Friday, March 20, 2026
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2017 के केरल अभिनेत्री अपहरण-हमला मामले में एक्टर दिलीप बरी, 6 दोषी करार; सरकार करेगी अपील

फैसले के बाद दिलीप ने कहा कि यह मामला उनके करियर और छवि को खत्म करने के लिए रचा गया था। उन्होंने दावा किया कि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और उनकी टीम ने मुख्य आरोपी और उसके साथियों के साथ मिलकर उनके खिलाफ झूठी कहानी गढ़ी और मीडिया के जरिए प्रचारित की।

कोच्चिः एर्नाकुलम की जिला एवं सत्र न्यायालय ने सोमवार को मलयालम अभिनेता दिलीप को 2017 के चर्चित अपहरण और यौन हमले के मामले में सभी आरोपों से बरी कर दिया।

कोर्ट ने कहा कि अभियोजन यह साबित करने में नाकाम रहा कि दिलीप किसी आपराधिक साजिश का हिस्सा थे। हालांकि अदालत ने पहले छह आरोपियों को आपराधिक साजिश, अपहरण, गलत तरीके से रोके रखने, छेड़छाड़, निर्वस्त्र करने की कोशिश और सामूहिक दुष्कर्म सहित कई धाराओं में दोषी पाया। इनकी सजा पर फैसला 12 दिसंबर को सुनाया जाएगा।

जिन छह आरोपियों को दोषी माना गया है, उनमें मुख्य आरोपी पल्सर सुनी (सुनील) शामिल है, जो फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े ड्राइवर थे। अन्य दोषियों में ड्राइवर मार्टिन एंटनी, ड्राइवर मणिकंदन, इलेक्ट्रिशियन वीजीश वीपी, और बस क्रू के सदस्य सलीम एच व प्रदीप शामिल हैं। सभी पर आईपीसी की गंभीर धाराओं के साथ आईटी एक्ट के प्रावधान भी लागू किए गए हैं।

अदालत के फैसले के बाद दिलीप ने क्या कहा?

फैसले के बाद एर्नाकुलम प्रिंसिपल सेशंस कोर्ट से कड़ी सुरक्षा के बीच जैसे ही वे बाहर आए, समर्थकों ने उनका स्वागत किया। वकीलों की एक बड़ी टीम उन्हें घेरे हुए कार तक लेकर गई। कोर्ट परिसर के बाहर और उनके अलुवा स्थित घर के पास मिठाइयां बांटकर जश्न मनाया गया।

अदालत के बाहर दिलीप ने मीडिया से कहा कि पुलिस द्वारा गढ़ी गई पूरी कहानी अदालत में टिक नहीं सकी। अदालत में पुलिस की बनाई हुई कहानी फेल हो गई।

दिलीप ने मीडिया से बातचीत में जांच एजेंसी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उन्हें जानबूझकर फंसाया गया।
पुलिस टीम ने मुख्य आरोपी और कुछ अन्य आरोपियों को मिलाकर एक कहानी तैयार की, ताकि मुझे नुकसान पहुंचाया जा सके और मेरा भविष्य खत्म किया जा सके।

उन्होंने दावा किया कि साजिश की शुरुआत उनकी पूर्व पत्नी मंजू वारियर से हुई। उन्होंने कहा, साजिश मेरे खिलाफ मंजू से शुरू हुई। फिर एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उससे जुड़ गया। इसके बाद पुलिस ने कुछ मीडिया समूहों का इस्तेमाल कर बेबुनियाद खबरें फैलाईं। सोशल मीडिया और कुछ मीडिया चैनलों का इस्तेमाल किया गया। इन नौ सालों में मेरी छवि और जिंदगी तबाह हो गई।

अपने वकीलों का धन्यवाद करते हुए दिलीप ने कहा, “मेरे साथ खड़े रहने वाले सभी लोगों का आभार। मेरे वकील रमन पिल्लई का खास तौर पर धन्यवाद, जिनका मुझे हमेशा एहसान रहेगा। कई और वकीलों ने भी मेरा साथ दिया। आज मेरे लिए बेहद खुशी का दिन है।”

जब उनसे पूछा गया कि साजिशकर्ता कौन हैं, तो दिलीप ने कहा कि यह आप (मीडिया) पता लगाएं, आप ऐसा कर सकते हैं। इसके बाद वे कार में बैठकर रवाना हो गए।

दिन की शुरुआत में करीब 9.30 बजे दिलीप अपने भाई और एक अन्य आरोपी के साथ एर्नाकुलम पहुंचे। वे पहले अपने वकील के दफ्तर गए और फिर कोर्ट पहुंचे। अदालत के निर्देश पर सभी 10 आरोपी फैसले के दौरान मौजूद थे।

अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आपराधिक साजिश का आरोप संदेह से परे साबित नहीं कर सका। इसी आधार पर दिलीप और तीन अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया, जबकि पहले छह आरोपियों को दोषी करार दिया गया।

दिलीप के अलावा चार्ली थॉमस, सैनिल कुमार उर्फ मेस्त्री सैनिल और शरथ नायर को भी बरी कर दिया गया। चार्ली पर आरोप था कि उन्होंने कुछ आरोपियों को घटना के बाद छिपने में मदद की।

सैनिल पर जेल में पल्सर सुनी के साथ मिलकर दिलीप से पैसे वसूलने की साजिश का आरोप था। शरथ पर हमले के वीडियो को नष्ट करने का आरोप था। तीन अन्य आरोपी विश्नु, विपिनलाल और अनीश पहले ही सरकारी गवाह बन चुके थे।

मामला क्या था?

17 फरवरी 2017 को कोच्चि में एक प्रसिद्ध अभिनेत्री को चलती कार में लगभग दो घंटे तक बंधक बनाकर यौन उत्पीड़न किया गया था। इस मामले में दस आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चला। दिलीप आरोपी नंबर 8 थे और उन पर सबूत नष्ट करने का अतिरिक्त आरोप भी था। पहली चार्जशीट अप्रैल 2017 में दाखिल हुई।

दिलीप को जुलाई 2017 में गिरफ्तार किया गया और अक्टूबर 2017 में उन्हें जमानत मिल गई। मामले में कुल 261 गवाहों की गवाही हुई, जिनमें कई फिल्मी हस्तियां शामिल थीं, हालांकि कई बाद में मुकर गईं। जांच अधिकारी से 109 दिनों तक जिरह चली।

2021 में एक नए आरोप के बाद फिर से जांच शुरू हुई कि दिलीप के पास हमले के वीडियो थे। अदालत ने 834 दस्तावेजों को रिकॉर्ड में शामिल किया और दो डिफेंस गवाहों की गवाही भी सुनी। ट्रायल के दौरान पूर्व विधायक पी. टी. थॉमस और निर्देशक बालचंद्र कुमार जैसे दो अहम गवाहों का निधन हो गया। इस घटना ने पूरे केरल में खलबली मचा दी थी और फिल्म इंडस्ट्री में शक्ति के दुरुपयोग और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई थी।

सरकार फैसले को चुनौती देगी

केरल के कानून मंत्री पी. राजीव ने कहा कि सरकार इस फैसले को चुनौती देगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद अपील का निर्णय लिया गया है। अब अदालत के फैसले को विस्तार से पढ़कर यह देखा जाएगा कि कहां कमी रह गई। राजीव ने कहा कि सरकार पीड़िता के साथ है और उसे न्याय दिलाया जाएगा।

उधर, पीड़िता ने कहा कि फिलहाल वह कोई प्रतिक्रिया नहीं देना चाहतीं। वहीं, उनकी करीबी और डबिंग आर्टिस्ट भगवती भगलेक्ष्मी ने कहा कि यह फैसला पहले से ही अनुमानित था। उन्होंने कहा, मैंने यह बात चार साल पहले ही कही थी। महिला संगठनों ने फैसले पर निराशा जताई है।


अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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