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करूर भगदड़ः 40 मौतों पर घिरी टीवीके, CBI जांच की मांग; सरकार ने गठित किया आयोग

शनिवार को विजय की रैली के दौरान मची भगदड़ में कम से कम 40 लोगों की मौत हो गई और 100 के करीब लोग घायल हुए हैं। विजय ने अपनी ओर से मृतकों के परिवारों को 20 लाख रुपये और घायलों को 2 लाख रुपये देने की घोषणा की।

तमिलनाडु के करूर भगदड़ मामले में अभिनेता-नेता विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (टीवीके) ने सीबीआई जांच की मांग की है। शनिवार को विजय की रैली के दौरान मची भगदड़ में कम से कम 40 लोगों की मौत हो गई और 100 के करीब लोग घायल हुए हैं। विजय ने अपनी ओर से मृतकों के परिवारों को 20 लाख रुपये और घायलों को 2 लाख रुपये देने की घोषणा की। वहीं, इस दर्दनाक हादसे ने राज्य की राजनीति और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अदालत में सीबीआई जांच की मांग

रविवार को विजय की पार्टी टीवीके की ओर से अधिवक्ताओं का एक दल, पार्टी के विधिक प्रकोष्ठ अध्यक्ष एस. अरिवाझगन के नेतृत्व में, जस्टिस एम. धंधापानी के आवास पहुँचा और इस मामले की सीबीआई या विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराने का अनुरोध किया। जज ने अधिवक्ताओं को निर्देश दिया कि वे याचिका मदुरै पीठ में दाखिल करें, जिस पर सोमवार दोपहर सुनवाई होगी।

इस बीच, जस्टिस एन. सेंथिलकुमार आज शाम एक तत्काल याचिका पर सुनवाई करेंगे जिसमें टीवीके पर आगे जांच पूरी होने तक जनसभाएं करने पर रोक लगाने की मांग की गई है।

हादसे की जांच के लिए आयोग का गठन

उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि सेवानिवृत्त न्यायाधीश अरुणा जगदीशन की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग करूर जाकर मामले की जांच करेगा और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन रिपोर्ट के आधार पर उपयुक्त कदम उठाएंगे।

विदेश यात्रा बीच में छोड़कर लौटे उदयनिधि ने मृतकों को श्रद्धांजलि दी और अस्पताल में घायलों से मुलाकात की। उनके साथ स्वास्थ्य मंत्री सुब्रमण्यम और अन्य कैबिनेट सहयोगी भी मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि 345 डॉक्टर और नर्सें घायलों के इलाज के लिए तैनात की गई हैं।

टीवीके पर सवाल, डीएमके भी घिरी

हादसे के बाद से टीवीके का करूर पश्चिम जिला कार्यालय बंद है और कई स्थानीय पदाधिकारी लापता बताए जा रहे हैं। पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं ने स्वीकार किया कि रैली स्थल पर नेता और पदाधिकारी अपने परिवारों के साथ घबराकर निकल गए, जिससे मदद के लिए आए लोग असहाय रह गए। यह स्थिति उस पार्टी के लिए चिंता का विषय है, जिसने कभी रक्तदान और चिकित्सा शिविरों से अपनी पहचान बनाई थी।

पुलिस महानिदेशक जी. वेंकटरमन ने बताया कि टीवीके ने लगभग 10,000 लोगों की सभा की अनुमति मांगी थी, लेकिन रैली स्थल पर 50,000 से अधिक लोग पहुँच गए। सुबह 11 बजे से भीड़ इकट्ठी हो गई थी जबकि विजय रात 7:40 बजे पहुँचे। स्थल पर भोजन और पानी की कोई पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी, जिससे अफरा-तफरी और बढ़ गई।

रविवार को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने इस त्रासदी के लिए सीधे तौर पर डीएमके सरकार को जिम्मेदार ठहराया और जवाबदेही की मांग की। स्टालिन द्वारा मृतकों के परिवारों के लिए घोषित 10 लाख रुपये के मुआवजे को घोर अपर्याप्त बताया। उन्होंने प्रत्येक मृतक के परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा और घायलों के लिए पर्याप्त सहायता की मांग की है।

उन्होंने इस साल की शुरुआत में हुई कल्लाकुरुचि शराब त्रासदी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, तब 65 लोगों की मौत हुई थी, फिर भी मुख्यमंत्री ने दौरा नहीं किया। हर बार जवाबदेही गायब रहती है। उन्होंने करूर आपदा के लिए जिम्मेदार लोगों से तत्काल इस्तीफा देने की मांग की है।

मुआवजे और मदद की घोषणाएं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मृतकों के परिजनों को प्रधानमंत्री राहत कोष से 2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये देने की घोषणा की। तमिलनाडु सरकार ने भी मृतकों के परिवारों को 10 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायल मरीजों को 1 लाख रुपये देने का ऐलान किया। विजय ने भी अपनी ओर से मृतकों के परिवारों को 20 लाख रुपये और घायलों को 2 लाख रुपये देने की घोषणा की।

केंद्र और राज्य सरकार के अलावा विजय ने भी मृतकों के परिवारों को 20 लाख रुपये और घायलों को 2 लाख रुपये देने की घोषणा की है। विजय ने कहा, “करूर में हुई घटना ने मेरा दिल और दिमाग भारी कर दिया है। जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके दर्द को शब्दों में बयां नहीं कर सकता। यह राशि बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन इस मुश्किल घड़ी में मेरा फर्ज है कि आपके साथ खड़ा रहूं।”

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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