्ट्रीट के अनुमानों से ज्यादा का अनुमान लगाया था। साथ ही उसने 2026 के लिए 190 अरब डॉलर के खर्च का भी अनुमान लगाया जो बाजार की उम्मीदों से कहीं ज्यादा है।

माइक्रोसॉफ्ट का गेमिंग बिजनेस भी खतरे में

माइक्रोसॉफ्ट को अपने गेमिंग बिजनेस में भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। AI टूल्स का बढ़ता इस्तेमाल जो रोजमर्रा के बिजनेस कामों को ऑटोमेट कर सकते हैं, कंपनी के सॉफ्टवेयर बिजनेस के लिए एक संभावित चुनौती बनकर उभरा है। इसके साथ ही AI डेटा सेंटर्स की मांग के कारण मेमोरी चिप की कीमतें बढ़ने से लागत भी बढ़ गई है।

इन बढ़ी हुई लागतों की वजह से माइक्रोसॉफ्ट को Xbox कंसोल की कीमतें बढ़ानी पड़ीं जबकि गेमिंग कंसोल की मांग पहले से ही कम थी।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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