चेन्नईः मद्रास हाई कोर्ट ने सोमवार (6 अप्रैल) को पुलिस हिरासत में पिता-पुत्र की मौत मामले में अहम फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने सथानकुलम के इस मामले में नौ पुलिस कर्मियों को मौत की सजा सुनाई है। अदालत ने इसे “दुर्लभतम” अपराध करार दिया जो अत्यधिक क्रूरता और शक्ति (पॉवर) के दुरुपयोग से चिह्नित है।
जस्टिस जी मुथुकुमारन ने व्यापारी पी जयराज (59) और उनके बेटे जे बेनिक्स (31) की हत्या के मामले में सभी नौ आरोपियों को हत्या और संबंधित अपराधों का दोषी पाया। अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के इस तर्क को स्वीकार किया कि हिरासत में यातना पूर्व नियोजित थी और रात भर जारी रखी गई थी जिसके लिए अधिकतम सजा उचित थी। अदालत ने छह साल बाद इस मामले में अपना फैसला सुनाया है।
मद्रास हाई कोर्ट ने क्या सुनवाई की?
मद्रास हाई कोर्ट ने जिन लोगों को दोषी ठहराया है उनमें इंस्पेक्टर एस श्रीधर, सब-इंस्पेक्टर पी रघु गणेश और के बालकृष्णन, हेड कांस्टेबल एस मुरुगन और ए समादुरई, तथा कांस्टेबल एम मुथुराज, एस चेल्लादुरई, एक्स थॉमस फ्रांसिस और एस वेलुमुथु शामिल हैं। दसवें आरोपी, विशेष सब-इंस्पेक्टर पॉलदुरई की सुनवाई के दौरान कोविड-19 से मृत्यु हो गई।
2020 के इस मामले में देशभर में गुस्सा देखा गया था। जयराज और बेनिक्स को 19 जून को कथित तौर पर कोविड-19 लॉकडाउन प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए मोबाइल एक्सेसरीज की दुकान की खुली रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। जांचकर्ताओं ने बाद में पाया कि उन्हें सथानकुलम पुलिस स्टेशन के अंदर लगातार यातनाएं दी गईं जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। इनमें गंभीर आघात और अत्यधिक रक्तस्राव शामिल थे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जयराज को 19 जून को शाम करीब 7:30 बजे कामराज चौक से उठाया गया था। अपने पिता की हिरासत के बारे में पता चलने पर बेनिक्स पुलिस के साथ थाने गया था।
न्यायिक मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट में पीड़ितों के शरीर पर 18 गंभीर चोटें दर्ज की गईं। जबकि तीन डॉक्टरों की एक टीम द्वारा की गई अंतिम पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पुष्टि की कि बेनिक्स की मृत्यु हिरासत में यातना के दौरान लगी गंभीर चोटों से उत्पन्न जटिलताओं के कारण हुई।
पीड़ितों के कपड़े तक उतारे गए थे
इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक, यह क्रूरता कई घंटों तक चली और कहा जाता है कि पिटाई की तीव्रता बढ़ाने के लिए दोनों पीड़ितों के कपड़े उतार दिए गए थे। सीबीआई ने यह भी नोट किया कि जयराज ने अपने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं, जिनमें रक्तचाप और मधुमेह शामिल हैं, का हवाला देते हुए अधिकारियों से हमला रोकने की गुहार लगाई थी।
आरोप है कि पीड़ितों को फर्श से अपना खून साफ करने के लिए मजबूर किया गया जबकि खून से सने कपड़े फेंक दिए गए।
जांच के मुताबिक, अधिकारियों ने हमले के बाद सबूत नष्ट करने का प्रयास किया। अपराध को दबाने के लिए झूठा मामला दर्ज किया गया। दोनों व्यक्तियों की कुछ दिनों बाद 22 और 23 जून को कोविलपट्टी उप-जेल में हिरासत में मौत हो गई, जिससे जनता का गुस्सा और बढ़ गया और जवाबदेही की मांग उठने लगी।

