नई दिल्ली: केरल उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2’ के निर्माताओं को बड़ी राहत दे दी है। पीठ ने फिल्म की रिलीज पर 15 दिनों के लिए अंतरिम रोक लगाने वाले एकल पीठ के आदेश पर रोक लगा दिया है। इस फैसले से फिल्म की रिलीज का रास्ता साफ हो गया है, जो आज (शुक्रवार) से रिलीज होने वाली थी।
फिल्म की रिलीज का रास्ता साफ करते हुए पीठ ने राय व्यक्त की कि चूंकि सेंसर बोर्ड ने पूरी फिल्म देखी है, इसलिए यह अनुमान लगाया जा सकता है कि प्रमाणन देने का निर्णय व्यापक विश्लेषण के बाद लिया गया था। यदि फिल्म सांप्रदायिक तनाव को भड़काती है, तो राज्य की कानून व्यवस्था मशीनरी का यह कर्तव्य है कि वह इससे निपटे।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार अपने आदेश में डिवीजन बेंच ने वायकॉम 18 मीडिया प्राइवेट लिमिटेड मामले में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया, जिसमें शीर्ष न्यायालय ने कहा था कि एक बार सर्टिफिकेट जारी हो जाने के बाद, प्रथम दृष्टया यह अनुमान लगाया जाता है कि संबंधित प्राधिकरण ने सार्वजनिक व्यवस्था सहित सभी दिशानिर्देशों को ध्यान में रखा है।
इससे पहले जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस की अध्यक्षता वाली एकल पीठ ने गुरुवार को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) द्वारा दी गई मंजूरी को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई करते हुए रिलीज पर 15 दिन की रोक का अंतरिम आदेश पारित किया था। एकल पीठ ने कहा था कि फिल्म को लेकर याचिकाकर्ताओं की आशंकाएं ‘संभवतः जायज’ हैं। पीठ फिल्म निर्माताओं को अदालत के अंतिम फैसले का इंतजार करने को कहा था।
दो जजों की बेंच ने पलटा फैसला
एकल पीठ के आदेश के बाद फिल्म के निर्माता विपुल शाह ने गुरुवार देर शाम इसे चुनौती दी थी। इसके बाद गुरुवार देर रात फिल्म निर्माता की दायर अपील पर जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और पी वी बालकृष्णन ने सुनवाई भी की लेकिन फैसला सुरक्षित रख लिया था। दो जजों की बेंच ने गुरुवार को रात 7.30 बजे मामले पर सुनवाई शुरू की और करीब 2 घंटे तक इस पर बहस हुई।
शाह ने हाई कोर्ट में अपनी अपील में दावा किया था कि फिल्म केरल राज्य या किसी भी धार्मिक समुदाय को नुकसान नहीं पहुंचाती या बदनाम नहीं करती। उनके वकीलों ने अदालत को बताया था, ‘फिल्म केवल एक सामाजिक बुराई को दर्शाती है।’
निर्माता ने अदालत को यह भी बताया कि यदि फिल्म की रिलीज रोक दी जाती है, तो इससे निर्माताओं को ‘आर्थिक रूप से भारी नुकसान; होगा, क्योंकि यह फिल्म 27 फरवरी से भारत के 1,500 सिनेमाघरों और विदेशों में 300 से अधिक सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने वाली है।
इससे पहले एकल पीठ ने गुरुवार को फिल्म की रिलीज पर रोक लगा दी थी। कोर्ट का कहना था कि सेंसर बोर्ड (सीबीएफसी) ने ऐसा लगता है कि फिल्म की रिलीज को मंजूरी देते समय ठीक से विचार नहीं किया। जज ने यह भी कहा कि ‘फिल्म में सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने या किसी समुदाय को अपमानित करने की संभावना प्रथम दृष्टया लगती है, इसलिए उच्च अधिकारियों द्वारा जांच किए बिना इसकी रिलीज कानूनी रूप से अनुचित होगी।’

