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अमेजन ने Perplexity के AI एजेंट को अपने शॉपिंग स्टोर तक पहुंचने से रोकने के लिए भेजा कानूनी नोटिस, क्या है विवाद?

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इमेज सोर्सः एआई

ई-कॉमर्स दिग्गज अमेजन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सर्च कंपनी परप्लेक्सिटी (Perplexity) को कानूनी नोटिस भेजा है। अमेजन ने परप्लेक्सिटी से कहा है कि वह अपने एआई संचालित ब्राउजर ‘कॉमेट’ (Comet) को अमेजन के ऑनलाइन मार्केटप्लेस तक पहुंचने से रोके। अमेजन का आरोप है कि परप्लेक्सिटी ने उनकी सेवा शर्तों का उल्लंघन किया है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, अमेजन का कहना है कि परप्लेक्सिटी का ब्राउजर कॉमेट, जो एक एआई आधारित शॉपिंग असिस्टेंट की तरह काम करता है, कई बार चेतावनी के बावजूद खुद को एआई एजेंट के रूप में पहचानाने में नाकाम रहा। अमेजन का दावा है कि यह पारदर्शिता के नियमों के खिलाफ है।

अमेजन के आरोपों पर परप्लेक्सिटी ने क्या कहा?

परप्लेक्सिटी ने जवाब में कहा कि कॉमेट को खुद को एआई बताने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह इंसान की ओर से काम करता है और उसे वैसे ही अधिकार प्राप्त हैं जैसे किसी मानव उपयोगकर्ता को होते हैं।

अपने ब्लॉग पोस्ट में परप्लेक्सिटी ने लिखा, “इस हफ्ते अमेजन ने हमें एक कानूनी नोटिस भेजा, जिसमें कहा गया कि हम कॉमेट यूजर्स को अमेजन पर एआई असिस्टेंट का इस्तेमाल करने से रोकें। यह अमेजन का किसी एआई कंपनी के खिलाफ पहला कानूनी हमला है, और यह पूरे इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के लिए खतरे की घंटी है।”

दिलचस्प बात यह है कि परप्लेक्सिटी के निवेशकों में अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस भी शामिल हैं।

असली डर क्या है?

परप्लेक्सिटी को आशंका है कि अगर कॉमेट खुद को एआई एजेंट के रूप में पेश करेगा, तो अमेजन अपने एआई शॉपिंग बॉट ‘रुफस’ (Rufus) को प्राथमिकता देगा और दूसरे एआई बॉट्स की पहुंच रोक देगा।

परप्लेक्सीटी ने यह भी आरोप लगाया कि अमेजन नहीं चाहता कि AI एजेंट उपयोगकर्ताओं के लिए जल्दी से चीज़ें ढूँढें और खरीदें, क्योंकि ऐसा होने पर ई-कॉमर्स कंपनी विज्ञापन और उत्पाद प्लेसमेंट बेच नहीं पाएगी।

परप्लेक्सीटी ने कहा, आसान खरीदारी का मतलब है अधिक लेन-देन और खुश ग्राहक। लेकिन अमेजन को इसकी परवाह नहीं है। वे आपको विज्ञापन, प्रायोजित परिणाम दिखाने और भ्रमित करने वाले ऑफ़र के साथ आपके खरीद निर्णयों को प्रभावित करने में अधिक रुचि रखते हैं।

अमेजन का जवाब

अमेजन ने परप्लेक्सिटी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अन्य थर्ड-पार्टी एआई एजेंट्स, जो उपयोगकर्ताओं की ओर से काम करते हैं, वे अपनी पहचान बताते हैं।

अमेजन ने कहा कि फूड डिलीवरी ऐप्स, ट्रैवल एजेंसियां और डिलीवरी सर्विसेज सभी अपने पार्टनर्स को बताते हैं कि वे किसकी ओर से काम कर रहे हैं। यही पारदर्शिता का सही तरीका है।

अमेजन और परप्लेक्सिटी के बीच इस विवाद ने एआई एजेंट्स की पारदर्शिता और नियंत्रण को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। गौरतलब है कि ये एआई टूल्स अब खरीदारी, यात्रा बुकिंग, और रेस्टोरेंट रिजर्वेशन जैसी जिम्मेदारियां भी संभालने लगे हैं।

हाल ही में व्हाट्सएप ने भी अपनी बिजनेस पॉलिसी में बदलाव करते हुए जनरल-पर्पज एआई चैटबॉट्स (जैसे परप्लेक्सिटी और जैटजीपीटी) को प्लेटफॉर्म पर बैन कर दिया था।

यह पहली बार नहीं है जब परप्लेक्सिटी विवादों में आई हो। क्लाउडफ्लेयर ने अगस्त में परप्लेक्सिटी के वेब क्रॉलर बॉट को ‘स्टेल्थ’ यानी छिपकर वेबसाइट्स स्कैन करने के आरोप में ब्लॉक कर दिया था।

क्लाउडफ्लेयर ने कहा था कि परप्लेक्सिटी बिना अनुमति वेबसाइट्स तक पहुंच बना रही थी। हालांकि, परप्लेक्सिटी ने सफाई दी कि यह उसके यूजर-ड्रिवन एआई असिस्टेंट्स का गलत आकलन था।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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