Homeविश्वइजराइल के निशाने पर थे अराघची और गालिबाफ! अमेरिका ने ईरान को...

इजराइल के निशाने पर थे अराघची और गालिबाफ! अमेरिका ने ईरान को किया था अलर्ट: रिपोर्ट

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों का मानना था कि युद्ध के शुरुआती दौर में इजराइल की रणनीति ईरान के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाकर उसकी सत्ता व्यवस्था को कमजोर करने की थी। इसी क्रम में कई वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों की हवाई हमलों में मौत हुई। हालांकि बाद में…

अमेरिका और इजराइल को लंबे समय से मध्य पूर्व में सबसे करीबी सहयोगी माना जाता रहा है, लेकिन अब एक नई रिपोर्ट ने संकेत दिया है कि ईरान को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद पहले से कहीं अधिक गहरे हो चुके हैं। अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि युद्ध और परमाणु वार्ता के दौरान अमेरिका को आशंका थी कि इजराइल ईरान के दो शीर्ष नेताओं की हत्या कर सकता है। इसी आशंका के चलते उसने पश्चिम एशिया के कुछ देशों के माध्यम से तेहरान को गोपनीय चेतावनी भी भिजवाई थी।

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों को डर था कि अगर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ की हत्या होती है तो अप्रैल में शुरू हुई युद्धविराम और परमाणु वार्ताएं पूरी तरह पटरी से उतर सकती हैं। यही कारण था कि अमेरिका ने क्षेत्रीय सहयोगियों से कहा कि वे ईरान को संभावित इजराइली कार्रवाई के बारे में सतर्क करें।

द न्यूयॉर्क टाइम्स ने वर्तमान और पूर्व अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से लिखा है कि अप्रैल में युद्धविराम की पहली कोशिशों के दौरान ही अमेरिका और इजराइल की रणनीतियों में अंतर साफ दिखाई देने लगा था। शुरुआत में दोनों देशों का साझा लक्ष्य ईरान पर दबाव बनाना था, लेकिन जैसे ही अमेरिका ने बातचीत और कूटनीतिक समाधान पर जोर देना शुरू किया, इजराइल ने सैन्य दबाव बनाए रखने की नीति नहीं छोड़ी।

अमेरिका ने क्यों किया ऐसा?

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों का मानना था कि युद्ध के शुरुआती दौर में इजराइल की रणनीति ईरान के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाकर उसकी सत्ता व्यवस्था को कमजोर करने की थी। इसी क्रम में कई वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों की हवाई हमलों में मौत हुई। हालांकि बाद में अमेरिका ने माना कि वार्ता शुरू होने के बाद ऐसे किसी भी हमले से शांति प्रक्रिया ध्वस्त हो सकती थी।

गौरतलब है कि मार्च में भी ऐसी खबरें आई थीं जिसमें कहा गया था कि इजराइल की हिट लिस्ट से गालिबाफ और अराघची को हटा दिया है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने एक पाकिस्तानी सूत्र के हवाले से कहा था कि “इजराइल को उनके ठिकाने की जानकारी थी और वे उन्हें मारना चाहते थे। हमने (सूत्र ने) अमेरिका से कहा कि अगर इन्हें भी मार दिया गया, तो फिर बातचीत करने के लिए कोई बचेगा ही नहीं। इसलिए, अमेरिका ने इसराइल से पीछे हटने को कहा।”

द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने वही दावा किया है कि मार्च से ही अराघची और गालिबाफ इजरायल की संभावित टारगेट सूची में शामिल थे। हालांकि युद्धविराम वार्ता शुरू होने के बाद अमेरिका के दबाव पर उनके नाम इस सूची से हटा दिए गए। अब्बास अराघची उस समय अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता में ईरान का नेतृत्व कर रहे थे, जबकि संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ भी राजनीतिक और सुरक्षा स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे। दोनों ही युद्धविराम और भविष्य के शांति समझौते के लिए ईरान की ओर से प्रमुख चेहरे माने जा रहे थे। अमेरिकी अधिकारियों का आकलन था कि अगर इन दोनों नेताओं की हत्या होती है तो ईरान वार्ता से पीछे हट सकता है और क्षेत्र में एक बार फिर व्यापक युद्ध छिड़ सकता है।

गालिबाफ के विमान को बनाया जाना था निशाना!

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वर्ष 2025 के दौरान गालिबाफ दो बार संभावित हमलों से बाल-बाल बचे। पहली बार पिछले साल 12 दिन चले युद्ध के दौरान और दूसरी बार इस साल संघर्ष शुरू होने के बाद। अधिकारियों ने ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ को बताया कि दोनों ही मौकों पर उन्हें मलबे के नीचे से निकाला गया था। हालांकि यह खतरा अप्रैल में एक बार फिर बढ़ गया था।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 12 अप्रैल को इजराइल गालिबाफ को निशाना बनाने वाला था, जब वह पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से तेहरान लौट रहे थे। इस दौरान अमेरिकी एजेंसियों को खुफिया जानकारी मिली कि दो इजराइली लड़ाकू विमान इराक के रास्ते ईरानी हवाई क्षेत्र की ओर बढ़ रहे हैं और गालिबाफ के विमान को निशाना बना सकते हैं। इजराइल के दो फाइटर जेट ईरानी हवाई क्षेत्र में घुस भी आए थे। यह सूचना तत्काल ईरान तक पहुंचाई गई। इसके बाद गालिबाफ के विमान ने अपनी सामान्य उड़ान योजना बदल दी और सीधे तेहरान जाने के बजाय उत्तर-पूर्वी शहर मशहद में आपात लैंडिंग की। बाद में वे सड़क मार्ग से तेहरान पहुंचे।

अमेरिका चाहता था बातचीत, इजराइल चाहता था दबाव

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका का उद्देश्य युद्धविराम कायम रखते हुए ईरान के साथ परमाणु समझौते की दिशा में आगे बढ़ना था। जून में दोनों देशों के बीच एक प्रारंभिक ढांचा तैयार हुआ, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और भविष्य की परमाणु वार्ता का आधार बनाने पर सहमति बनी।

लेकिन इजरायल इस दिशा से संतुष्ट नहीं था। वहां के सुरक्षा प्रतिष्ठान का मानना था कि यह समझौता ईरान को आर्थिक राहत देगा, जिससे वह अपने मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव को फिर मजबूत कर सकेगा। इजरायल की प्राथमिकता ईरान की सत्ता व्यवस्था को कमजोर करना, उसके प्रॉक्सी नेटवर्क को तोड़ना और उसकी सैन्य क्षमता को स्थायी नुकसान पहुंचाना थी।

रिपोर्ट इस बात की ओर भी इशारा करती है कि ईरान नीति को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच भी मतभेद बढ़ते गए। दक्षिणी लेबनान में इजराइल की सैन्य कार्रवाई को लेकर ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से नेतन्याहू से अधिक संयम बरतने को कहा था और चेतावनी दी थी कि बहुत अधिक लोगों की जान जा चुकी है।

मीडिया रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि दोनों नेताओं के बीच निजी बातचीत भी काफी तनावपूर्ण रही। हालांकि इन कथित बातचीतों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

आयातोल्लाह अली खामेनेई के जनाजे में नहीं शामिल होंगे ईरानी सुप्रीम लीडर? मोजतबा के करीबी ने क्या बताया?

author avatar
अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
Anil Sharma, Anil Anuj, Anil anuj articles, bole bharat, बोले भारत, अनिल शर्मा, अनिल अनुज,
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular