देश के बड़े-बड़े नेता और मंत्री 2014 से पहले विदेश यात्राओं पर जाते रहे। यह ‘राज की बात’ उसी दौर की कुछ कहानियों पर आधारित है।
रेल मंत्री रहते लालू प्रसाद यादव लंदन गए थे। उनके साथ रेल बोर्ड के कई बड़े अधिकारी और उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी बनने वाले बेटे तेजस्वी प्रसाद यादव भी थे। सरकारी बैठक के दौरान लालू जी ने सुझाव दिया कि भारत के रेलवे मंत्रालय के एक अधिकारी की पोस्टिंग लंदन में की जाए, जैसा पहले होता रहा था। लेकिन उच्चायुक्त कमलेश शर्मा ने इस सुझाव को अमान्य कर दिया और समझाया कि अब भारत में रेलवे का ट्रैक सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में बनने लगा है, जबकि पहले इंग्लैंड से ही लोहे का ट्रैक भारत भेजा जाता था। दरअसल, लालू जी अपने विश्वसनीय अधिकारी को वहां भेजना चाहते थे।
उच्चायोग के अधिकारियों से उन्होंने तेजस्वी को विश्व प्रसिद्ध क्रिकेट स्टेडियम ले जाने का अनुरोध किया। अधिकारियों ने तुरंत व्यवस्था की और तेजस्वी को लॉर्ड्स स्टेडियम ले जाया गया। लंदन में तेजस्वी ने चकडोल (wheel) पर चढ़ने की जिद की और ‘मेरी गो राउंड’ पर कई चक्कर लगाए।
बिहार के एक और बड़े नेता रामविलास पासवान, जब इस्पात मंत्री थे, तो सपरिवार लंदन गए। उनके साथ मंत्रालय के सचिव, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और विभिन्न स्टील प्लांट्स के मैनेजिंग डायरेक्टर भी थे। उन्होंने लंदन के एक बड़े और महंगे होटल में प्रवास किया, जो उन होटलों से काफी महंगा था जहां अन्य भारतीय मंत्री ठहरते थे।
मंत्री जी हर दिन अलग-अलग बड़े होटलों में डिनर लेते थे। सभी जगह चाइनीज फूड परोसा जाता क्योंकि श्रीमती पासवान को वह पसंद था। प्रसिद्ध उद्योगपति लक्ष्मी मित्तल ने भी मंत्री जी को डिनर दिया और वहां भी चाइनीज फूड की ही सिफारिश की गई। उच्चायोग में आयोजित डिनर मेन्यू में चाइनीज आइटम नहीं था, लेकिन अंतिम समय पर बाज़ार से चाइनीज रेस्तरां से मंगवाया गया।
पासवान जी ने रात में पपीता और अमरूद खाने की इच्छा जताई, जिसे भी तुरंत मंगाया गया। लंदन से लौटने से पहले उन्होंने अपने छोटे भाई से फोन पर बात की और उसकी मांग पर एक कीमती wrist watch खरीदा। लौटते समय मंत्री जी के पास 13 बड़े सूटकेस थे।
अब बात छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह के लंदन दौरे की। वे उद्योग की संभावनाओं की तलाश में सपत्नीक विदेश यात्रा पर गए थे। साथ में मुख्य सचिव भी अपनी धर्मपत्नी के साथ थे। रमन सिंह वाजपेयी सरकार में उद्योग राज्य मंत्री रह चुके थे। वे लंदन स्थित मैडम तुसाद संग्रहालय भी गए।
यहीं एक दिलचस्प वाकया हुआ। मुख्य सचिव की पत्नी ने अपने साहब को इशारा किया, “देखिए, सामने हमारे एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी का भी पुतला है।” जब मुख्यमंत्री उस ‘पुतले’ के पास गए, तो वह व्यक्ति हाथ जोड़कर बोला, “गुड मॉर्निंग सर!” वह पुतला नहीं बल्कि सजीव अधिकारी थे, जिन्हें अपने गांव जाने की छुट्टी मुख्यमंत्री ने ही मंजूर की थी।
भारत लौटने पर सामान्य प्रशासन विभाग ने उस अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा।

