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जम्मू-कश्मीर: किश्तवाड़ में 326 दिन चले हाई-एल्टीट्यूड ऑपरेशन में 7 आतंकी मारे गए

इस बेहद जटिल ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया गया। घने जंगलों और गुफाओं में छिपे आतंकियों को ट्रैक करने के लिए सेना ने एफपीवी ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी, यूएवी और उन्नत संचार प्रणालियों का इस्तेमाल किया।

श्रीनगरः जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में भारतीय सेना ने एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। लगभग 11 महीने (326 दिन) तक चले निरंतर ‘हाई-एल्टीट्यूड’ ऑपरेशन के बाद सेना ने सात कुख्यात आतंकवादियों को मार गिराया है। भारतीय सेना की व्हाइट नाइट कोर (16 कोर) ने सोमवार को इस सफल अभियान की आधिकारिक पुष्टि की।

दुर्गम पहाड़ियों और बर्फबारी के बीच चला अभियान

व्हाइट नाइट कोर ने सोशल मीडिया के माध्यम से बताया कि किश्तवाड़ के ऊंचे और कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में यह अभियान पिछले 326 दिनों से जारी था। भारतीय सेना के जवानों ने हाड़ कंपा देने वाली ठंड, बारिश और भारी बर्फबारी के बीच आतंकवादियों का पीछा किया। खुफिया एजेंसियों के मजबूत इनपुट के आधार पर सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ (सीआरपीएफ) ने एक संयुक्त कार्रवाई करते हुए किश्तवाड़ के चटरू क्षेत्र में छिपे सभी सात आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया।

इस बेहद जटिल ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया गया। घने जंगलों और गुफाओं में छिपे आतंकियों को ट्रैक करने के लिए सेना ने एफपीवी ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी, यूएवी और उन्नत संचार प्रणालियों का इस्तेमाल किया। सेना ने स्पष्ट किया कि ‘सैफुल्लाह’ और उसके साथियों का खात्मा यह साबित करता है कि सुरक्षा बलों के संकल्प और साहस के सामने कोई भी आतंकी नेटवर्क टिक नहीं सकता।

जैश-ए-मोहम्मद के नेटवर्क पर प्रहार

किश्तवाड़ के चटरू इलाके में पिछले साल से ही सुरक्षा बलों और पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के बीच दर्जन भर से अधिक मुठभेड़ हुई थीं। ये आतंकवादी अपनी पनाहगाहें बदलते रहते थे और डोडा, कठुआ व उधमपुर के जंगलों का सहारा लेकर सुरक्षा बलों को चकमा देने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि, ‘ऑपरेशन त्रासी-1’ के तहत सेना ने उनके इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया है। आतंकियों के कब्जे से भारी मात्रा में गोला-बारूद और हथियार बरामद किए गए हैं।

व्हाइट नाइट कोर ने मारे गए आतंकवादियों की तस्वीरें साझा करते हुए कड़ा संदेश दिया है कि जम्मू-कश्मीर की स्थिरता को चुनौती देने वालों के लिए भारतीय धरती पर कोई जगह या पनाहगाह नहीं है। यह ऑपरेशन न केवल सैन्य दृष्टिकोण से बड़ी जीत है, बल्कि सीमा पार से संचालित होने वाले आतंक के ढांचे पर एक गहरी चोट भी है।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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